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भादवा तीज के अवसर पर नागौर के अहिछत्रपुर किले में मंगलवार को महिलाओं की भीड़ उमड़ी। पूरे साल में एक बार खुलने वाले नागौर किले के ठाकुरजी मंदिर के कपाट खुले। महिलाओं ने दर्शन कर ठाकुरजी का पालने में झुलाया और मिठाई का भाेग लगाया। सतरंगी राजस्थानी ड्रेसे
भादवा तीज पर साल में 1 बार खुलने वाले कान्हाजी के मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े। भादवा महीने की तीज के अवसर पर महिलाएं काफी रोमांचित नजर आईं। बाग-बगीचे में महिलाओं ने हिंडोले डाले और झूले झूलकर लुत्फ उठाया। किले में स्थित कान्हाजी के मंदिर में महिलाओं ने कान्हाजी को झुलाया और हिंडोला महोत्सव मनाया।
महिलाओं ने लहरिया, सतरंगी परिधान पहने और फोटो खिंचवाई। कान्हाजी मंदिर में सत्संग का कार्यक्रम हुआ। साल में 1 बार खुलने वाले कान्हाजी के मंदिर में शहरवासियों के साथ ही ग्रामीण अंचल की महिलाएं भी बड़ी संख्या में पहुंची। पुजारी लक्ष्मीनारायण सिखवाल ने प्रसाद वितरित किया। पुजारी लक्ष्मीनारायण सिखवाल ने बताया कि मंदिर में रोजाना सुबह और शाम को पूजा की जाती है। लेकिन आमजन के लिए पूरे साल में सिर्फ एक बार ही खोले जाते हैं।
ये है नागौर किले के ठाकुरजी मंदिर की मान्यता
नागौर किले में स्थित कान्हाजी के मंदिर की स्थापना चौथी शताब्दी में राजा भगत सिंह ने की थी। उस समय कोई स्थाई मंदिर नहीं था, इसलिए तत्कालीन समय में भादवा तीज को कान्हाजी की मूर्ति की यहां लाकर पूजा की जाती थी। मंदिर की स्थापना के बाद यहां मूर्ति को स्थाई रूप से विराजमान किया गया और परंपरा के अनुसार सिर्फ भादवा तीज को ही पूजा की जाने लगी। नागौर में भादवा तीज को कजळी तीज और सांतुड़ी तीज भी कहा जाता है।
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