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जन्म लेते ही मां ने कड़कड़ाती सर्दी में झाड़ियों में फेंक दिया। श्वानों द्वारा नोचती मिली मासूम साढ़े 4 साल तक मां की गोद और पिता के स्नेह से वंचित रही। अब भीलवाड़ा की ये मासूम बेटी चाहत (बदला हुआ नाम) अमेरिका में नाजों से पलेगी। चाहत भीलवाड़ा की यह ऐसी ब
मासूम चाहत जनवरी 2021 में दुनिया में आई थी। जन्म देने वाली मां ने पैदा होते ही उसे झाड़ियों में फेंक दिया। रातभर कड़ाके की ठंड में रोती रही। सड़क पर नोचते हुए श्वानों ने सिर का कुछ हिस्सा खा लिया। किसी तरह लोगों ने उसे बचाकर पुलिस को सौंपा।
पुलिस ने मासूम को भीलवाड़ा एमजी अस्पताल में भर्ती करवाया। हालत इतनी गंभीर थी कि हायर सेंटर भेजा गया। अजमेर मेडिकल कॉलेज, जयपुर एसएमएस और जेके लोन अस्पताल में 7 महीने इलाज चला, तब जाकर जान बची। इसके बाद से चाहत भीलवाड़ा शिशु गृह में रह रही थी। इधर, पुलिस ने बच्ची को फेंकने वाली मां का पता लगाकर उस पर मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू की।
भास्कर इनसाइट- खुद के बेटे के बाद भी एक और गोद लिया, बच्ची की इतनी चाह कि सात समंदर पार पहुंचे
संयुक्त राज्य अमेरिका के अल्बामा में रहने वाले दंपती का पहले से एक बेटा है। इसके बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ से सेरेब्रल पॉल्सी से पीड़ित बच्चे को गोद लिया। इसके बाद भी बेटी की चाह में गोद लेने के लिए अमेरिका की दत्तक ग्रहण एजेंसी में आवेदन किया। वहां की एजेंसी के माध्यम से भारत के केंद्रीय दत्तक ग्रहण प्राधिकरण (कारा) के पोर्टल पर आवेदन किया।
वहां से वेटिंग में विशेष श्रेणी के बच्चों में भीलवाड़ा की चाहत का चयन किया। गोद की प्रक्रिया के तहत गृह अध्ययन रिपोर्ट तैयार करने के दौरान मां से बच्ची को सुपुर्दगी की विधिक प्रक्रिया पूरी करने के साथ ही बाल कल्याण समिति ने चाहत को लीगल फ्री किया। गोद लेने के बाद दंपती चाहत को अमेरिका ले गए। वहां की एजेंसी दो साल तक परवरिश की निगरानी करेगी।
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