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किसान की हत्या के बाद सुलगा जैसलमेर का डांगरी अब शांत है। हिरण का शिकार करने से रोकने पर बदमाशों ने खेत सिंह (50) की हत्या कर दी थी। इसके बाद इलाके में तनाव बढ़ गया था। भीड़ गांव में घुस गई। गाड़ियां फूंक दी गईं। पथराव हुआ, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल ह

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लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है- दो दिन तक जो तनावपूर्ण माहौल बना उसका जिम्मेदार कौन है? यह जानने के लिए भास्कर टीम मौके पर गई। जब इन घटनाओं और स्थितियों का आकलन किया तो प्रशासन की 3 बड़ी नाकामियां सामने आईं। पढ़िए ये रिपोर्ट…

पहला कारण : सोशल मीडिया पोस्ट

किसान खेत सिंह की हत्या के बाद बुधवार (3 सितंबर) को बाड़मेर में हलचल शुरू हुई। यहां से सोशल मीडिया पर ‘डांगरी चलो’ की पोस्ट वायरल होने लगी। भाजपा नेता स्वरूप सिंह खारा ने पोस्ट किया कि विलाप नहीं करेंगे, कुछ नया करेंगे। इसके बाद भाजपा नेता स्वरूप सिंह खारा डांगरी की ओर बढे़…

सोशल मीडिया पर डांगरी में भीड़ जुटाने के लिए आह्वान किया गया।

सोशल मीडिया पर डांगरी में भीड़ जुटाने के लिए आह्वान किया गया।

शिव विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी प्रत्याशी रहे स्वरूप सिंह खारा की पोस्ट।

शिव विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी प्रत्याशी रहे स्वरूप सिंह खारा की पोस्ट।

यह रही चूक

सोशल मीडिया पर चलने वाले इस आह्वान से जनता डांगरी की ओर कूच कर गई। सोशल मीडिया पर जिस तरह लोगों को भड़काया जा रहा था, प्रशासन ने इसे हल्के में लिया। जबकि पुलिस-प्रशासन को इस घटना को देखते हुए सतर्क रहना चाहिए था। इसमें वह फेल रही।

दूसरा कारण : बासनपीर और मसूरिया में हुई पूर्व की घटनाएं

सीमांत क्षेत्रों में बासनपीर और मसूरिया में सांप्रदायिक घटनाओं को बेस बना कर किसान हत्या की घटना को उससे जोड़ा। इससे लोगों में और आक्रोश भर गया।

बुधवार रात को डांगरी में आक्रोशित लोगों ने गांव में तीन केबिन जला दिए। इससे माहौल गरम हो गया और मामले ने तूल पकड़ लिया।

किसान की मौत से आक्रोशित लोगों ने बुधवार की रात कई जगह आग लगा दी।

किसान की मौत से आक्रोशित लोगों ने बुधवार की रात कई जगह आग लगा दी।

यह रही चूक

बुधवार की रात हुई उपद्रव की घटना को देखते हुए भी जिला कलेक्टर ने शांति के लिए धारा 163 नहीं लगाई। एसपी अभिषेक शिवहरे ने 400 से ज्यादा जाब्ता भेज कर शांति व्यवस्था कायम करने की कोशिश की थी। लेकिन शांति बनाने के कोई गंभीर उपाय नहीं किए। भारी संख्या में लोग गाड़ियों में पहुंच रहे थे। उन्हें गांव की सीमा से पहले ही नहीं रोका गया। गांव के हिस्ट्रीशीटर को भी डिटेन नहीं किया गया। जबकि ऐसे मौकों पर पुलिस अतिरिक्त सावधानी बरतते हुए ऐसी कार्रवाई करती है।

तीसरा कारण : भड़काऊ भाषणों से उग्र हुई भीड़

मर्डर के तीसरे दिन गुरुवार को गांव के बाहर धरना दिया गया। धरना प्रदर्शन में भारी भीड़ जमा हुई। बाहरी लोग इकट्ठा हुए। जेसीबी पहुंची। यहां स्थानीय नेता स्वरूप सिंह खारा ने कई भड़काऊ भाषण दिए।

खारा ने आरोपियों को लेकर कहा- ‘यह लोग कानून से मानने वाले नहीं हैं, आर-पार की लड़ाई लड़नी होगी। छोटी-छोटी कार्रवाई समाधान नहीं, बड़ी कार्रवाई करनी होगी। यह लोग हमारे पेशेंस का टेस्ट ले रहे हैं…लगातार यहां घटनाएं हो रही हैं। इनके अंतरराष्ट्रीय सोशल मीडिया पर चलता है कि सीमांत क्षेत्रों में हरकत करें और देखें कि रिएक्शन क्या होता है। इसी का परिणाम है बासनपीर और मसूरिया की घटना के बाद यह घटना हुई।’

खारा ने शाम चार बजे तक का अल्टीमेटम दिया और कहा कि हम खुद जाे अतिक्रमण कर घर और मस्जिद बनाई है, उसे हटा देंगे। इस अल्टीमेटम के बाद शाम 4 बजे भीड़ गांव में पहुंची। आरोपियों के बाड़े जलाए। बुलडोजर गांव में दाखिल हुआ। कई वाहनों के टायर फूंके गए। पत्थरबाजी हुई, पुलिस को चोटें आईं। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े।

डांगरी में भाषण देते हुए भाजपा नेता स्वरूप सिंह खारा।

डांगरी में भाषण देते हुए भाजपा नेता स्वरूप सिंह खारा।

यह रही चूक

जिला कलेक्टर ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत नहीं की, न ही किसी अधिकारी को परिवार व प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधि मंडल से बात करने के लिए भेजा। प्रशासन ने प्रदर्शन में शामिल किसी भी नेता से बातचीत कर शांति बनाने के प्रयास तक नहीं किए।

चेतावनी के अनुसार वहां तैनात पुलिस जाब्ता 4 बजने का इंतजार करता रहा। इससे पहले गांव में बुलडोजर सहित लोगों को प्रवेश दिया गया। उसके बाद गुस्साई भीड़ ने समुदाय विशेष के लोगों के घर के बाड़ों में आग लगाई। टायर जलाए, तब पुलिस कंट्रोल करने लगी। भीड़ इतनी उग्र हुई कि पुलिस और प्रदर्शनकारी आमने-सामने हो गए।

उपद्रव के बाद लोगों को पकड़कर ले जाते हुए पुलिस।

उपद्रव के बाद लोगों को पकड़कर ले जाते हुए पुलिस।

उपद्रव होने के बाद एसपी ने आदेश देकर बैरिकेड लगाए। मुख्य सड़क पर भी बैरिकेड लगाकर आने-जाने वालों को रोका गया और संदिग्ध लोगों को पुलिस की गाड़ियों में डाल कर गांव से दूर ले गए।

एसपी बोले- स्थिति अनुसार निर्णय लिया

इस मामले में भास्कर ने जिम्मेदार अफसर जैसलमेर एसपी से बातचीत की। एसपी अभिषेक शिवहरे ने कहा- डांगरी में जिस तरह का माहौल था, उसी के अनुसार डिसीजन लिया गया।

मामले में जिला कलेक्टर से सवाल करने के लिए कई बार संपर्क की कोशिश की। लेकिन बातचीत नहीं हो सकी।

जैसलमेर एसपी अभिषेक शिवहरे।

जैसलमेर एसपी अभिषेक शिवहरे।

विधायक बोले- प्रशासन ने लाठी से दबाने का प्रयास किया शिव से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने कहा कि जिन लोगों ने अपनी जायज मांग की, उसकी आवाज को प्रशासन ने लाठी के जोर पर दबाने का प्रयास किया। यह पूरे सिस्टम का फेल्योर है। अधिकारी तरीके से हैंडल करते तो ऐसी स्थिति नहीं बनती।

मॉर्च्युरी में बॉडी पड़ी थी, अंतिम संस्कार तक नहीं हुआ और उन पर आंसू गैस के गोले छोड़े जा रहे थे… वह क्या आतंकवादी हैं? अपने हक की बात नहीं कर सकते क्या? विधानसभा में अवगत करवाया था कि मॉर्च्युरी के बाहर भीड़ इकट्ठा हो रही है और तनाव की स्थिति बन सकती है।

स्वरूप सिंह बोले- अतिक्रमण करें और मारें, यह बर्दाश्त नहीं भाजपा नेता स्वरूप सिंह खारा ने कहा कि यह सभी की सामूहिक इच्छा थी, जो मेरे द्वारा उठाई गई। सभी का यही कहना था कि हमारी सरकारी भूमि पर अतिक्रमण करें और ओरण गोचर भूमि पर शिकार करें और हमें ही मारें, यह बर्दाश्त नहीं। मेरा तो अभी यही कहना है कि और भी जो अतिक्रमण इन लोगों ने कर रखे हैं, वह भी हटाए जाएं।

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हाथ-पैर तोड़ मुंह में ठूंसा कपड़ा,चीख भी नहीं पाया किसान:लहूलुहान हालत में एक हाथ से रेंगता रहा; गांव छोड़ भागे आरोपियों के घरवाले

मेरा भतीजा खेत में सो रहा था। आरोपियों ने नींद में पहले हथियार से सिर पर वार किया। फिर हाथ-पैर तोड़ दिए। वो चिल्ला भी नहीं पाया, क्योंकि आरोपियों ने मुंह में कपड़ा ठूंस दिया था।

ये कहना है जैसलमेर के खेत सिंह (50) के चाचा रेवत सिंह भाटी का…(CLICK कर पढ़ें)



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