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मरुस्थलीय जैसलमेर में ओरण और गोचर भूमि को बचाने के लिए पिछले कई दिनों से आंदोलन जारी है। ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि ओरण केवल जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि रेगिस्तान की संस्कृति, धार्मिक आस्था और पारिस्थितिकी तंत्र की धड़कन है।

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इस बीच गुरुवार को प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाते हुए रामगढ़ तहसील के कुछड़ी गांव के पास करीब 1000 बीघा ओरण भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया। यह कार्रवाई ऐसे समय पर हुई है जब पिछले 10 दिनों से कलेक्ट्रेट के सामने धरना चल रहा है और 26 सितंबर को गड़ीसर लेक से कलेक्ट्रेट तक जनाक्रोश रैली निकालने की घोषणा की गई है।

कहीं कहीं हल्का विरोध भी हुआ, मगर नहीं रुकी बुलडोजर की रफ़्तार।

कहीं कहीं हल्का विरोध भी हुआ, मगर नहीं रुकी बुलडोजर की रफ़्तार।

सुबह से शुरू हुई कार्रवाई, 5 जेसीबी लगी काम पर

सुबह प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची और ओरण भूमि पर किए गए अतिक्रमण को हटाने की प्रक्रिया शुरू की। 5 जेसीबी मशीनों की मदद से तारबंदी, खेत की पट्टियां और उगी हुई फसल को नष्ट किया गया। जमीन को दुबारा खाली करवाते समय आसपास के ग्रामीण भी मौके पर मौजूद रहे। कई जगह विरोध के स्वर भी उठे, लेकिन भारी पुलिस बल की मौजूदगी के चलते माहौल शांतिपूर्ण रहा।

आला अधिकारी और पुलिस बल तैनात

कार्रवाई को लेकर प्रशासन पहले से ही अलर्ट था। मौके पर जैसलमेर एसडीएम सक्षम गोयल, सीओ सिटी रूप सिंह, तहसीलदार रामगढ़ और मोहनगढ़ मौजूद रहे। इसके अलावा बड़ी संख्या में पुलिस बल भी तैनात किया गया ताकि किसी तरह की अप्रिय घटना न हो।

ग्रामीणों में हड़कंप और उम्मीद दोनों

प्रशासन की इस कार्रवाई से ग्रामीणों में हड़कंप मच गया, क्योंकि लंबे समय से ओरण भूमि पर कब्जों की शिकायतें होती रही हैं। वहीं, आंदोलनकारियों और पर्यावरण प्रेमियों को इस कदम से उम्मीद जगी है कि सरकार और प्रशासन अब गंभीरता से ओरण को अतिक्रमण मुक्त कराने की दिशा में ठोस कदम उठाएंगे।

मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल व प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।

मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल व प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।

10 दिन से धरने पर बैठे ग्रामीण

जैसलमेर कलेक्ट्रेट के सामने पिछले 10 दिनों से सुमेर सिंह के नेतृत्व में ग्रामीण और पर्यावरण प्रेमी धरने पर बैठे हैं। धरने का मुख्य मुद्दा है कि ओरण और गोचर भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए, ताकि इन पर भविष्य में कोई भी अतिक्रमण न कर सके। धरने पर बैठे लोगों का कहना है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद अब तक कार्रवाई नहीं हुई थी, लेकिन अब जाकर प्रशासन ने कुछड़ी गांव में बड़ी कार्रवाई कर सही संदेश दिया है।

26 सितंबर को जनाक्रोश रैली

धरने और आंदोलन की अगली कड़ी में 26 सितंबर को जैसलमेर शहर में जनाक्रोश रैली निकाली जाएगी। यह रैली सुबह 11 बजे गड़ीसर लेक से शुरू होकर कलेक्ट्रेट तक पहुंचेगी। आयोजनकर्ता ने बताया कि इस रैली में बाड़मेर और बीकानेर से भी बड़ी संख्या में लोग शामिल होंगे।

इस रैली को समर्थन देने के लिए शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी भी जैसलमेर पहुंचेंगे और इसमें हिस्सा लेंगे। उन्होंने युवाओं से अपील की है कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में जैसलमेर पहुंचें और ओरण बचाने की आवाज बुलंद करें।

रैली को समर्थन देने के लिए शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी भी जैसलमेर पहुंचेंगे और इसमें हिस्सा लेंगे।

रैली को समर्थन देने के लिए शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी भी जैसलमेर पहुंचेंगे और इसमें हिस्सा लेंगे।

ओरण का सांस्कृतिक और पर्यावरणीय महत्व

ओरण भूमि सिर्फ चारागाह नहीं है। मरुस्थलीय इलाकों में यह समाज की धार्मिक आस्था से जुड़ी है। कई गांवों में ओरण को देवभूमि का दर्जा दिया गया है। यह भूमि पशुपालन के लिए जीवनदायिनी है और मरुस्थल के पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित बनाए रखने में अहम योगदान देती है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ओरण और गोचर भूमि खत्म हुई तो रेगिस्तान में न केवल पशुपालन प्रभावित होगा, बल्कि भूजल स्तर और वनस्पति पर भी गंभीर असर पड़ेगा।

आंदोलनकारियों की मांग

धरने पर बैठे लोगों और आंदोलनकारियों की मांग है कि –

  • ओरण व गोचर भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए।
  • अतिक्रमण हटाकर स्थायी रूप से सुरक्षा की गारंटी दी जाए।
  • जिन अधिकारियों की लापरवाही से अतिक्रमण हुआ है, उनकी जवाबदेही तय की जाए।
  • भविष्य में ओरण भूमि को विकास योजनाओं या औद्योगिक परियोजनाओं में शामिल न किया जाए।
10 दिनों से कलेक्ट्रेट के सामने धरना दे रहे पर्यावरण प्रेमी और ग्रामीण।

10 दिनों से कलेक्ट्रेट के सामने धरना दे रहे पर्यावरण प्रेमी और ग्रामीण।



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