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धौलपुर में रक्षाबंधन के दूसरे महिलाओं और युवतियों ने भुजरिया पर्व धूमधाम से मनाया।
धौलपुर में रक्षाबंधन के दूसरे दिन रविवार शाम को महिलाओं और युवतियों ने भुजरिया पर्व धूमधाम से मनाया। इस अवसर पर महिलाओं ने नदियों, जलाशयों और तालाबों पर मांगलिक गीत गाते हुए भुजरियाओं का विसर्जन किया। उन्होंने अच्छी बारिश, उन्नत फसल, हरियाली और परिवा
भुजरिया पर्व रक्षाबंधन के ठीक दूसरे दिन मनाया जाता है। इस पर्व में गेहूं के पौधों का विशेष महत्व होता है। सावन महीने की अष्टमी और नवमी को छोटी-छोटी बांस की टोकरियों में मिट्टी की तह बिछाकर गेहूं या जौं के दाने बोए जाते हैं।
इन बीजों को रोजाना पानी दिया जाता है। सावन के महीने में इन भुजरियों को झूला देने का भी रिवाज है। इन्हें उगने में एक सप्ताह का समय लगता है। श्रावण मास की पूर्णिमा तक ये भुजरिया चार से छह इंच तक बढ़ जाती हैं।
रक्षाबंधन के दूसरे दिन महिलाएं इन टोकरियों को सिर पर रखकर जल स्रोतों तक ले जाती हैं। विसर्जन से पहले भुजरिया की पूजा की जाती है। इसके चारों ओर घूमकर लोकगीत गाए जाते हैं।
जल में प्रवाहित करने के दौरान कुछ भुजरिया को साथ लाकर एक-दूसरे को देकर शुभकामनाएं और आशीर्वाद दिया जाता है। यह पर्व नई फसल का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान अच्छी बारिश की कामना की जाती है, जिससे अच्छी फसल प्राप्त हो सके।
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