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झुंझुनूं पुलिस ने रविवार को जिले में बढ़ती मोटरसाइकिल चोरी की घटनाओं पर बड़ी सफलता हासिल की। कोतवाली थाना पुलिस ने तीन शातिर वाहन चोरों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 11 चोरी की मोटरसाइकिलें बरामद कीं। आरोपियों ने पूछताछ में झुंझुनूं के अलावा सीकर और ज

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पूरी कहानी 24 अगस्त से शुरू होती है, जब कोलिंडा निवासी 23 वर्षीय जसवंत जांगिड़ ने अपनी मोटरसाइकिल शारदा हॉस्पिटल के पास खड़ी की थी। दोपहर 12:30 बजे खड़ी की गई बाइक जब वह दो घंटे बाद लेने आया तो वहां से गायब थी। आसपास तलाशने के बाद भी जब कुछ हाथ नहीं लगा तो उसने कोतवाली थाने पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज करवाई। रिपोर्ट दर्ज होते ही थानेदार हरजिंद्र सिंह ने मामले को गंभीर मानते हुए पुलिस अधीक्षक बृजेश ज्योति उपाध्याय को अवगत कराया। जिले में पिछले कुछ समय से लगातार बाइक चोरी की घटनाएं हो रही थीं। ऐसे में यह मामला पुलिस के लिए चुनौती बन गया।

3 आरोपी गिरफ्तार, 11 मोटरसाइकिल बरामद

3 आरोपी गिरफ्तार, 11 मोटरसाइकिल बरामद

एसपी ने तुरंत अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक देवेंद्र सिंह राजावत और वृताधिकारी वीरेंद्र कुमार शर्मा को वाहन चोरी पर अंकुश लगाने के निर्देश दिए। कोतवाली पुलिस थाने से एक विशेष टीम गठित की गई। टीम का नेतृत्व निरीक्षक हरजिंद्र सिंह कर रहे थे, लेकिन पूरे मामले में सबसे अहम जिम्मेदारी सौंपी गई कॉन्स्टेबल प्रवीण कुमार को। प्रवीण पहले भी कई मामलों में अपनी मेहनत से सुराग निकाल चुका था और उसका मुखबिर नेटवर्क मजबूत माना जाता है।

जांच की शुरुआत घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों से हुई। टीम ने करीब 300 फुटेज खंगाले। इनमें कुछ संदिग्ध गतिविधियां तो मिलीं लेकिन ठोस सुराग नहीं। चोरी के बाद अपराधी अक्सर नंबर प्लेट बदल देते हैं या फिर मोटरसाइकिलों को कबाड़ में बेच देते हैं। ऐसे में यह मामला पेचीदा हो गया। लेकिन प्रवीण ने हार नहीं मानी। उसने पुराने मामलों का अध्ययन किया, चोरी के तरीकों का विश्लेषण किया और गली-गली जाकर सुराग जुटाने शुरू किए।

लगातार कई दिनों तक उसने झुंझुनूं, सीकर, जयपुर ग्रामीण और नीमकाथाना तक के इलाकों में जाकर पूछताछ की। कभी दुकानदारों से, कभी पेट्रोल पंप वालों से और कभी राहगीरों से। कई बार उसे घंटों पैदल चलना पड़ा। छोटे-छोटे इनपुट्स को जोड़कर उसने एक तस्वीर तैयार की और संदेह की सुई खंडेला क्षेत्र के कुछ युवकों पर जाकर टिक गई।

7 सितंबर को आखिरकार प्रवीण के मुखबिर से पुख्ता सूचना मिली कि वाहन चोर गैंग के तीन सदस्य झुंझुनूं शहर में आए हुए हैं। वे चोरी की मोटरसाइकिलों को ठिकाने लगाने की फिराक में हैं और किसी वारदात की योजना भी बना सकते हैं। सूचना मिलते ही प्रवीण ने अपनी टीम को अलर्ट किया और खुद आगे बढ़कर संदिग्धों की तलाश शुरू की।

सीकर-जयपुर ग्रामीण में भी वारदातें कबूल,

सीकर-जयपुर ग्रामीण में भी वारदातें कबूल,

झुंझुनूं शहर में गुढ़ा रोड स्थित वैशाली नगर से आने वाली सड़क पर एक मोटरसाइकिल आती दिखाई दी। उस पर तीन युवक सवार थे और बाइक की नंबर प्लेट मुड़ी हुई थी। यह देखते ही टीम ने घेराबंदी कर बाइक को रुकवाया। पूछताछ में बाइक चालक ने अपना नाम दीपक पुत्र ऋछपाल सिंह जाट, उम्र 19 वर्ष, निवासी कोटड़ी, थाना खंडेला, जिला सीकर बताया। उसके साथ बैठे युवकों ने अपने नाम सचिन पुत्र मनोहर लाल गुर्जर, उम्र 23 वर्ष, निवासी वार्ड 7, खंडेला, जिला सीकर और विकास कुमार पुत्र सुरेंद्र कुमार मेघवाल, उम्र 23 वर्ष, निवासी लुहारवास, थाना खंडेला, जिला सीकर बताए।

जब बाइक के नंबर की जांच की गई तो वह वही बाइक निकली, जिसकी चोरी का केस 24 अगस्त को दर्ज हुआ था। यह वही बाइक थी जिसे जसवंत जांगिड़ ने शारदा हॉस्पिटल के बाहर खड़ा किया था। बाइक बरामद होते ही तीनों संदिग्धों को हिरासत में लिया गया और थाने लाकर सख्ती से पूछताछ की गई।

500 किलोमीटर घूमकर झुंझुनूं के कॉन्स्टेबल प्रवीण ने किया खुलासा

500 किलोमीटर घूमकर झुंझुनूं के कॉन्स्टेबल प्रवीण ने किया खुलासा

शुरुआत में तीनों ने गोलमोल जवाब दिए, लेकिन जब पुलिस ने सबूत सामने रखे तो उन्होंने कबूल कर लिया कि वे लंबे समय से वाहन चोरी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि करीब 10 से ज्यादा बाइकें उन्होंने पहले ही चोरी कर ली हैं और उन्हें एनएच-11 के निर्माणाधीन पुल के पास मलसीसर रोड की पहाड़ी के नीचे छुपा रखा है। उनका मकसद था कि इन बाइकों को कबाड़ियों को बेचकर पैसा कमाया जाए।

पुलिस टीम तुरंत वहां पहुंची और तलाशी ली तो 10 चोरी की मोटरसाइकिलें बरामद हुईं। इस तरह कुल 11 बाइक पुलिस ने अपने कब्जे में लीं। गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ में यह भी स्वीकार किया कि उन्होंने झुंझुनूं के अलावा सीकर और जयपुर ग्रामीण जिले में भी चोरी की वारदातें की हैं। अब तक वे 15 से 20 वारदातों को अंजाम दे चुके हैं।

पुलिस को शक है कि इस गैंग में और भी लोग शामिल हैं, जिनकी तलाश जारी है। मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ और भी वारदातों का खुलासा होने की संभावना है।

पूरे खुलासे में कॉन्स्टेबल प्रवीण कुमार की मेहनत और लगन सबसे बड़ी वजह रही। उसने 500 किलोमीटर से ज्यादा सफर कर न सिर्फ सही सुराग जुटाए बल्कि अपने मुखबिर नेटवर्क के जरिए पुख्ता सूचना भी दिलवाई। एसपी बृजेश ज्योति उपाध्याय ने कहा कि जिले में वाहन चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती थी, लेकिन इस कार्रवाई से अपराधियों के हौसले पस्त होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि कॉन्स्टेबल प्रवीण की मेहनत वाकई सराहनीय है। उसने दिन-रात मेहनत की, लगातार यात्रा की और सबूतों की कड़ी जोड़कर पूरी टीम को सही दिशा दी।

जब्त मोटरसाइकिलों में ज्यादातर हीरो और बजाज कंपनी की बाइकें हैं, जिन्हें चोर आसानी से बाजार से गायब कर देते थे। सभी बाइकों के चेसिस नंबर दर्ज कर लिए गए हैं और उनके असली मालिकों की तलाश शुरू कर दी गई है।



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