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दुर्घटनाओं से बचने के लिए बारिश से पहले जो तैयारी की जानी थी, वह इस बार नहीं की गई। नतीजा यह रहा कि प्रदेश में मासूम बच्चों पर झालावाड़ में स्कूल की छत गिर गई। 7 बच्चे मर गए। अब स्वायत्त शासन विभाग ने बारिश शुरू होने के एक माह बाद जर्जर भवनों को चिह्

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सचिव ने सूची बनाकर गिराने के आदेश भी दिए हैं। इसके तहत 19 शहरों में करीब 3 हजार पुरानी हवेलियां, मकान गिराए जाएंगे। सूची तैयार है लेकिन प्रभावशाली नेताओं वाले शहरों के आंकड़े छिपाए जा रहे हैं। 2966 मकानों की सूची लगभग फाइनल है। इनमें सबसे अधिक 158 मकान जयपुर के परकोटे में टूटेंगे।

गौरतलब है कि पिछले सप्ताह झालावाड़ के मनोहरथाना के पिपलोदी में 7 बच्चे स्कूल की छत के नीचे दबकर मर गए थे। उसके बाद प्रदेश की 2256 स्कूलों को तोड़ने की कार्यवाही के आदेश दिए गए हैं। अब स्वायत्त शासन विभाग ने 3 हजार मकान गिराने का निर्णय किया है। 100 साल और इससे पुरानी बिल्डिंग सबसे पहले गिराई जाएंगी। हालांकि, अभी मंत्री की अप्रूवल बाकी है।

100 साल या इससे अधिक पुराने भवनों को सबसे पहले गिराया जाएगा

जयपुर हेरिटेज निगम क्षेत्र: 158 पुरानी हवेलियां और जर्जर आवास उदयपुर: 108 पुराने स्कूल सहित 132 भवन बीकानेर: 150 जर्जर मकान चिह्नित, 5 गिराए, 350 सरकारी स्कूल जर्जर जोधपुर: 134 मकान जर्जर, मानसून में मंडराया बड़ा खतरा कोटा: 125 मकान बेहद जर्जर अजमेर: दरगाह के हुजरे लगातार गिर रहे, 8 मकान गिरे, 100 से अधिक जर्जर बता रहे, सूची तैयार नहीं अचरोल: रिहायशी इलाकों में 24 से अधिक जर्जर भवन जैसलमेर: 12 से अधिक मकान जर्जर हालत में भरतपुर: 50 से 60 मकानों पर लगाए लाल निशान पाली: करीब 42 मकान जर्जर चित्तौड़गढ़: क्षतिग्रस्त 34 स्कूल भवन चिह्नित, 4 को तत्काल डिस्मेंटल की जरूरत भीलवाड़ा: 15 मकान जर्जर, 30 स्कूल भवन भी चिन्हित धौलपुर: 14 मकान गिराए जा चुके, बाकी पर निशान लगेंगे सीकर: 41 स्कूल भवन और करीब 20 आवास जर्जर झुंझुनूं: टीमें गठित। मंडावा, झुंझुनूं में 26-26, अलसीसर में 33, बुहाना में 24, चिड़ावा, पिलानी व सिंघाना में 25-25, उदयपुरवाटी व खेतड़ी में 45, नवलगढ़ में 47 ग्राम पंचायतों व शहरी निकायों में जर्जर भवनों का निरीक्षण करेंगे।

राजधानी में अब कमेटी करेगी भवनों की पहचान नगर निगम हेरिटेज की कमिश्नर निधि पटेल ने बारिश के चलते होने वाले हादसों को रोकने के लिए कमेटी गठित करने का आदेश दिया है। निगम ने बारिश शुरू होने के 1 माह बाद 29 जुलाई को एक कमेटी बनाकर औपचारिकता भी पूरी कर दी। यह जर्जर भवनों की पहचान करेगी। इस कमेटी का उद्देश्य परकोटे में आने वाले जर्जर व असुरक्षित भवनों को चिह्नित करना है।

ज्यादा जरूरत जागरूकता की “जर्जर मकान चिह्नित किए जा रहे हैं। वैसे जर्जर मकानों के वास्तविक आंकड़े नगर निगमों के पास ही हैं। जर्जर आवासों को लेकर जागरूकता की जरूरत ज्यादा है।” -रवि जैन, सचिव, स्वायत्त शासन विभाग



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