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बगड़ थाने में एक वकील के साथ मारपीट और धारा 151 में बंद किए जाने के विरोध में वकीलों ने मंगलवार को धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है। यह धरना जिला कलेक्ट्रेट परिसर में जारी है। अभिभाषक संघ ने इस प्रकरण को गंभीर बताते हुए पेन डाउन हड़ताल का भी ऐलान कर दिय

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वृंदावन मेले की पार्किंग विवाद से शुरू हुआ मामला

जानकारी के अनुसार, झुंझुनूं जिले के प्रसिद्ध वृंदावन मेले में एक साधारण पार्किंग विवाद ने बड़ा रूप ले लिया। इसी विवाद के दौरान बगड़ थाना पुलिस की वकील सुरेंद्र कुमावत से कहासुनी हो गई। पीड़ित वकील का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उनसे अभद्रता करते हुए मारपीट की और फिर उन्हें धारा 151 के तहत हिरासत में ले लिया।

जिला अभिभाषक संघ का रुख

जिला अभिभाषक संघ के अध्यक्ष सुभाष पूनिया ने कहा कि पुलिस ने वकील के साथ अन्याय किया है। “वृंदावन मेले में पार्किंग जैसी छोटी सी बात को लेकर पुलिसकर्मियों का इस तरह आवेश में आकर मारपीट करना और फिर वकील को 151 में बंद करना गंभीर मामला है। इस पर कार्रवाई होनी ही चाहिए। हमने इस संबंध में पुलिस अधीक्षक से बातचीत की थी, लेकिन पहली वार्ता से हम संतुष्ट नहीं हैं। अब दूसरे दौर की वार्ता होगी, उसके बाद ही आगे का फैसला लिया जाएगा।”

पीड़ित वकील का कहना है

वकील सुरेंद्र कुमावत ने बताया कि वे रविवार को वृंदावन मेले में गए थे। पार्किंग स्थल पर कुछ कहासुनी हुई, जिस पर पुलिसकर्मियों ने उन्हें निशाना बना लिया। “मेरे साथ तीन-चार बार मारपीट की गई और बाद में मुझे 151 में बंद कर दिया गया। हमने इसमें शामिल सभी पुलिसकर्मियों के नाम भी दे दिए हैं। पुलिस जांच का आश्वासन दे रही है, लेकिन हमें न्याय मिलने तक हम चुप नहीं बैठेंगे।”

कलेक्ट्रेट पर जारी धरना

घटना के विरोध में मंगलवार सुबह से ही झुंझुनूं जिला कलेक्ट्रेट परिसर में वकीलों ने धरना शुरू कर दिया। बड़ी संख्या में वकील कोर्ट का कामकाज छोड़कर कलेक्ट्रेट पहुंचे और नारेबाजी की। उनका कहना है कि जब तक दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

धरने के दौरान वकीलों ने कहा कि यदि उनकी मांगों को अनसुना किया गया तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को भी इस मामले में स्पष्ट रुख अपनाना होगा।

पेन डाउन हड़ताल का ऐलान

अभिभाषक संघ ने इस मामले को लेकर पेन डाउन हड़ताल का भी ऐलान कर दिया है। यानी जिलेभर में वकील न्यायालयों में कामकाज नहीं करेंगे। इसका सीधा असर आम लोगों और न्यायिक कार्यवाही पर पड़ेगा। कई वादकारियों को अपने मामलों की सुनवाई के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।

वार्ता से हल की उम्मीद

धरना स्थल पर मौजूद वकीलों ने कहा कि वे किसी टकराव की स्थिति नहीं चाहते, लेकिन वकीलों की गरिमा और सुरक्षा सर्वोपरि है। पुलिस की मनमानी को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एसपी के साथ दूसरी दौर की वार्ता में ही तय होगा कि आंदोलन किस दिशा में जाएगा। यदि वकीलों की संतुष्टि के अनुसार कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को राज्य स्तर पर भी ले जाया सकता है।



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