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बारां जिले के शाहाबाद, नाहरगढ़ और केलवाड़ा के वन क्षेत्रों में खैर के पेड़ों की अवैध कटाई व तस्करी बड़े पैमाने पर हो रही है। तस्करों ने 1 लाख 9 हजार 678 हैक्टेयर वन क्षेत्र में अलग-अलग जगहों पर खैर के पेड़ों की तस्करी के लिए अस्थायी डिपो बना रखे हैं।

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केलवाड़ा के 32215 हैक्टेयर क्षेत्र में भी तस्कर खुलेआम पेड़ काट रहे हैं। पिछले पांच साल में इन इलाकों से 70 हजार से ज्यादा खैर के पेड़ काट डाले गए। कहीं ताजे कटे, छाल उतरे खैर के तने खुले में ढेरों में पड़े हैं तो कहीं 3 से 5 फीट लंबे साबुत गिल्टे झाड़ियों के पीछे छिपाए गए हैं।

इन लकड़ियों के गडरों को दिन में जंगल के भीतर जमा किया जाता है और रात के अंधेरे में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों व ट्रकों में भरकर बाहर भेजा जा रहा है। माल एमपी से लेकर नोएडा और दिल्ली तक भेजा जाता है। झालावाड़, टोंक, बारां के तस्कर ज्यादा सक्रिय हैं। इस बारे में वन विभाग कोटा के सीसीएफ सोनल जीरिहार ने कहा कि अवैध रूप से खैर कटान की जांच चल रही है, जिसकी स्थिति रिपोर्ट आने के बाद सामने आएगी। गौरतलब है कि बाजार में अभी खैर का भाव 6 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक है। 8 इंच से 1 फीट मोटी लकड़ी 1800-2000 प्रति क्विंटल जंगल में बिकती है।

भास्कर एक्सपर्ट – राम सैन, सेवानिवृत्त फोरेस्टर

खैर काटने की मंजूरी देने का सिस्टम मजबूत बनाया जाए

खैर की लकड़ी कत्था बनाने के काम में आती है। 80 के दशक में शाहाबाद में कत्था सोसायटियां हुआ करती थीं। तब व्यापार मंडल लकड़ी कटवाने से पहले फॉरेस्ट विभाग से सर्वे करवाता था। खैर की लकड़ी को पहले छीला जाता है, फिर उबाला जाता है। गाढ़ा होने पर हांडी में जमाया जाता है। फिर सुखाकर उसकी चौकी काटी जाती है और बिक्री की जाती है।

कम से कम 15 टन माल भरवाना पड़ेगा भास्कर: हमारे पास दो गाड़ी खैर है। तस्कर: माल के फोटो डालो। भास्कर: माल देख लो। रेट क्या है? तस्कर: छिला है या बिना छिला। माल के फोटो डालो। भास्कर: यहीं है 2 गाड़ी माल। तस्कर : कितना माल है, एक जगह जमा कर लो। भास्कर: आपको देवरी आना होगा। तस्कर: ठीक है, वहां पानी तो भरा नहीं है न… ये राजस्थान है या एमपी ? आप शाहाबाद के ही हो न ? भास्कर: रेट क्या? पेमेंट कैसे? साइट से उठा लोगे क्या? तस्कर: 1500 रु./क्विंटल। लेकिन पहले माल पसंद करेंगे। (ऑडियो क्लिप भास्कर के पास उपलब्ध)

ठूंठ गवाह – 1.09 लाख हैक्टेयर वन क्षेत्र में तस्कर सक्रिय

“वन विभाग के अफसरों की मिलीभगत से ही तस्कर खैर काटकर बेच रहे हैं। हमने एक फॉरेस्टर को एपीओ कराया था। पहले शाहाबाद में ही कट रहे थे, अब तस्करों ने नाहरगढ़ में भी पैर पसार लिए हैं।” -ललित मीणा, भाजपा विधायक



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