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आरजीएचएस (राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम) में ब्रांडेड दवाओं को भी शामिल कर दिया है, लेकिन केमिस्ट दे कहां रहे हैं। ज्यादा कमीशन के लालच में बहाने बनाए जाते हैं। सरकारी कर्मचारी या योजना में शामिल लोग जब पर्चे पर लिखी डॉक्टर की ब्रांडेड दवा लेने के ल

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इसके पीछे एक कारण यह भी है कि आरजीएचएस स्कीम के तहत मेडिकल बिल के बदले सरकार जो भुगतान इन दवा संचालकों को कर रही है उसमें सरकार तो 21 दिन का समय बताती है मगर कई महीने लग जाते हैं। ऐसे में कम मुनाफे के लिए यह दवा संचालक लंबे समय का इंतजार करना पसंद नहीं कर रहे। लेकिन इसका नुकसान सीधे तौर पर स्कीम से जुड़े 1.32 लाख कर्मचारियों और उनके 3.70 लाख परिजनों को हो रहा है। भास्कर ने पूरा सच जानने के लिए आरजीएचएस में पर्ची बनवाई। जोधपुर में स्कीम से संबंधित 6 मेडिकल स्टोर पर स्टिंग ऑपरेशन किया तो पूरी सच्चाई सामने आ गई।

6 केमिस्ट, बर्ताव 1 जैसा, बहाना भी-लिखावट समझ नहीं आई

केस 1- मरुधर मेडिकल, महेश स्कूल के पास। ब्रांडेड नाम देखते ही कहा- नहीं है। कैश में दे दी। स्टाफ ने माना कि ब्रांडेड दबाव में कमीशन 10% है जबकि जेनेरिक में 80% तक। सिपला की सिट्राजिन साल्ट टेबलेट का पत्ता बताते हुए कहा-इस जेनेरिक दवा की एमआरपी ₹32 रुपए है, लेकिन हमें ₹5 रुपए में पड़ा।

केस 2- रामदेव मेडिकल, एसएन कॉलेज के पास, शास्त्री नगर। केमिस्ट ने कहा-पर्ची की कोई दवा हमारे पास नहीं। रुपए ऑफर किए तो तुरंत मोंटेयर एलसी टैबलेट पकड़ा दी। ऐसा ही वर्षा मेडिकल स्टोर, एमडीएम के गेट नंबर 1 के पास और कोरा मेडिकल्स, शास्त्री सर्कल पर भी हुआ।

केस 3- सनसिटी अस्पताल का मेडिकल स्टोर। नेजल स्प्रे पर काले पैन से क्रॉस कर दिया। कहा- नहीं है। क्योंकि यह 582 रुपए का था। रिपोर्टर ने दोबारा पूछा तो कहा- डॉक्टर की लिखावट समझ में नहीं आ रही।

केस 4- महादेव मेडिकल, केएन और टीबी हॉस्पिटल के पास। यहां भी पहले मना फिर कैश में दवा दे दी। इतना ही नहीं पर्ची में लिखी ड्यूनेज की जगह नाक बंद होने पर तुरंत राहत देने वाली स्प्रे दी गई।

सीधी बात…- ड्रग कंट्रोलर फर्स्ट, राजस्थान, अजय पाठक

दवा है तो मना नहीं कर सकता केमिस्ट

अगर आरजीएचएस की पर्ची की ब्रांडेड दवाई मौजूद होने के बावजूद भी नहीं दी जाती तो ड्रग स्टोर पर कार्रवाई हो सकती है? पाठक – जी, बिल्कुल मेडिकल स्टोर वाला दवाई देने के लिए बाध्य है। उपलब्ध होने के बावजूद नहीं देता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। भास्कर स्टिंग ऑपरेशन में 6 मेडिकल स्टोर वाले इसी तरह से नकद या ऑनलाइन भुगतान में दवाई देने के लिए तैयार हो गया जबकि आरजीएचएस की पर्ची पर उन्होंने दवाई नहीं दी। पाठक – नियम अनुसार इनके खिलाफ भी विभाग की तरफ से कार्रवाई की जाएगी। आपकी तरफ से जो भी जानकारी आएगी उस पर एक्शन होगा। मरीज इसकी शिकायत भी कर सकता है।

(भास्कर के पास पूरे स्टिंग ऑपरेशन से संबंधित ऑडियो-वीडियो और बिल मौजूद हैं।)



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