झालावाड़ जिले के पिपलोदी में सरकारी स्कूल में 7 बच्चों की मौत के बाद सरकार को स्कूलों की जर्जर हालत पर चिंता बढ़ गई है। इस घटना के बाद पूरे राजस्थान में हड़कंप मच गया है। शिक्षा विभाग ने आदेश जारी किए हैं कि जर्जर स्कूलों के उन हिस्सों में बच्चों को
इसी बीच भास्कर रिपोर्टर ने प्रदेश की राजधानी जयपुर में स्कूलों का जायजा लिया तो स्थिति चिंताजनक दिखी। जयपुर के तीन सरकारी स्कूलों से पूरे राज्य की हालत समझी जा सकती है।
- पहला स्कूल- शहीद अमित भारद्वाज राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल माणकचौक में 2 करोड़ रुपए खर्च करने के बावजूद शनिवार को बारिश में छज्जा गिर गया।
- दूसरा स्कूल- सांगानेर बावड़ी का बास स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल की हालत भी खराब है। यहां स्कूल भवन में दरारें हैं। प्लास्टर गिर रहा है।
- तीसरा स्कूल- सिंधीकैंप बस स्टैण्ड के ठीक सामने स्थित राजकीय सिंधी बालिका उच्च माध्यमिक स्कूल में छत से प्लास्टर गिर रहा है। छत से पानी टपक रहा है। ऐसी खतरनाक स्थिति में भी बच्चे पढ़ाई करने पर मजबूर हैं।
आगे पढ़िए पूरी रिपोर्ट….

माणकचौक स्थित शहीद अमित भारद्वाज राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल।
लोकेशन 1
शहीद अमित भारद्वाज राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल, माणकचौक
यह स्कूल भवन करीब डेढ़ सौ साल से ज्यादा पुराना है। यह नगर निगम हेरिटेज में सबसे पुराने स्कूलों है। इस स्कूल में ग्राउंड फ्लोर से सेकेंड फ्लोर तक छोटे बड़े 39 रूम हैं। नीचे के फ्लोर पर लाइब्रेरी, ऑफिस और लैब्स हैं। 26 जुलाई को यहां बारिश के दौरान स्कूल परिसर में एक छज्जा गिर गया। गनीमत रही की कोई जनहानि नहीं हुई। छज्जे से गिरे मलबे को स्कूल में पढ़ने वाले छात्र ही हटाते नजर आए। यहां उन्हें स्कूल प्रबंधन की ओर से फावड़ी तगारी पकड़ा दी गई।

माणचौक स्कूल में शनिवार को छज्जे का हिस्सा गिर गया। इसके मलबे को यहां पढ़ने वाले स्टूडेंट्स ने ही हटाया।
2021 में हुआ था रेनोवेशन
स्कूल प्रधानाचार्य रामबाबू गुप्ता ने बताया – साल 2021 से पहले इस स्कूल भवन की स्थिति बहुत ही जर्जर अवस्था थी। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत इस स्कूल का चयन किया गया। इस दौरान स्कूल में 20 महीने तक रिनोवेशन का काम हुआ। उस दौरान पूरा स्कूल दूसरी जगह शिफ्ट किया गया था। 20 महीने के रिनोवेशन के बाद सितंबर 2022 में हम वापस यहां शिफ्ट हुए थे।
उन्होंने बताया- स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के अंतर्गत फंडिंग दो करोड़ के करीब का बजट था। पुरातत्व विभाग की पूरी मॉनिटरिंग की गई थी। भवन पूरी तरह से सुरक्षित है। बारिश के दौरान छोटा-मोटा डैमेज जरूर होता है। फर्म के द्वारा रिनोवेशन कराया गया था। आज एक छज्जा बारिश के कारण गिर गया था।

राजकीय सिंधी बालिका उच्च माध्यमिक स्कूल की बिल्डिंग में जर्जर छत के नीचे बच्चे दरी पर बैठ रहे।
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राजकीय सिंधी बालिका उच्च माध्यमिक स्कूल, सिंधी कैंप बस स्टैण्ड के सामने
सिंधीकैंप बस स्टैण्ड के ठीक सामने स्थित राजकीय सिंधी बालिका उच्च माध्यमिक स्कूल की बिल्डिंग 100 साल से ज्यादा पुरानी है। यहां एक से पांचवी तक के करीब 100 बच्चे पढ़ाई करते हैं। ये स्कूल पिछले करीब 70 सालों से किराए की बिल्डिंग में चल रहा है। स्कूल में छत से प्लास्टर गिर रहा है। छत से पानी टपक रहा है। ऐसी हालत में बच्चे पढ़ाई करने पर मजबूर हैं। बच्चे नीचे जमीन पर दरी पट्टी बिछाकर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं।

सांगानेर ते तेजाजी का बाड़ा स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल।
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राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल, तेजाजी का बाड़ा सांगानेर
सांगानेर स्थित कई सरकारी स्कूलों की स्थिति काफी खराब है। यहां राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल तेजाजी का बाड़ा सांगानेर में कई जगह दरारें नजर आईं। छत पर जगह-जगह प्लास्टर गिरा हुआ था। इसको रिनोवेट नहीं करवाया गया। दीवारों पर सीलन के कारण प्लास्टर गिरा हुआ है। स्कूल का एक गेट हां से बच्चों की एंट्री होती है। वहां दो पिल्लरों पर मठोठ (पत्थर) को ऐसे ही रख दिया गया। इस पर किसी तरीके से प्लास्टर नहीं किया गया है। यह मठोठ यानी पत्थर गिरता है तो जनहानि या किसी बच्चे को नुकसान होने की आशंका है।
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