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ग्रामीण सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे कक्षा 8वीं के बच्चों की गणितीय समझ को लेकर असर (एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट) रूरल 2024 में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान के सरकारी स्कूलों के बच्चों की भाग (डिवीजन) करने की क्षमता में

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यानी बीते छह सालों में प्रदर्शन करीब 9 प्रतिशत अंक गिरा है। इसी तरह मेघालय ने सबसे खराब प्रदर्शन किया, जहां केवल 12.1% बच्चे ही भाग कर सके। इसके बाद असम (24.2%) और राजस्थान (25.5%) का स्थान रहा। इसके उलट, बिहार ने बड़ी छलांग लगाई है। 2018 में 55.1% बच्चे भाग कर पाते थे, जो 2024 में बढ़कर 62.0% हो गया। मिजोरम (59.2%) और पंजाब (58.0%) जैसे राज्य भी शीर्ष प्रदर्शन करने वालों में शामिल रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि राजस्थान में गणित शिक्षण की गुणवत्ता और शिक्षकों की कमी इस गिरावट के बड़े कारण हो सकते हैं। रिपोर्ट साफ बताती है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा की बुनियादी दक्षताओं में गंभीर सुधार की आवश्यकता है। हैरानी की बात है कि जिन बच्चों को आठवीं में गणित टफ लगती है, वे सरकारी आंकड़ों में दसवीं–बारहवीं कक्षा में आते–आते अव्वल आने लग जाते हैं। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर का परीक्षा परिणाम देखे हैं तो यही तस्वीर सामने आ रही है। उदाहरण स्वरूप वर्ष 2024 में नियमित विद्यार्थियों का गणित विषय का परीक्षा परिणाम 96.53 % रहा।

दस लाख सत्तर हजार से ज्यादा बच्चे परीक्षा में बैठे थे। इनमें से दस लाख बत्तीस हजार से ज्यादा बच्चों ने परीक्षा पास की। नियमित और प्राइवेट विद्यार्थियों का परीक्षा परिणाम देखें तो भी 96.46 प्रतिशत रहा। इसी तरह 12वीं का बोर्ड परिणाम भी उल्लेखनीय रह रहा है। गत वर्ष 74 हजार से ज्यादा बच्चों ने परीक्षा दी, उसमें से 73879 बच्चे उत्तीर्ण घोषित किए गए। यह आंकड़ा 99 % से भी ऊपर है। इसमें प्राइवेट बच्चे शामिल हैं।

8वीं में 12 लाख विद्यार्थी, इनमें 2.64 लाख को ही ए ग्रेड

प्रारंभिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत आठवीं और पांचवीं की परीक्षाएं आयोजित की जाती है। इसमें गत वर्ष आठवीं कक्षा के 12.50 लाख से ज्यादा बच्चे परीक्षा में बैठे। इनमें से 2.64 लाख बच्चों को ए ग्रेड मिला है। जबकि 6.51लाख बच्चों को बी ग्रेड, 3.3 लाख को सी ग्रेड, 3259 को डी और 411 को ई ग्रेड मिला है। तीसरी से आठवीं तक के बच्चों को हिंदी, अंग्रेजी व गणित विषयों में लर्निंग लॉस पूरा करने के लिए आकलन का प्रावधान भी है। ताकि उनका शैक्षणिक स्तर में सुधार हो।



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