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पं. गजेंद्र कुमार शास्त्री, ज्योतिषाचार्य, जयपुर
अश्विन नवरात्र सोमवार से शुरू होने जा रहे हैं। इन नौ दिनों में नौ देवियों की अराधना की जाएगी। ज्योतिषशास्त्र में उल्लेख है कि ये नौ देवियां नौ ग्रहों का प्रतिनिधित्व करती हैं। इन नौ िदनों में कुंडली और राशि के अनुसार ग्रहों की स्थिति देखकर उसी अनुरूप
मां शैलपुत्री : ग्रह चंद्रमा-भावनात्मक स्थिरता नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा करते हैं। शैलपुत्री चंद्रमा का प्रतिनिधित्व करती हैं। मां शैलपुत्री की उपासना से चंद्रमा बलवान होता है। मन को शांति मिलती है। व्यक्ति में भावनात्मक परिपक्वता आती है।
मां ब्रह्मचारिणी: ग्रह मंगल-साहस का जागरण दूसरे दिन हम मां ब्रह्मचारिणी की आराधना करते हैं। इनका संबंध मंगल ग्रह से है। इनकी पूजा से मंगल के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं। व्यक्ति में आत्मविश्वास और दृढ़ता आती है। वह जीवन की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम होता है।
मां चंद्रघंटा: ग्रह शुक्र-भौतिक सुखों की प्राप्ति तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की साधना होती है, जो शुक्र ग्रह का प्रतिनिधित्व करती हैं। यदि शुक्र अशुभ स्थिति में हो, तो व्यक्ति के जीवन में भौतिक सुखों की कमी और रिश्तों में खटास आ सकती है। मां चंद्रघंटा की उपासना से वैवाहिक जीवन सुखद होता है। घर में धन-धान्य का आगमन होता है।
मां कूष्मांडा: ग्रह सूर्य- यश-कीर्ति की वृद्धि चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा से सूर्य ग्रह बलवान होता है। सूर्य आत्मा, पिता और समाज में मान-सम्मान का कारक है। इनकी पूजा से सूर्य की ऊर्जा बढ़ती है। व्यक्ति को उच्च पद और प्रतिष्ठा मिलती है। नेतृत्व क्षमता में वृद्धि होती है।
मां स्कंदमाता: ग्रह बुध- वाणी में मधुरता 5वें दिन की देवी मां स्कंदमाता हैं, जो बुध ग्रह से जुड़ी हैं। बुध बुद्धि, वाणी और व्यापार का कारक है। कमजोर बुध व्यक्ति को बातचीत में कठिनाई, निर्णय लेने में असमर्थता, और व्यापार में नुकसान पहुंचाता है। मां स्कंदमाता की कृपा से वाणी में मधुरता आती है, बुद्धि तीक्ष्ण होती है।
मां कात्यायनी: ग्रह बृहस्पति- विवाह बाधाएं दूर छठे दिन की देवी मां कात्यायनी हैं, जिनका सीधा संबंध बृहस्पति (गुरु) ग्रह से है। जिनकी कुंडली में गुरु कमजोर होता है, उन्हें विवाह में देरी, धन की कमी और जीवन में प्रगति का अभाव महसूस होता है। इनकी पूजा से विवाह के योग बनते हैं। ज्ञान में वृद्धि और जीवन में समृद्धि आती है।
मां कालरात्रि: ग्रह शनि- कष्टों से मुक्ति सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा से शनि ग्रह के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं। शनि की साढ़ेसाती या ढैया से व्यक्ति को जीवन में संघर्ष तनाव और रोग का सामना करना पड़ता है। इनकी उपासना से शनि के कष्ट कम होते हैं।
मां महागौरी: ग्रह राहु- अज्ञात भय का नाश 8वें दिन मां महागौरी की साधना राहु ग्रह से जुड़े भ्रम और भय को दूर करती है। कमजोर राहु के कारण व्यक्ति अपने जीवन के लक्ष्यों से भटक सकता है। इनकी पूजा से राहु का प्रभाव शांत होता है। व्यक्ति को सही-गलत का ज्ञान होता है और जीवन में सकारात्मकता आती है
मां सिद्धिदात्री: ग्रह केतु- आध्यात्मिक विकास नौवें और अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा केतु ग्रह को शांत करती है। यदि यह अशुभ हो तो व्यक्ति में निराशा, अकेलापन और जीवन के प्रति उदासीनता बढ़ जाती है। मां सिद्धिदात्री की कृपा से व्यक्ति में आध्यात्मिक चेतना जागृत होती है।
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