जयपुर के एक निजी होटल में आयोजित तीन दिवसीय इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ‘यूएसकॉन 2025’ रविवार को संपन्न हुई।
जयपुर के एक निजी होटल में आयोजित तीन दिवसीय इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ‘यूएसकॉन 2025’ रविवार को संपन्न हुई, जहां विशेषज्ञों ने डायग्नोसिस में आई नवीनतम तकनीकों के बारे में जानकारियां प्रदान की। एक्सपर्ट ने कहा कि अब गर्भवती महिलाओं में शिशु की सटीक उम्र का

डॉ. डीएस नरूका और डॉ. विनोद गुप्ता ने बताया कि कॉन्फ्रेंस में देश के अग्रणी विशेषज्ञों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विशेषज्ञों ने भी भाग लिया।
कॉन्फ्रेंस के ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन डॉ. डीएस नरूका और डॉ. विनोद गुप्ता ने बताया कि कॉन्फ्रेंस में देश के अग्रणी विशेषज्ञों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विशेषज्ञों ने भी भाग लिया। जा दौरान 3डी व 4डी अल्ट्रासाउंड तकनीक, फीटल इको एनाटॉमी, रीनल डॉपलर, पोर्टल हाइपरटेंशन, लोअर लिम्ब आर्टेरियल एवं वेनस अल्ट्रासाउंड, एमएसके अल्ट्रासाउंड, तथा अल्ट्रासाउंड गाइडेड इंटरवेंशन्स पर विशेष सत्र आयोजित हुए।
कॉन्फ्रेंस के तहत कई हैंड्स-ऑन वर्कशॉप्स भी आयोजित हुई। इस कॉन्फ्रेंस में सोसाइटी ऑफ रेडियोलॉजी इन अल्ट्रासाउंड ऑफ अमेरिका ने भी सक्रिय रूप से भाग लिया।
दिल्ली के डॉ. अशोक खुराना ने बताया कि इस तकनीक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) अल्ट्रासाउंड से प्राप्त चित्रों का सूक्ष्म स्तर पर विश्लेषण करती है। यह पारंपरिक अनुमान के बजाय वैज्ञानिक डेटा पर आधारित परिणाम देती है। इससे भ्रूण की वृद्धि दर, किसी भी अंग में विकास संबंधी विलंब या असामान्यता का भी पहले से पता लगाया जा सकता है।
यह तकनीक न केवल गर्भावस्था की सटीक अवधि बताने में मदद करेगी, बल्कि इससे प्रसव की संभावित तिथि का भी अधिक सटीक अनुमान लगाया जा सकेगा, जिससे मां और शिशु दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।
जल्द ही अल्ट्रासाउंड की मदद से खत्म होगा ट्यूमर डॉ. नितिन चौबल ने बताया कि कैंसर के इलाज में दवाइयों से भरे सूक्ष्म बबल्स (माइक्रोबबल्स) और अल्ट्रासाउंड की तरंगों की मदद से ट्यूमर को खत्म किया जा सकेगा। अभी इस पर रिसर्च चल रही है और जानवरों पर यह तकनीक सफल रही है। अब इंसानों पर इसकी टेस्टिंग हो रही है और जल्द ही मरीजों के लिए यह तकनीक उपलब्ध होगी। इस तकनीक में सबसे पहले रोगी के शरीर में दवा वाले माइक्रोबबल्स इंजेक्ट किए जाते हैं। इसके बाद अल्ट्रासाउंड प्रोब को उस हिस्से पर लगाया जाता है, जहां ट्यूमर मौजूद होता है। अल्ट्रासाउंड की तरंगें बबल्स को कंपन कर फोड़ देती हैं, जिससे दवा सीधे ट्यूमर तक पहुंचकर कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करती है। इस तकनीक से ब्रेन, लिवर और पैंक्रियाटिक कैंसर के मरीजों के लिए कीमोथेरेपी या सर्जरी का विकल्प बन सकता है। सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें दवा केवल प्रभावित हिस्से तक सीमित रहती है, जिससे साइड इफेक्ट न के बराबर होते हैं और स्वस्थ ऊतक सुरक्षित रहते हैं।
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