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स्कूली बच्चों में मोटापे की समस्या को लेकर अब शिक्षक ऐसे बच्चों की पहचान कर उनके परिजनों को जानकारी देंगे। साथ ही घर में बच्चों के स्वास्थ्य के अनुकूल कम चिकनाई वाला भोजन बनाए जाने का सुझाव देंगे। दूसरी ओर शिक्षक स्कूलों में भी बच्चों को कम तेल वाला

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बच्चों में बढ़ते मोटापे की समस्या पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मन की बात में चिंता जता चुके हैं। इसके बाद केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को एक एडवाइजरी जारी की थी। उसी एडवाइजरी के आधार पर अब स्कूलों में मिड डे मील को लेकर कलेक्टरों को पत्र लिखा गया है। उसमें बताया गया है कि पीएम पोषण योजनान्तर्गत स्कूलों में बच्चों के लिए बनाए जा रहे भोजन को पकाने में उपयोग हो रहे खाद्य तेल की मात्रा में 10 प्रतिशत कमी की जाए। भोजन पकाने के लिए रोजाना कक्षा प्री-प्राइमरी से 5 एवं कक्षा 6 से 8 के लिए क्रमशः 5 ग्राम व 7.5 ग्राम खाद्य तेल की मात्रा निर्धारित है।

अब इसमें 10 प्रतिशत की कमी की जाए। इसका कारण बताया गया है कि अत्यधिक तेल के सेवन से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो रही है। उसमें मोटापा, हृदय रोग और पाचन संबंधी समस्याएं प्रमुख हैं। ऐसे में स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए भोजन में तेल के सेवन के बारे में जागरूकता बढ़ाई जाएगी। इस कड़ी में स्कूल प्रबंधन और शिक्षकों पर जिम्मेदारी डाली गई है। इसके लिए कक्षा में बच्चों को जानकारी देने के लिए गृह विज्ञान कॉलेजों और अन्य संस्थानों से पोषण विशेषज्ञों को बुलाया जाएगा।

उनके सत्र के बाद खान-पान की आदतों पर बच्चों के लिए प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएगी। इसमें विजेता रहने वाले बच्चों को पुरस्कृत भी किया जाएगा। इसी तरह स्कूल के पर्यावरण क्लब में वार्ता, समूह चर्चा और पोषण एवं स्वास्थ्य पर निबंध लिखाया जाएगा। स्वस्थ जीवनशैली बनाए रखने और अतिरिक्त कैलोरी जलाने के लिए नियमित व्यायाम और योग के महत्व पर जानकारी देंगे।

प्रदेश में लड़कियों की तुलना में लड़कों में मोटापा ज्यादा

स्वास्थ्य सर्वेक्षणों के अनुसार राजस्थान में 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों में मोटापे का प्रतिशत 3.5% है, जोकि अखिल भारतीय औसत 3.4% से ज्यादा है। यह समस्या ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में समान रूप से बढ़ रही है। राष्ट्रीय पोषण सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार 10-19 वर्ष के किशोर लड़कों में मोटापे का प्रतिशत 6.6% है जबकि लड़कियों में यह 3.1% ही है। लड़कों में दोगुना मोटापा है। यह समस्या शहरी जीवनशैली, जंक फूड के प्रति रुझान और शारीरिक गतिविधियां नहीं करने से बढ़ रही है।



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