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वर्ल्ड लंग कैंसर डे के मौके पर भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल के वरिष्ठ कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. दीपक गुप्ता रूबरू हुए।
फेफड़ों के कैंसर की पहचान और इलाज में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एक अहम भूमिका निभा रहा है। यह तकनीक न केवल निदान की सटीकता को बढ़ा रही है। बल्कि उपचार प्रक्रिया को भी सरल, तेज और मरीज-केंद्रित बना रही है। वर्ल्ड लंग कैंसर डे के मौके पर भगवान महा
डॉ. गुप्ता ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इमेजिंग, जीनोमिक्स और क्लीनिकल डेटा को एक साथ विश्लेषित कर यह अनुमान लगाने में सक्षम होता है कि किस मरीज के लिए कौन-सा उपचार सबसे बेहतर परिणाम देगा। इससे पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान बनाना संभव हो रहा है, जो कि कैंसर जैसी जटिल बीमारी में बेहद उपयोगी है।
हाई रिस्क मरीजों की शुरुआती स्क्रीनिंग में मददगार
AI आधारित तकनीक सीटी स्कैन और एक्स-रे इमेजिंग को उच्च स्तर की सटीकता से विश्लेषित कर सकती है। यह फेफड़ों में मौजूद गांठों (नॉड्यूल्स) और अन्य सूक्ष्म असामान्यताओं की पहचान कर सकती है। जो सामान्य रूप से नजर नहीं आतीं। डॉ. गुप्ता ने बताया कि हाई रिस्क ग्रुप के मरीजों के लिए एआई-आधारित स्क्रीनिंग प्रोग्राम शुरुआती चरण में कैंसर की उपस्थिति की पहचान कर सकता है, जिससे समय रहते इलाज शुरू किया जा सकता है।
एआई आधारित कंप्यूटर-एडेड डिटेक्शन (CAD) सिस्टम अब रेडियोलॉजिस्ट के लिए सेकेंड रीडर की तरह कार्य कर रहे हैं, जिससे इमेज विश्लेषण में समय और मेहनत दोनों कम लगती है। साथ ही एआई डिजिटल पैथोलॉजी स्लाइड्स का विश्लेषण कर कैंसर कोशिकाओं और ट्यूमर के व्यवहार की पहचान अधिक तेजी और सटीकता से करने में सक्षम हो रहा है।
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