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राजकीय उप्रावि दौलतपुरा में एक कमरे में अभी 6,7 और 8वीं के बच्चे एकसाथ पढ़ने को मजबूर हैं। स्कूल में सिर्फ यही क्लास हैं जहां बच्चे बैठ पा रहे हैं। बाकी जर्जर होने से बंद कर दिए गए। भास्कर रिपोर्टर सच जानने स्कूल पहुंचा तो एक रूम में मैडम खुशबू 8वीं,
दो क्लास राम पर बोलती तो राम-राम… और एक क्लास के बच्चे 10 चौके चालीस बोल रहे थे। ऐसे में पैरोडी बनी- राम-राम…10 चौके चालीस। शिक्षा का ये हश्र इन दिनो शिक्षा मंत्री के गृह जिले में हैं। राज्य आपदा प्रबंधन निधि के तहत पिपल्दा विधानसभा के 90 सरकारी स्कूलों में 2-2 लाख से 1.8 करोड़ की राशि से काम कराए गए थे। सितंबर 2024 में इसकी स्वीकृति जारी की गई थी। लेकिन 5-6 माह बाद ही मानसून की पहली बरसात में इन स्कूलों की छतें टपकने लगी, प्लास्टर गिरने लगे और घटिया निर्माण की परतें उखड़ गई।
सरकारी स्कूलों के ये हाल : कहीं मैदान तो कहीं बमरादों में चल रही क्लास…छोटे बच्चे बारिश में घर भेजने पड़ रहे
अयाना – यहां स्कूल की छुट्टी हो चुकी थी। शिक्षक नरेश, ओपी बैरवा व बीके शर्मा ने बताया कि ठेकेदार ने काम तो कराया लेकिन पुताई ज्यादा कराई। छत पर रिपेयर की लेकिन पानी टपक रहा है। जिन पांच कमरों में काम हुआ था वे सभी बैठने लायक नहीं रहे। ऐसे में 3 से 9वीं क्लास के बच्चे टन शेड के नीचे बैठने काे मजबूर हैं।
ये हैं राउप्रावि दौलतपुरा…रिपोर्टर सोमवार दोपहर पौने 12 बजे स्कूल पहुंचा तो बच्चों को तीन शिक्षक ऐसे हालात में पढ़ा रहे थे। बाहर मासूम खुले आंगन में बैठे थे। यहां कुल 51 बच्चे, 5 टीचर व 6 कमरे हैं। दो कमरों में दो लाख का काम कराया और छत रिपेयर की। एचएम मीणा ने माना कि कमरे बैठने लायक नहीं। ठेकेदार 3 सीमेंट की बोरी लाया, एक वापस ले गया। 25 तगारी रेत, दो बाल्टी कलर लगाया।
अमरपुरा – स्कूल में 72 बच्चे हैं। यहां भी दो कमरे हैं। इनमें काम कराया और छत मरम्मत की गई थी। पर कमरे बैठने लायक नहीं रहे । इस पर एक ही बमरादा है उसमें जितने बच्चे आते हैं उन्हें बिठाते हैं। हैड मास्टर कालूलाल बताते हैं कि दोनों कमरे जर्जर होने से छोटे बच्चों को बरसात में घर भेजना पड़ता है।
छतरपुरा – एचएम ऊषादेवी ने बताया कि यहां 23 बच्चे हैं। दो कमरे व एक रसोई है। सभी जर्जर होने से खतरे का निशान लगाया है। बच्चों को बाहर बिठा रहे हैं। बाहर बैठी महिलाओं ने बताया कि फरवरी में यहां स्कूल में काम तो हुआ लेकिन बरसात में पानी आ गया। जिससे बच्चों को बाहर बैठना पड़ रहा है।
बड़ा सवाल : जो स्कूल जर्जर थे वहां वर्क ऑर्डर क्यों ?
कांग्रेस विधायक चेतन पटेल का आरोप है कि प्राथमिक स्कूल मालियों की बाड़ी, बालिका उमा स्कूल खोदावाद्वा, उप्रा स्कूल इटावा-2, महात्मा गांधी स्कूल वार्ड नंबर 11, महात्मा गांधी स्कूल गुमानपुरा, राउप्रा स्कूल इटावा वार्ड 21, राउप्रा किशनपुरा, राउप्रा लाखनी, उमावि जटवाडी और जटवाडा, उप्रावि भवानीपुरा, प्रावि बीरोदा, उमावि जोरावरपुरा, प्रावि कीरपुरा,उप्रावि हवाखेड़ली, खरवन, देलोद, कीरपुरा गैता, अचलगढ़ और उम्मेदपुरा, प्रावि खेड़ाली नोनेरा और नयागांव और अरनिया आदि जर्जर स्कूलों की सूची में हैं। बड़ा सवाल यही है कि वर्क ऑर्डर जारी कैसे किए?
“क्षेत्र की 90 स्कूलों में भ्रष्टाचार हुआ है। शिक्षा विभाग की सूची में ही 84 नाम फिर से आ गए जिन परदो-दो लाख रुपए खर्च किए गए। ठेकेदारों को ब्लैक लिस्ट किया जाए और मासूमों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले अफसरों पर कार्रवाई की जाए।”
-चेतन पटल, कांग्रेस विधायक, पिपल्दा
“भास्कर ने इस संबंध में इस मामले में पीडब्ल्यूडी व समसा की संयुक्त टीम का गठन किया जाएगा। क्योंकि वर्क ऑर्डर समसा ने जारी किए। ऐसे में दस्तावेज के बिना जांच नहीं हो सकती। इसलिए कलेक्टर से ये टीम बनाकर दोबारा जांच कराने का आग्रह किया है।”
-हेमंत कुमार, एसडीएम, इटावा
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