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एंकर से शव को तालाब से बाहर खींचती रेस्क्यू टीम।
हिरणमगरी थाना क्षेत्र के पारोला गांव में रविवार को बड़ा हादसा हो गया। पैर फिसलने से तालाब में गिरी महिला की डूबकर मौत हो गई। उसे बचाने गई 10 वर्षीय बेटी भी पानी में गिर गई, लेकिन एक ग्रामीण ने उसे बाहर निकाल लिया। इस दौरान किसी ने मगरमच्छ के हमले की
थानाधिकारी भरत योगी ने बताया कि प्यारी बाई (32) दोपहर बेटी के साथ बकरियां चराने गई थी। हाथ-पैर धोते समय पैर फिसलने से वह तालाब में गिर गई और झाड़ियों में फंस गई। तैरना जानने के बावजूद वह नहीं निकल सकी। बेटी ने बचाने की कोशिश की, लेकिन खुद गिर गई। ग्रामीण ने बच्ची को बचा लिया।
दोपहर 3 बजे पुलिस और सिविल डिफेंस की टीम मौके पर पहुंची। तालाब किनारे भारी भीड़ थी और हर तरफ मगरमच्छ के हमले की चर्चा हो रही थी। तभी किनारे के पास पानी में महिला के पैर ऊपर की ओर नजर आए, जबकि सिर अंदर था। टीम को भी लगा कि मगरमच्छ ने सिर पकड़ रखा है। खौफ के चलते कोई पानी में नहीं उतरा।
बेटी भी पानी में गिरी, गनीमत-बच गई
महिला के शव को एंकर की मदद से खींचकर किनारे लाने की कोशिश की गई। जब टीम ने महिला के पैर पकड़कर बाहर निकालना चाहा तो ऐसा लगा जैसे अंदर से किसी ने पकड़े रखा हो। काफी मशक्कत के बाद शव बाहर निकाला गया। शरीर पर कहीं भी चोट के निशान नहीं थे। थानाधिकारी भरत योगी ने भी मगरमच्छ के हमले की संभावना से इनकार किया है। शव को एमबी हॉस्पिटल की मोर्चरी में रखवाया गया है। जहां सोमवार को पोस्टमार्टम किया जाएगा।
भास्कर एक्सपर्ट- राहुल भटनागर, सेवानिवृत्त सीसीएफ
मगरमच्छ गहरे पानी में ले जाकर क्षत-विक्षत कर देता है शिकार मगरमच्छ जमीन पर आकर हमला नहीं करता। किनारे के पास मौजूद व्यक्ति पर भी झपट सकता है। शिकार को पकड़ने के बाद उसे घुमाता है, जिसे डेथ रोल कहा जाता है। इसमें हाथ, पैर या सिर तक शरीर से अलग हो जाते हैं। जबड़े के दबाव से हड्डियां टूट जाती हैं और मांस ऐसे नोच जाता है जैसे किसी ने उखाड़ लिया हो। इसलिए अगर मगरमच्छ हमला करता है, तो शव हमेशा क्षत-विक्षत मिलता है। अक्सर घटना स्थल से दूर ले जाता है। इस मामले में शव पर कोई चोट नहीं मिली, न ही शरीर क्षत-विक्षत था। ऐसे में मगरमच्छ हमले की आशंका गलत साबित होती है।
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