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बयाना के नवलपुरा डांग क्षेत्र स्थित राष्ट्रीय अनहद महायोग पीठ के पीठाधीश्वर संत रूद्रनाथ महाकाल इन दिनों कश्मीर घाटी में सनातन संस्कृति की अलख जगाने में जुटे हुए हैं। रविवार दोपहर करीब 12 बजे वे अपने अनुयायियों के साथ जम्मू कश्मीर के अनंतनाग जिले के
संत रूद्रनाथ ने आपत्ति जताते हुए कहा कि “भारत की धरती पर ही हमें पूजा-पाठ से रोका जा रहा है, जबकि इस मंदिर में फिल्मों की शूटिंग की मंजूरी दी जाती है। यह विडंबना है।” संत रुद्रनाथ ने कहा कि पिछले सप्ताह ही उन्होंने केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से मुलाकात कर इस बारे में पूर्व में ही अवगत कराया था।
हालांकि संत और अनुयायियों के विरोध के बाद एएसआई के कर्मचारियों को झुकना पड़ा और एक बार फिर प्राचीन मंदिर का परिसर वैदिक मंत्रों से गूंज उठा।
इससे पहले शनिवार को संत रुद्रनाथ पहलगाम की बैसरन घाटी पहुंचे, जहां इसी साल अप्रैल में आतंकियों ने 26 निर्दोष नागरिकों की हत्या कर दी थी। घाटी में दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए संत रूद्रनाथ के नेतृत्व में श्रीमद्भागवत गीता का पाठ किया गया। भारी सुरक्षा के बीच पहुंचे संत ने कहा कि हमले के बाद से मिनी स्विटजरलैंड कही जाने वाली यह घाटी वीरानगी का शिकार है, जबकि सनातन परंपरा की ज्योति यहां फिर से जलनी चाहिए।
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