अलवर में पूर्व केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के परिवार (पूर्व राजपरिवार) और पूर्व MLA बनवारी लाल सिंघल के बीच चल रहे जमीन विवाद में कोर्ट ने 3 महीने में फैसला सुनाया है। कोर्ट के फैसले से पूर्व राजपरिवार को राहत मिली है।
करोड़ों की जमीन पर सालों से विवाद चल रहा था। कोर्ट ने आदेश दिया है कि पूर्व राजपरिवार की ओर से बनवारी लाल को 10 लाख रुपए सालाना 6 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाए जाएं।
यह आदेश ADJ कोर्ट संख्या-3 ने दिया है। जबकि 3 महीने पहले इससे जुड़े मामले में ही ADJ कोर्ट संख्या-4 ने जितेंद्र सिंह के प्रार्थना पत्र को खारिज किया था। इसमें जितेंद्र सिंह ने बताया था कि जब उनके दादा तेज सिंह ने 4 बीघा जमीन का एग्रीमेंट बनवारी लाल और उसके परिवार से किया था, तब दादा मानसिक रूप से अस्वस्थ थे। यह केस अलग-अलग कोर्ट में विचाराधीन है। ये दोनों वाद अलग-अलग हैं।
इस प्रकरण में कोर्ट ने माना है कि एग्रीमेंट में दर्ज तीन खसरों का विवाद है। इसमें खसरा नंबर 943 को सरकार पहले ले चुकी थी। बाकी दो खसरों का विवाद कोर्ट में विचाराधीन है। उस समय यह खसरा भी सीलिंग में था। इन सब पहलुओं के तथ्यों को लेकर कोर्ट ने यह आदेश दिया है।
एग्रीमेंट करने के बाद तेज सिंह के वारिस पूर्व मंत्री ने अपने दादा को मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ नहीं बताते हुए एडीजे कोर्ट-4 में मेडिकल रिपोर्ट के साथ प्रार्थना पत्र दिया था। जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था। लेकिन अब एडीजे कोर्ट संख्या-3 ने यह आदेश दे दिया कि बनवारी लाल को 10 लाख रुपए ब्याज सहित लौटाने होंगे।
वकील बोले- जमीन उनको देने का आदेश नहीं दिया पूर्व राजपरिवार की ओर से वकील रामेश्वर दयाल ने बताया- इस मामले में जमीन के एग्रीमेंट के आधार दावा किया गया था। लेकिन कोर्ट ने जमीन को लेकर आदेश नहीं दिया। केवल पैसे लौटाने का आदेश दिया है। जमीन उनको देने का आदेश नहीं दिया। पैसे से संतुष्ट हो जाते हैं तो अच्छा है। कोर्ट ने जमीन की डिक्री नहीं की। इसलिए पूर्व राजपरिवार के पक्ष में फैसला है।

अलवर के पूर्व राजपरिवार के सदस्य हैं जितेंद्र सिंह। केंद्रीय मंत्री भी रह चुके हैं।
पूर्व विधायक बोले- हाईकोर्ट में मामला उठाएंगे कोर्ट के इस आदेश पर पूर्व विधायक बनवारी लाल का कहना है कि ADJ कोर्ट का यह आदेश किसी के भी पक्ष या खिलाफ नहीं है। हम मामले में हाईकोर्ट जाएंगे।
कोर्ट ने हमारे वाद को खारिज नहीं किया है। यदि वाद खारिज होता तो हमारे खिलाफ हो सकता था। यही हमारा मजबूत पक्ष है कि कोर्ट ने वाद खारिज करने की बजाय पैसे लौटाने की बात कही है।
वहीं, राजपरिवार का कहना है कि कोर्ट ने सही फैसला दिया है। हम पहले से यही कह रहे थे जमीन का एग्रीमेंट ही कानूनन गलत था।
2005 में लगाई थी याचिका अलवर के पूर्व राजपरिवार के सदस्य जितेंद्र सिंह ने साल 2005 में अलवर जिला सत्र न्यायालय में सिविल याचिका लगाई थी। इसमें कहा था कि मेरे पिता प्रताप सिंह के निधन के बाद से मैं दादा सवाई तेज सिंह की संपत्ति की देखभाल करता हूं। दादा की उम्र 94 साल की है। साल 1999 में दादा को लकवा आया था। उनकी सोचने-समझने की शक्ति क्षीण हो गई। दादा ने पारिवारिक समझौते के तहत 20 जुलाई 1968 को मेरे पिता प्रताप सिंह के हक में संपत्ति की हुई है।
बुआ, चाचा और एक वकील पर आरोप लगाए थे याचिका में कहा गया था कि बुआ भानू कुमारी, चाचा यशवंत सिंह, एडवोकेट अमरराज ने मिलीभगत कर दादा तेज सिंह से कोरे कागजों व स्टाम्प पर फर्जी तरीके से अंगूठा व हस्ताक्षर करवा लिए। ताकि संपत्ति हड़प सकें। दादा तेज सिंह को डॉक्टरी जांच और इलाज की जरूरत है।
उन्होंने याचिका में तेज सिंह को भी प्रतिवादी बनाया था। याचिका में कहा था- बुआ और चाचा जमीन को फर्जी तरीके से बेचना चाहते हैं। अटॉर्नी होल्डर एडवोकेट अमरराज ने 18 अप्रैल 2005 को तेज सिंह की अलवर स्थित कृषि जमीन इकरारनामे से बनवारी लाल सिंघल और उनके भाई राजेश सिंघल को बेची थी। इसके चलते सिंघल ने भी कोर्ट में पक्षकार बनने का प्रार्थना पत्र लगाया।
जितेंद्र सिंह ने कोर्ट में इसका विरोध किया। 6 साल बाद सिविल कोर्ट ने बनवारी लाल और राजेश सिंघल को पक्षकार बनाने की अनुमति दे दी।
ADJ कोर्ट-4 ने याचिका खारिज कर दी थी मामले की सुनवाई के बाद ADJ कोर्ट संख्या-4 ने 14 मई 2025 को 123 पेज का फैसला सुनाया था। इसमें जितेंद्र सिंह का वाद साक्ष्यों के अभाव में खारिज कर दिया था।
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