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चित्तौड़गढ़ में “हर घर तिरंगा” अभियान के तहत जिला प्रशासन और यूआईटी द्वारा एक खास कार्यक्रम ‘कैनवास टेल्स’ का आयोजन किया गया। यह आयोजन जिला कलेक्ट्री परिसर में किया गया, जहां 5 कलाकारों ने दो बड़े कैनवास (7 बाय 20 फीट) पर चित्तौड़गढ़ की विरासत और तिर

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कैनवास पर दिखाई धरोहर

इस पेंटिंग में चित्तौड़गढ़ की ऐतिहासिक धरोहरों और प्राकृतिक सुंदरता को दिखाया गया। चित्तौड़गढ़ आर्ट सोसाइटी से जुड़े कलाकार डॉ मुकेश शर्मा ने बताया कि इन चित्रों में चित्तौड़गढ़ दुर्ग के दरवाजे, फतह प्रकाश महल, कीर्ति स्तंभ, कुम्भा महल, विजय स्तंभ, गोमुख, मीरा मंदिर, पद्मिनी महल और जयमल पत्ता हवेली को खास नारंगी रंग में दिखाया गया।

सफेद रंग की पृष्ठभूमि पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’, किसानों और स्वतंत्रता के अधिकार जैसे विषयों को चित्रित किया गया। हरे रंग के हिस्से में जिले के बस्सी और सीतामाता वन्यजीव अभयारण्य, और ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को दिखाया गया।

दूसरे कैनवास पर भारत माता की तस्वीर को केंद्र में रखकर भारत के राजकीय चिन्हों को उकेरा गया। ये कलाकृतियां चित्तौड़गढ़ में होने वाले जिला स्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह में प्रदर्शित की जाएंगी।

कैनवास पर कलाकारों ने ध्वज और भारत माता के चित्र को दर्शाया।

कैनवास पर कलाकारों ने ध्वज और भारत माता के चित्र को दर्शाया।

प्रदेश भर से आए आर्टिस्ट

इस कार्यक्रम में भाग लेने वाले कलाकारों में से एक, दिलीप जोशी, राजस्थान की प्रसिद्ध फड़ चित्रकला से जुड़े हुए हैं। यह लोककला लगभग 700 साल पुरानी है और दिलीप जोशी इसे पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ा रहे हैं। दिलीप चित्तौड़गढ़ के कपड़ा बाजार में अपनी चित्रशाला चलाते हैं। उनके पिता सत्यनारायण जोशी भी फड़ पेंटिंग के कलाकार थे और साल 2023 में उनका निधन हो गया था।

दिलीप जोशी ने हाल ही में भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित महाकुंभ कार्यक्रम में अपनी कला का प्रदर्शन किया। इसके अलावा भारतीय रेलवे के रतलाम डिवीजन ने उन्हें उत्कृष्ट कला के लिए प्रमाण पत्र भी दिया है।

तिरंगे पर रंगों के अनुसार आर्ट दिखाई।

तिरंगे पर रंगों के अनुसार आर्ट दिखाई।

35 सालों से बना रहे पेंटिंग्स

एक अन्य वरिष्ठ कलाकार प्रहलाद दास वैष्णव (उम्र 50 वर्ष) ने इस आयोजन में भारत माता का चित्र बनाया। वे पिछले 35 वर्षों से कला के क्षेत्र में कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने यह कला किसी कलाकार को देखकर सीखी, उनके परिवार में पहले कोई कलाकार नहीं था। प्रहलाद दास कई राष्ट्रीय कला शिविरों और प्रदर्शनियों में भी भाग ले चुके हैं।

इस आयोजन में अन्य कलाकारों जैसे मोतीलाल प्रजापत, अजय मिश्रा और डॉ. मुकेश शर्मा का भी सहयोग रहा। इस तरह ‘कैनवास टेल्स’ ने न केवल तिरंगे की भावना को दर्शाया, बल्कि चित्तौड़गढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पर्यावरणीय महत्व को भी सुंदर तरीके से सामने रखा।



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