जयपुर9 मिनट पहले
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राजधानी की पौराणिक ढूंढ नदी में सालाें बाद लगातार दूसरे साल कानोता बांध छलकने से पानी की आवक शुरू हाे गई। नदी में पानी आने से अतिक्रमण अपने आप ही सामने आ गए। 25 साल में नदी का कैचमेंट एरिया 800 से सिकुड़कर 300 मीटर ही रह गया। जेडीए मास्टर प्लान में न
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- 5 साल में हजारों बीघा में कैचमेंट एरिया में कॉलोनियां बसा दी गई, रिसोर्ट डूब क्षेत्र में मिट्टी का भराव कर अतिक्रमण रहे है।
- आगरा रोड के दोनों तरफ कैचमेंट की जमीन पर करीब 150 अवैध कॉलोनियां बस चुकी हैं।
- सरकार ने 25 साल पहले पेयजल सप्लाई और सिंचाई के लिए बहाव क्षेत्र में कानोता पर डेम बनवाया था।
- बांध बनने से कानोता के आगे नदी में पानी कम हो जाता है। ऐसे में अवैध कॉलोनी बसाने वाली गृह निर्माण सोसायटियां कैचमेंट क्षेत्र की खातेदारी जमीनों पर कॉलोनियां काट रही हैं।
- सीकर रोड पर भैरूं खेजड़ा के पास नदी का उद्गम स्थल है। कानोता बांध से बहकर ढूंढ नदी कानोता पुलिया होते हुए हिंगोनिया गौशाला, सिनडोली, सामरिया सहित चार रपट पार करती है। खिजुरिया ब्राह्मणान के ग्राम बिशनसिंहपुरा में द्रव्यवती और ढूंढ नदी का संगम है। साल 2024 में दोनों नदियों के बहाव का संगम हुआ था।
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