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देसी नस्लों के पशुधन के संरक्षण और दूध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार पशुपालकों के साथ डेयरी-एफपीओ संगठनों को भी पुरस्कृत करेगी। तीन श्रेणियों में पुरस्कार दिए जाएंगे। इसमें दो से पांच लाख रुपए की पुरस्कार राशि प्रस्तावित की गई है। इसके लि
निर्देशों के अनुसार दुग्ध उत्पादक किसानों, डेयरी सहकारी समितियों, दुग्ध उत्पादक कंपनियों, डेयरी किसान उत्पादक संगठनों और कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियनों को प्रोत्साहित करने व स्वदेशी गायों और भैंसों की नस्लों को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से सम्मान किया जाएगा। एआई मामले में सिर्फ प्रशस्ति पत्र व स्मृति चिह्न दिए जाएंगे। स्वदेसी गाय व भैंस नस्लों का पालन भी जरूरी है। देशभर में गो वंश की 53 नस्लों और 20 भैंसों की नस्लों को शामिल किया गया है।
थारपारकर-राठी सहित 9 नस्लों की सबसे ज्यादा मांग
राजस्थान के किसान–पशुपालक देसी गो वंश के संरक्षण के लिए काफी जागरूक हैं। यहां की थारपारकर, राठी, नागौरी, मेवाती, कंकरेज, हरियाना, साहिवाल, नारी और सांचौरी नस्लों की मांग सबसे ज्यादा है। पुरस्कार से इन स्वदेशी नस्लों के संवर्धन में और बढ़ावा मिलेगा। यहां से कई राज्यों के पशुपालक भी खरीदकर ले जाते हैं।
पहले पुरस्कार में पांच लाख, दूसरे पुरस्कार के रूप में तीन लाख रुपए और तीसरे पुरस्कार में दो लाख रुपए की राशि दी जाएगी। जबकि विशेष पुरस्कार में दो लाख रुपए का प्रावधान किया गया है। कॉमन सर्विस सेंटरों पर किसानों को आवेदन में मदद करने के निर्देश भी दिए गए हैं। ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। सहकारी समितियों की श्रेणी के मामले में पंजीकरण प्रमाणपत्र, सोसायटी के सचिव द्वारा स्व-सत्यापित, सहकारी सोसायटी के नाम पर पैन कार्ड और बैंक पासबुक की कॉपी आदि अपलोड करना होगा।
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