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प्रदेश के जनजातीय उपयोजना क्षेत्र (टीएसपी) में कुपोषण का दाग मिटाने में बड़ा गड़बड़झाला सामने आया है। टीएसपी क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्रों पर अतिकुपोषित बच्चों का न तो वजन लिया जा रहा है, न लम्बाई नापी जा रही है। अतिकुपोषित बच्चों को रजिस्टर्ड ही नहीं कि

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भास्कर ने टीएसपी एरिया से जुड़े जिलों में पड़ताल की तो सामने आया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का ध्यान केवल पोषाहार बांटने तक सीमित है। बारां जिले में शाहाबाद क्षेत्र के खुशालपुरा, चौराखड़ी, उदयपुर जिले में गोगुंदा क्षेत्र के सांदर केन्द्र, कथौड़ी बस्ती के आंगनबाड़ी केन्द्रों पर कुपोषित-अतिकुपोषित बच्चों की सूची तक नहीं मिली।

  • भास्कर ने इन केंद्रों पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के सामने ही कुछ बच्चों को बुलाकर वजन-लंबाई जांची तो वे अतिकुपोषित पाए गए।

कई केंद्रों पर 20-20 बच्चों की उपस्थिति बताई, लेकिन मौके पर थे ही नहीं

चौराखड़ी, शाहबाद, बारां – घनश्याम की डेढ़ साल की बेटी सोमवती का वजन 5 किलो, लंबाई 67 सेमी। शिवा की डेढ़ साल की बेटी अंशिका का वजन भी 5 किलो। अमिताभ के 12 माह के बेटे रौनक का वजन 6 किलो। यानी तीनों कुपोषित। लेकिन आंगनबाड़ी केंद्र पर इनका नाम नहीं।

खुशालपुरा, शाहबाद, बारां – पन्द्रह माह की पूर्वी अतिकुपोषित है। वजन केवल 3 किलो, लंबाई 61 सेमी। मां सरस्वती ने बताया, न तो आंगनबाड़ी केन्द्र में पूर्वी का नाम है, न पोषाहार मिलता है। ऐसे बच्चों का नाम केन्द्र वाले लिखते नहीं हैं। केन्द्र संचालक राजंती सहरिया ने कहा- आधार कार्ड नहीं है इसलिए नाम नहीं लिखा। यहां 20 में से 6 बच्चे मौजूद थे। इनमें से राज, कारी अमित, योगेश कुपोषित पाए गए लेकिन किसी भी कुपोषित बच्चे को कुपोषण उपचार केन्द्र (एमटीसी) रेफर नहीं किया गया था। इसी तरह, मामोनी केन्द्र प्रथम में 20 में से 3 बच्चे ही मौजूद थे।

संचालक सुनीता ने बताया- पोषाहार खाने के बाद बच्चे चले गए। पास में बंद पड़े मां बाड़ी केन्द्र के बारे में लोगों ने कहा- कभी-कभार ही खुलता है। मामोनी केन्द्र द्वितीय में 20 की उपस्थिति दर्शाई लेकिन मौके पर कोई नहीं था। संचालक सरोज बोलीं- बच्चे पोषाहार लेकर चले गए। उदयपुर जिले में गोगुन्दा के सांदर में सुशीला (उम्र 18 माह, वजन 6 किलो), ललित (2 साल, वजन 7 किलो) का नाम मां-बाड़ी केन्द्र पर नहीं मिला।

जबकि…10 जिलों में पांच साल में 12 हजार करोड़ रुपए खर्च

टीएसपी में 2024-25 में पोषण पर 349 करोड़, सेहत पर 2859 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। पिछले 5 साल में सेहत पर 11150 करोड़, पोषण पर 1289 करोड़ खर्च हुए हैं। फिर भी सरकारी रिकाॅर्ड के अनुसार टीएसपी में 178236 बच्चे कुपोषित हैं।

“पोषण तो मिलता है, लेकिन आदिवासियों में एक अनुवांशिक बीमारी है, जिसके कारण ये कुपोषण का शिकार है। इसके लिए सिकल सेल अभियान चलाया जा रहा है। इससे बीमारी का इलाज हो जाएगा। जिससे आने वाली पीढ़ी कुपोषण का शिकार नहीं होगी।” -बाबूलाल खराड़ी, मंत्री जनजातीय क्षेत्रीय विकास​ विभाग



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