सरकारी सिस्टम में सेंध लगा आमजन की जान जोखिम में डालने वाले बिजली चोरों से बिजली निगम ने सिर्फ जुर्माना वसूलकर समझौता कर लिया। खतरनाक तरीके से बिजली चुराने वाले 13 हजार से ज्यादा लोगों को सजा के नाम पर सिर्फ जुर्माना देना पड़ा। जबकि बिजली चोरों ने जो
भास्कर ने राजधानी जयपुर- कोचिंग सिटी कोटा सहित प्रदेश के 15 जिलों में पड़ताल की तो पता चला कि बिजली चोरी अधिनियम की धारा 135 के तहत 14 हजार 892 मामले दर्ज किए गए। लेकिन बिजली चोरों पर 48.98 करोड़ का जुर्माना लगाकर फाइल ही बंद कर दी गई।
हैरानी की बात ये है कि वसूली भी करीब 17 करोड़ की ही हो पाई और एफआईआर भी सिर्फ 1511 जनों पर ही दर्ज करवाई गई। जयपुर, भिवाड़ी-अलवर, भरतपुर, कोटपुतली व धौलपुर में सबसे ज्यादा चोरी के मामलों में समझौते हो गए। दरअसल, ये मामलों दो धाराओं में दर्ज होते हैं। बिजली चोरी करने वालों पर धारा 135 और मीटर व अन्य तरीके से बिजली चुराने वालों पर धारा 138 के तहत कार्रवाई होती है। सीधे लाइनों व ट्रांसफार्मर से गंभीर अपराध वाला बच जाता है कि उसने पहली बार चोरी की है।

मीटर जलाने, अवैध लाइन डाल जान-माल से खिलवाड़ करने वालों को जुर्माना देकर बचने का अवसर क्यों?
केस 1. मीटर से पैरेरल अवैध लाइन डाल ली – लाडपुरा में उपभोक्ता खाता संख्या 24710114 के यहां विजिलेंस टीम ने जांच कर बिजली चोरी पकड़ी। इस पर धारा 135 में केस दर्ज किया गया। उपभोक्ता पर 3.08 लाख का जुर्माना लगाया गया। यहां विद्युत पोल से पैरेरल दूसरी अवैध लाइन डाल रखी थी।
केस 2. मीटर ही जला दिया…सीधे बिजली उपभोग – उपभोक्ता खाता संख्या 07360050 के यहां सुल्तानुपर में 14 मई 2025 को विद्युत चोरी पकड़ी गई। मीटर को जला दिया और बिजली उपभोग की जा रही थी। इस पर धारा 135 में केस दर्ज कर करीब 1.34 लाख रुपए जुर्माना लगाया गया।
केस 3. अवैध लाइन से बिजली चोरी – मानपुरा रुरल में धारा 135 के तहत बिजली चोरी पकड़ी गई। उपभोक्ता संख्या 21010227 पर करीब 1.09 लाख का जुर्माना लगया गया। यहां भी कनेक्शन के अलावा मीटर से एक दूसरी अवैध् लाइन खींचकर बिजली चोरी की जा रही थी।
सीधी बात- हीरालाल नागर, ऊर्जा मंत्री- सुधार के लिए केंद्र को लिखेंगे
Q. सीधे लाइनों से बिजली चुराने वाले केवल जुर्माना देने से कैसे बच जाते हैं, जबकि वे न चोरी की बल्कि आमजन की जान से खिलवाड़ कर रहे है, ये कैसे नियम है? ऊर्जामंत्री – वाकई में आपका प्वाइंट ऑफ व्यू सही है। पर इस एक्ट में समझौते का प्रावधान है।
Q. अगर ये एक्ट की खामी है और इसमें सुधार के लिए राज्य की ओर से केंद्र को क्यों नहीं लिखते? ऊर्जामंत्री – इस संबंध में हम राज्य के उच्चाधिकारियों से विचार-विमर्श कर एक सुझाव बनाएंगे और केंद्र को भेजेंगे। क्योंकि एक्ट में बदलाव केंद्र से ही होगा।
इस एक्ट की सबसे बड़ी खामी….. बिजली चोरी का आरोपी जुर्माना राशि जमा करवाकर सजा से बच जाता है
धारा 135- बिजली चोरी पर अधिनियम की धारा 135 के तहत कार्रवाई तय की जाती है। यह बिजली लोड 10 किलोवाट से कम या अधिक पर निर्भर करती है। जितनी चोरी की उससे तीन गुणा जुर्माना लगता है।
कमजोरी – इस एक्ट की सबसे बड़ी खामी ये है कि बिजली चोरी करने वाले पर केस दर्ज होते ही धारा 152 के तहत विभाग एक नोटिस जारी करता है। सात दिन में आरोपी को जुर्माने की करीब 10 फीसदी राशि जमा करानी पड़ती है। एक माह में बची हुई प्रशमन राशि जमा कराते ही समझौता और आरोपी बच जाता है। अफसर भी सजा की बजाय जुर्माना वसूलने पर ध्यान देते हैं।
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