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पुलिस भले ही बड़े से बड़े केस का खुलासा कर दे और बड़े से बड़े अपराधी को चंद सेकंड में ढूंढ लाए। लेकिन पूरी पुलिस फोर्स भी जुट जाए तो उसे अपनी ही तीन चौकियां नहीं मिलेंगी। ये चौकियां कहीं हैं ही नहीं। इनके साथ ही सुखेर चौकी ऐसी है, जहां बिल्डिंग तो दिखेगी

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खास बात है कि इन चौकियों में 5 से 9 तक की नफरी स्वीकृत है। एक से तीन पुलिसकर्मियों की तैनातगी भी दिखा रखी है। तबादले भी हो रहे हैं। इसी साल अप्रैल में एक एएसआई का तबादला कर सुखेर चौकी में लगाया गया है। भास्कर ने शहर के 12 थाना के अधीन बनी 25 चौकियों की पड़ताल की तो यह चौंकाने वाले हालात सामने आए। जनाना (एमबी) हॉस्पिटल चौकी, इमरजेंसी चौकी और सूरजपोल गेट चौकी की कहीं कोई बिल्डिंग नहीं है। ऐसे ही सुखेर चौकी की बिल्डिंग तो है, लेकिन इतनी जर्जर ही कि वहां पुलिसकर्मी बैठ ही नहीं सकते और बैठते भी नहीं हैं।

चारों चौकियों के अधीन क्षेत्रों में करीब 60 हजार लोगों की आबादी है। मौके पर चौकियां नहीं होने से घटना-दुर्घटना, छोटे-मोटे विवाद सहित अन्य अपराध होने पर लोगों को थाने जाना पड़ रहा है। अब सवाल ये भी है कि जब चौकी ही नहीं है तो इनमें नियुक्त पुलिसकर्मी कहां ड्यूटी दे रहे हैं तो बता दें कि ये सभी थानों में अपना कर्तव्य निभा रहे हैं। पुलिस चौकी से थाने पर काम का भार कम हो जाता है। क्षेत्र में अपराध की निगरानी करने में आसानी रहती है।

  • अंबामाता थाना : फतहपुरा, सज्जनगढ़ चौकी।
  • बड़गांव : मदार।
  • भूपालपुरा : आयड़, भूपालपुरा, कलेक्ट्री, कोर्ट।
  • धानमंडी : बोहरवाड़ी।
  • घंटाघर : जगदीश चौक, हरवेन जी का खुर्रा।
  • हाथीपोल : एमबी, जनाना (बिल्डिंग नहीं), इमरजेंसी (बिल्डिंग नहीं), मधुबन, हाथीपोल गेट।
  • हिरणमगरी : रीको कलड़वास, उमरड़ा।
  • प्रतापनगर : मादड़ी, देबारी, कालका माता रोड।
  • सूरजपोल : किशनपोल, रंगनिवास, बस स्टैंड, सूरजपोल गेट (बिल्डिंग नहीं)
  • सुखेर : इंडस्ट्रियल एरिया (बिल्डिंग जर्जर, न के बराबर)।
  • सवीना : कोई चौकी नहीं।
  • गोवर्धन विलास : कोई चौकी नहीं।

जनाना हॉस्पिटल चौकी : यह चौकी कहीं वजूद में नहीं, 9 पद मंजूर, एक तैनात है हाथीपोल थाने की इस चौकी पर एएसआई, 8 कांस्टेबल मंजूर हैं। एक एएसआई नियुक्त है। चौकी की कहीं कोई बिल्डिंग नहीं है। पहले हुआ करती थी, एमबी अस्पताल ने वापस ले लिया। हॉस्पिटल में कोरोना वार्ड के पीछे एक चौकी अलग है। जनाना चौकी का पुलिसकर्मी एमबी चौकी या थाने में ड्यूटी देते हैं।

  • चौकी होती तो…इसके अधीन जनाना अस्पताल आता है। हर माह औसतन 4 हजार महिलाएं पहुंचती हैं। महिलाओं और उनके परिजनों के साथ होने वाली चोरी जैसी वारदातें थमती। वर्ष 2018 से अब तक बच्चा चोरी की 3 घटनाएं हो चुकी हैं।

इमरजेंसी चौकी : कहीं भी बिल्डिंग नहीं, कागजों में चल रही, एक एएसआई तैनात हाथीपोल थाने के अधीन यह चौकी एमबी में इमरजेंसी के सामने कागजों में चल रही है। कहीं कोई बिल्डिंग नहीं है। एक एएसआई, 8 कांस्टेबल के पद स्वीकृत हैं। एक एएसआई की तैनाती है। ये थाने या एमबी चौकी में ड्यूटी देते हैं। एमबी अस्पताल चौकी पर एएसआई, दो कांस्टेबल अलग से तैनात हैं।

  • चौकी होती तो…एमबी हॉस्पिटल में उदयपुर सहित आसपास के जिलों से रोज 4-5 हजार मरीज व परिजन आते हैं। बाइक-पर्स-मोबाइल चोरी की वारदातें होती रहती हैं। एमबी में एक चौकी है, लेकिन अगर यह भी होती तो काम का दबाव घटता।

सूरजपोल गेट चौकी : 4 साल पहले भवन छिना, तब से इसे कागजों में चलाया जा रहा

  • चौकी होती तो…बापू बाजार, टाउन हॉल मार्ग, देहलीगेट, सूरजपोल और खटीकवाड़ा तक निगरानी रहती। इस एरिया की आबादी करीब 30 हजार है। इस क्षेत्र में घूमने वाले पर्यटकों को भी लपकों आदि से राहत मिलती।

सूरजपोल थाने के अधीन इस चौकी पर एक एएसआई और 4 कांस्टेबल के पद स्वीकृत हैं। अभी एक एएसआई की तैनातगी दिखा रखी है। 2021 से पहले तक गेट के भवन में चलती थी। चार साल पहले पुरातत्व विभाग ने गेट को हेरिटेज बना दिया था और अपने अधीन ले लिया।

सुखेर चौकी : आठ पद, दो तैनात, इसके भवन में शराबियों का अड्‌डा और कबाड़

  • चौकी होती तो…सुखेर से अंबेरी के बीच के सुखेर गांव, भैरवगढ़ रोड और इंडस्ट्रियल एरिया तक का हिस्सा इसके अधीन आता है। यहां की आबादी करीब 10 हजार है। अगर यह चौकी होती तो पूरे एरिये पर निगरानी रहती।

सुखेर थाने की इस चौकी पर एक-एक एएसआई, हेडकांस्टेबल, 6 कांस्टेबल स्वीकृत हैं। एक एएसआई, कांस्टेबल की तैनातगी है। दोनों थाने में ड्यूटी देते हैं। 4 कमरे, हवालात, हॉल व बाथरूम हैं, लेकिन सब खंडहर। शराबियों का अड्‌डा है। परिसर में कबाड़ भरा है।

ये बोले अफसर – एएसपी सिटी उमेश ओझा ने कहा कि पुलिस फोर्स की कमी है। ऐसे में चौकियों पर पुलिसकर्मी तैनात नहीं हैं। सूरजपोल चौकी के लिए पुरातत्व विभाग से आधा हिस्सा लेंगे। सुखेर व हॉस्पिटल की चौकी को भी जल्द शुरू किया जाएगा।



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