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भारतीय रेलवे बच्चों की टिकट से भी अच्छी खासी अतरिक्त कमाई कर रहा है। पिछले तीन साल में रेलवे ने बच्चों के किराए से ही लगभग 31 अरब रुपए से ज्यादा की कमाई की है। यह खुलासा सेंटर फॉर रेलवे इंफॉर्मेशन सिस्टम (सीआरआईएस) से प्राप्त डेटा से हुआ है। क्रिस के
हालांकि एक से चार साल के बच्चों के लिए ट्रेन टिकट का किराया तभी लिया जाता है जब माता-पिता उनके लिए सीट का चुनाव करते हैं। इस स्थिति में पूरा व्यस्क का किराया देना पड़ता है। अगर वे सीट नहीं चाहते तो कोई किराया नहीं लिया जाता। गौरतलब है कि 2016 में रेल मंत्रालय ने घोषणा की कि 5 वर्ष से अधिक और 12 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए आरक्षित सीट चुनने पर पूरा किराया लिया जाएगा।
एक करोड़ से ज्यादा बच्चों से वसूला आधा किराया
सीआरआईएस ने 2023-2025 के बीच का दो प्रकार का डेटा उपलब्ध करवाया है। पहला 5 से 12 वर्ष के बच्चों के टिकट से हुई आय का और दूसरा नवजातों के लिए चुनी गई बर्थ के किराए का। तीन साल में पहली कैटेगरी के एक करोड़ से ज्यादा बच्चों के लिए बर्थ नहीं ली गई थी। जिस सीट पर उन्होंने एडजस्ट किया उसके लिए रेलवे को 4 अरब की कमाई हुई। यानी एक करोड़ बच्चों ने आधा किराया देकर बिना आरक्षित सीट के यात्रा की।
वहीं बर्थ लेने वाले इस उम्र के बच्चों की संख्या तीन करोड़ से ज्यादा थी। इनकी टिकट से रेलवे को 26 अरब से ज्यादा आय हुई। इसका अर्थ है कि तीन करोड़ बच्चों ने सीट लेकर पूरा किराया दिया। दूसरी कैटेगरी नवजातों की है। दस लाख से ज्यादा नवजातों के लिए बर्थ लेने पर रेलवे को 70 करोड़ से ज्यादा की कमाई हुई है। नवजात और 5 से 12 वर्ष की उम्र के बच्चों से हुई आय को जोड़ने पर यह आंकड़ा 31,653,204,693 हो जाता है।
रेलवे ने अप्रैल 2016 में बदला था नियम मार्च 2016 तक रेलवे 5 से 12 साल के बच्चों का आधा किराया लेकर अलग बर्थ देता था। अप्रैल 2016 से ऐसे बच्चों से पूरा किराया लिया जाने लगा। हालांकि, इस आयु वर्ग के बच्चे आधा किराया देकर भी यात्रा कर सकते हैं, लेकिन अलग बर्थ नहीं मिलती। उन्हें वयस्क से ही सीट साझा करनी होती है, जिसके साथ यात्रा कर रहे हैं।
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