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देश में मानसिक स्वास्थ्य एक बड़ी समस्या बन रहा है। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता के लिए भारत सरकार की हेल्पलाइन ‘टेलीमानस’ पर 966 दिन में 24.25 लाख कॉल आए हैं। यानी रोज 2511 लाेग मानसिक स्वास्थ्य संबंधी मदद मांग रहे हैं।

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केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से 10 अक्टूबर 2022 काे यह हेल्पलाइन शुरू की थी, जाे राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान (निम्हांस), बैंगलुरु संचालित कर रहा है। कोटा के सामाजिक कार्यकर्ता सुजीत स्वामी की आरटीआई के जवाब में सरकार ने बताया कि इस हेल्पलाइन ने 1 दिसंबर 2022 से 24 जुलाई 2025 के बीच 37 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 24.25 लाख कॉल्स अटेंड की हैं।

31 से 60 आयु वर्ग में ज्यादा कॉल करने वालों में 31-60 उम्र समूह के ज्यादा हैं। इनमें 2 लाख 86 हजार 286 कॉल्स (प्रतिदिन लगभग 296 कॉल्स) दर्ज की गई। इसके बाद 19-30 उम्र समूह में 1 लाख 98 हजार 409 कॉल्स (प्रतिदिन 205 कॉल्स) हैं। वहीं, 0-18 उम्र समूह में 66 हजार 599 कॉल्स (प्रतिदिन 69 कॉल्स) और 60+ उम्र समूह में 37 हजार 745 कॉल्स (प्रतिदिन 39 कॉल्स) शामिल हैं। राज्यवार आंकड़ों में सामने आया कि उत्तर प्रदेश से सर्वाधिक 4 लाख 39 हजार 164 कॉल्स (प्रतिदिन 455 कॉल्स) किए गए हैं। इसके विपरीत, लक्ष्यद्वीप में सबसे कम 722 कॉल्स दर्ज की गईं।

टेलीमानस हेल्पलाइन विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 2022 पर लॉन्च की गई टेलीमानस दो स्तर पर काम करती है। स्तर-1 में राज्य आधारित कॉल सेंटर हैं, जहां प्रशिक्षित काउंसलर तैनात हैं। स्तर 2 में जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम या मेडिकल कॉलेजों के विशेषज्ञ भौतिक या ऑडियो विजुअल परामर्श देते हैं। हेल्पलाइन नंबर 14416 या 18008914416 कई भाषाओं में संवाद की सुविधा देता है। वर्तमान में 34 राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों में 46 टेलीमानस सेल संचालित हैं।

पिछले 3-5 साल में दाे से तीन गुना बढ़े रोगी डिजिटल युग में जीवन में बहुत तेजी से बदलाव आ रहे हैं, जिनसे सामंजस्य बैठाना एक चुनौती है। इस चुनौती और पारिवारिक रिश्तों में कमी के कारण तनाव और भावनात्मक अकेलापन बढ़ रहा है। पिछले 3 से 5 वर्षों में मानसिक रोगियों की संख्या दो से तीन गुना हो गई है। टेलीमानस पर बढ़ती कॉल्स भी यही दर्शा रही है। दूरस्थ स्थानों पर अभी मनोचिकित्सकों का अभाव बना हुआ है, जिसके चलते मानसिक रोगी इलाज लेने या तो देर से पहुंचते हैं या इलाज से वंचित ही रह जाते हैं। अधिकतर मानसिक रोगों की शुरुआत 15 से 25 वर्ष की उम्र में हो जाती है। इस उम्र का युवा देश के लिए अच्छा मानव संसाधान होता है, इसलिए मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। भास्कर एक्सपर्ट|डॉ. विनोद दड़िया, अध्यक्ष, इंडियन साइकेट्रिक सोसायटी, राजस्थान



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