एक ओर जिला कलेक्टर ने बुधवार को जर्जर, क्षतिग्रस्त और असुरक्षित भवनों पर चेतावनी बोर्ड लगाने के निर्देश दिए। दूसरी ओर वास्तविकता यह है कि पर्याप्त देखभाल के अभाव में कलेक्ट्रेट परिसर छतों का हाल खराब है। विभिन्न न्यायालयों वाले बारामदे, रिकॉर्ड रूम,
जिला कलेक्ट्रेट के बरामदे में एसडीएम, राजस्व अपील अधिकारी, भू-प्रबंध अधिकारी और श्रम न्यायालय हैं। इसके अलावा डीएफओ और उपखंड निर्वाचन शाखा भी हैं। जिनमें आने वाले नागरिक, पक्षकार और अधिवक्ता इसी में बैठते हैं। बरामदे की छत काफी क्षतिग्रस्त हो रखी है। कई जगहों से प्लास्टर गिर चुका है। भू-प्रबंधन अधिकारी न्यायालय के बाहर गुरुवार छत का प्लास्टर गिर गया। ऐसे में बरसात होने पर छत से कई स्थानों पर काफी पानी टपकता रहता है। साथ ही पूरे गलियारे में पानी भर जाता है।

कलेक्ट्रेट का रिकॉर्ड को भी खतरा:- बरामदे की छत की स्थिति देखने के लिए भास्कर टीम ऊपर पहुंची जहां दो उपभोक्ता आयोग और कलेक्ट्रेट का रिकॉर्ड रूम है। रिकॉर्ड रूम के कमरा नंबर तीन में दीवार के किनारे पानी टपक रहा था। पूरी दीवार पर सीलन हो रखी थी। फर्श पर पानी फैला हुआ था। जिससे रिकॉर्ड भी खराब हो रहा है।

पीडब्लूडी नहीं ले रही सुध:- जिला उपभोक्ता आयोग की ओर से पीडब्लूडी को एक साल से पत्र भेजे जा रहे हैं। कोई कार्रवाई नहीं होने पर आयोग अध्यक्ष ने हादसे की आशंका से भी विभाग को अवगत करा दिया। पीडब्लूडी के जेईएन से एसई तक सभी से संपर्क किया गया। किसी से भी जवाब देते नहीं बना।
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