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राजस्थान में इस मानसून के इस सीजन में जमकर बरसात हो रही है। पूरे देश की बात करें तो एक जून से 31 जुलाई तक लद्दाख के बाद राजस्थान दूसरा राज्य है।

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जहां सबसे ज्यादा औसत बरसात हुई है। वहीं, तीसरे नंबर पर मध्य प्रदेश, चौथे पर झारखंड और पांचवें पर हरियाणा का नंबर आ रहा है।

जुलाई में राजस्थान में हुई जबरदस्त बरसात ने यहां के 33 में से 18 जिलों (हनुमानगढ़ में भी लगभग) में पूरे मानसून सीजन की बारिश का कोटा पूरा हो गया।

इसमें अजमेर संभाग के सभी जिले शामिल हैं। वहीं, कोटा, भरतपुर, जयपुर और बीकानेर संभाग के भी अधिकांश जिले हैं। मौसम केन्द्र से जारी फोरकास्ट में इस बार अगस्त माह में बारिश औसत होने का अनुमान जताया है।

बारां जिले में सबसे ज्यादा बरसात

राजस्थान में जिलेवार स्थिति देखें तो सबसे ज्यादा बारिश बारां जिले में हुई है, यहां पूरे मानसून सीजन की औसत बारिश से भी 32 फीसदी ज्यादा पानी बरस चुका है।

बारां जिले में जून से सितंबर तक 832MM औसत बरसात होती है, जबकि इस सीजन में अब तक कुल 1101.6MM बरसात हो चुकी है।

18 जिलों में मानसून की बारिश का कोटा पूरा

गंगानगर, पाली, नागौर, हनुमानगढ़, चूरू, टोंक, सीकर, सवाई माधोपुर, कोटा, करौली, झुंझुनूं, जयपुर, धौलपुर, दौसा, बूंदी, भीलवाड़ा, बारां, अजमेर।

ये कारण रहा अच्छी बारिश का

मौसम केन्द्र जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया- दक्षिण-पश्चिम मानसून इस बार समय से पहले देश और राज्य में प्रवेश किया। प्रवेश के बाद से अब तक मानसून लगातार एक्टिव फेज में रहा।

मानसून ट्रफ भी अपने कोर-जोन में ही एक्टिव रही। मानसून के लगातार एक्टिव होने का ही नतीजा है कि मानसून का जो कोर-जोन है जिसमें झारखंड, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा और छत्तीसगढ़ के साथ-साथ राजस्थान का हिस्सा आता है।

लम्बे समय बाद ऐसा देखने को मिला है, जब जुलाई माह में मानसून का एक भी ब्रेक स्पेल नहीं आया। मानसून ट्रफ अपनी नॉर्मल पोजिशन पर रही, जिसके कारण राजस्थान, मध्य प्रदेश समेत कोर जोन राज्यों में अच्छी बारिश हुई। अगर मानसून ट्रफ उत्तर की तरफ शिफ्ट होती है तो उससे पहाड़ी राज्यों में भारी बारिश होती है।

37 फीसदी बांध ओवरफ्लो

मानसून के इस सीजन में अच्छी बरसात से कई बांध छलक गए। बीसलपुर, कोटा बैराज, राणा प्रताप सागर, कालीसिंध, जवाहर सागर, पार्वती, पांचना समेत कई बांधों के गेट खोलकर लगातार पानी छोड़ा गया।

इसके अलावा कई एनीकट और छोटे बांध ओवर-फ्लो होकर बहने लगे है। इस सीजन में अब तक 693 में से 260 बांध (37.51 फीसदी) फुल हो गए है। जबकि 297 बांध ऐसे है जो आंशिक तौर पर भरे है। वहीं 136 बांध अब भी ऐसे है जहां बिल्कुल पानी नहीं आया है।

अब आगे क्या?

मौसम केन्द्र जयपुर ने निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया- इस बार अगस्त में दक्षिण और दक्षिण-पश्चिमी राजस्थान में सामान्य से कम, जबकि शेष राजस्थान में सामान्य से अधिक बरसात होने का अनुमान जताया है।

पूरी स्थिति देखें तो राज्य में अगस्त माह में औसत बरसात होने का अनुमान है। ज्यादातर बारिश कोटा, जयपुर, अजमेर और भरतपुर संभाग में होने की संभावना है।

जबकि बीकानेर संभाग में औसत से ज्यादा बरसात होने की संभावना है। उदयपुर, जोधपुर संभाग में एरिया में अगस्त में औसत से कम बारिश का अनुमान जताया है।

राजस्थान में जुलाई में ऐसे रहे हालात…

अजमेर के पुष्कर शहर का अधिकतर हिस्सा पानी में डूब गया था। यहां सिविल डिफेंस की टीमें इंसानों के साथ जानवरों को भी बचाया।

अजमेर के पुष्कर शहर का अधिकतर हिस्सा पानी में डूब गया था। यहां सिविल डिफेंस की टीमें इंसानों के साथ जानवरों को भी बचाया।

कोटपूतली के नारेहड़ा गांव में बारिश के बाद जलभराव हो गया था। यहां घुटनों तक भरे पानी के बीच से बच्चों को पीठ पर बैठाकर स्कूल पहुंचाया गया था।

कोटपूतली के नारेहड़ा गांव में बारिश के बाद जलभराव हो गया था। यहां घुटनों तक भरे पानी के बीच से बच्चों को पीठ पर बैठाकर स्कूल पहुंचाया गया था।

सीकर के फतेहपुर में छतरिया बस स्टैंड इलाके में बारिश के चलते भरे पानी में लोगों ने नाव चलाई गई थी।

सीकर के फतेहपुर में छतरिया बस स्टैंड इलाके में बारिश के चलते भरे पानी में लोगों ने नाव चलाई गई थी।



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