☜ Click Here to Star Rating



पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने कहा- राहुल गांधी ने कोविड, नोटबंदी और जीएसटी पर जो भविष्यवाणी की थी, वो सभी सच साबित हुई है। राहुल गांधी ने पहले ही कह दिया था कि जीएसटी से सभी वर्गों के लोग परेशान हैं। वह चाहे व्यापारी हो या उपभोक्ता हो।

.

यह सरकार की ड्यूटी थी कि नेता प्रतिपक्ष बोल रहा है तो उस पर गौर करें। जीएसटी को समय पर एग्जामिन कर लेते तो आज लोगों को तकलीफ नहीं होती। गहलोत जयपुर में मीडिया से बातचीत कर रहे थे।

गहलोत ने कहा- लोगों ने महंगाई के दौर में बहुत तकलीफ झेली है। पीएम ने 15 अगस्त के भाषण में घोषणा की और अब जाकर आप लाइन पर आए हैं। जीएसटी काउंसिल के माध्यम से जो फैसला हुआ है, उसका प्रचार बहुत हो रहा है। बहुत देरी कर दी है। मैं चाहूंगा कि कुछ कमी है तो अभी ठीक कर लीजिए। ऐसा नहीं कि साल भर बाद एग्जामिन कर रहे हैं और फैसला करें।

जीएसटी लगाने के प्रस्ताव का किया था विरोध गहलोत ने कहा-जब यूपीए सरकार थी, तब जीएसटी का प्रस्ताव आया था। मोदी की अगुवाई वाली गुजरात सरकार सहित सभी भाजपा सरकार ने इसका विरोध किया था। सरकार बदल गई तो आपने जीएसटी लागू की। जीएसटी को आनन-फानन में लागू किया। इसके 5 फीसदी, 18 फीसदी और 28 फीसदी के अलग अलग स्लैब बने। उससे जनता को कोई फायदा नहीं हुआ। उसमें लोगों को बहुत भयंकर तकलीफ हुई।

जीएसटी की वजह से कई लोग जेल में बंद गहलोत ने कहा- जीएसटी की वजह से कई लोग जेल में बंद है, उनको पनीशमेंट मिल गया। जीएसटी की प्रक्रिया को समझने में वक्त लगता है। इतना बड़ा काम था, इसे समझने में व्यापारी से लेकर किसी को भी समझने में वक्त लगता है।

आपने वक्त भी नहीं दिया, इस कारण से सब समस्याएं पैदा हुईं। अभी मेरा मानना है, जीएसटी जब पहली बार प्रस्ताव आया तब कहा गया कि एक स्लैब रखो ताकि कोई तकलीफ नहीं आए। प्रणव मुखर्जी के वक्त में एक स्लैब रखने की बात थी ताकि लोग आराम से जीएसटी को समझ कर जमा करवा सकें।



Discover more from Kuchaman City Directory

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Comments

Leave a Reply

error: Content is protected !!

Sign In

Register

Reset Password

Please enter your username or email address, you will receive a link to create a new password via email.

Discover more from Kuchaman City Directory

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading