जैन नसिया में पूजा करती महिलाएं।
टोंक में प्रथम पट्टाचार्य श्री वीरसागर जी के 68वें समाधि अंतर विलय वर्ष पर धर्मसभा का आयोजन हुआ । इस अवसर पर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने कहा “एक संसारी प्राणी जन्म लेता है, वह जीवन निर्माण के लिए अनेक कार्य करता है चाहे वह विद्यार्थी हो, ने
उन्होंने कहा कि गृहस्थ अवस्था में उन्होंने भी आत्मसंयम का रास्ता अपनाया। जैसे हीरे को निखारने के बाद उसकी कीमत बहुमूल्य होती है, उन्होंने भी लौकिक शिक्षा, धार्मिक शिक्षा, तप स्वाध्याय से जीवन को निखारने का प्रयास किया। उन्होंने धार्मिक तप ,त्याग स्वाध्याय को जीवन में आत्मसात किया।

आचार्य शी शांति सागर जी महाराज का आचार्य पद प्रतिष्ठापन शताब्दी समारोह 2024-25 आगामी 3 और 4 अक्टूबर को मनाया जाएगा।
त्याग और संयम का महत्व
आचार्य ने कहा, “त्याग भी तप है। पहले गुरुजनों का मार्गदर्शन सरलता से उपलब्ध नहीं होता था, लेकिन उन्होंने गृहस्थ और यौवन अवस्था में ही इंद्रिय भोगों पर नियंत्रण किया। चार रस जैसे घी, तेल, मीठा और नमक का त्याग किया तथा ऐलक श्री पन्नालाल जी से 7 ब्रह्मचर्य प्रतिमा अंगीकार की। उन्होंने ही संसार को समझाया कि समाज और संगठन में कैंची की तरह अलगाव नहीं, बल्कि सुई की तरह जोड़ने का कार्य करना चाहिए।”
शताब्दी समारोह की तैयारियां
राजेश पंचोलिया ने बताया कि आचार्य पद के शताब्दी महोत्सव के साथ आचार्य श्री वीर सागर जी की मुनि दीक्षा का शताब्दी महोत्सव भी मनाया जा रहा है। वात्सल्य वारिधि वर्धमान वर्षा योग समिति के मंत्री राजेश सर्राफ एवं प्रवक्ता पवन कंटान ने बताया कि आचार्य 108 वर्धमान सागर जी महाराज के ससंघ सानिध्य और आशीर्वाद से 20वीं सदी के दिगंबर जैन प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती श्री 108 शांति सागर जी महाराज आचार्य पद प्रतिष्ठा शताब्दी समारोह 3 और 4 अक्टूबर को RN गार्डन, महावीर नगर में मनाया जाएगा।
शोभायात्रा और विधान
इस दौरान एक भव्य शोभायात्रा शाही लवाजमे के साथ निकाली जाएगी, जो अहिंसा सर्किल से सवाई माधोपुर रोड तक जाएगी। उसके बाद 108 परिवारों द्वारा 108 विधान की रचना होगी, जिसमें इंद्र-इंद्राणी पूजा-अर्चना करेंगे। कार्यक्रम को लेकर तैयारियां जोर-शोर से जारी हैं।
Discover more from Kuchaman City Directory
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
Comments