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राजस्थान में सरकार ने हाल ही में 9 दिन के भीतर 12 आईपीएस अफसरों के ट्रांसफर और पोस्टिंग की। एक आईपीएस का तीन दिन में ही दो बार तबादला कर दिया गया।

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हाल ही में, मुख्यमंत्री ने जोधपुर में आईपीएस अमित जैन को एपीओ करने के आदेश जारी कर साफ संकेत दे दिया है कि कोई भी अफसर यदि सरकार की छवि और कामकाज में बाधक बनेगा तो उस पर कार्रवाई होगी।

शासन सचिवालय में चर्चा है कि पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव से पहले अफसरों को मथने का दौर शुरू हो गया है। ऐसे में आगामी दिनों में पुलिस महकमे में और भी बड़े बदलाव किए जा सकते हैं। डीजी रैंक पर प्रमोट हुए अफसरों को नई जिम्मेदारी मिल सकती है। पढ़िए मंडे स्पेशल स्टोरी

इसलिए एपीओ हुए आईपीएस अमित जैन?

4 सितंबर को जोधपुर दौरे पर आए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को एयरपोर्ट पर ही डीसीपी (ईस्ट) अमित जैन की शिकायत मिली। सीएम ने एक्शन लेते हुए जैन को हटाने के आदेश दे दिए। जानकारी के मुताबिक जेडीए की तरफ से जोधपुर में राष्ट्रीय व प्रदेश स्तर के नेताओं, मंत्रियों के मौजूद होने और मुख्यमंत्री के आने से पहले स्थिति को संभालने को कहा, लेकिन डीसीपी ने उन्हें कोई तवज्जो नहीं दी और न ही प्रदर्शनकारियों को हटाने में कोई गंभीरता दिखाई।

इसके अलावा जोधपुर आईआईटी के डायरेक्टर और एसोसिएट प्रोफेसर के बीच हुई मारपीट के मामले में भी एफआईआर दर्ज करने में करीब 8 घंटे की देरी हुई थी। इसकी शिकायत भी सीएम तक पहुंची थी। इसके अलावा भी अन्य कारण एपीओ करने के बताए जा रहे हैं।

19 जुलाई को जारी तबादला सूची में IPS अमित जैन को जोधपुर में डीसीपी पूर्व लगाया गया था। उन्होंने 23 जुलाई को कार्यभार ग्रहण किया था। लेकिन 44 दिन बाद ही उन्हें एपीओ कर दिया गया। आईपीएस जैन का 7 माह में तीन बार तबादला हो चुका है।

24 अगस्त को सरकार ने 10 आईपीएस की तबादला पोस्टिंग की

जुलाई में कार्मिक विभाग ने कुल 91 आईपीएस अफसरों के ट्रांसफर किए थे। इसके बाद 24 अगस्त को एक बार फिर 10 आईपीएस की लिस्ट तबादला/पोस्टिंग आई। इस लिस्ट में 6 ट्रेनी आईपीएस अफसरों को डिप्टी एसपी बनाया गया। 4 ट्रेनी डिप्टी एसपी का प्रमोशन करके एडिशनल एसपी के पद पर जिम्मेदारी दी गई। इसके एक सप्ताह बाद ही 2 सितंबर को 2 पुलिस अधिकारियों को फिर इधर-उधर कर दिया गया।

2 सितंबर को दिल्ली में प्रतिनियुक्ति पर गए आरएसी कमांडेंट आदर्श सिद्दू को एसपी पाली लगाया गया। वहीं, आईपीएस केवलराम राव को पुलिस अधीक्षक सीआईडी मानवाधिकार से आरएसी बटालियन नई दिल्ली में लगाया गया।

अफसरों के ट्रांसफर की 3 वजहें

1. छवि की चिंता : एक्सपर्ट का कहना है कि सरकार को छवि की चिंता है। क्योंकि ऐसा माना जा रहा है कि दिसंबर के अंत तक प्रदेश में पंचायत और स्थानीय होने है। ऐसे में सरकार को अपनी छवि की चिंता है। इसलिए सरकार ने गांव चलो अभियान और शहर चलो अभियान शुरू करने जा रही है। जानकारों का कहना है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा अफसरों की कार्यशैली को लेकर चिंतित हैं।

2. भ्रष्टाचार के आरोप : सियासी जानकारों का कहना है कि जिन अफसरों पर जरा भी आरोप लग रहा है, उन्हें साइड लाइन करने में देरी नहीं की जा रही है। यही वजह है कि दो आईएएस अफसरों को चार्जशीट थमा दी। वहीं, एक रिटायर्ड आईएएस की पेंशन रोकने का निर्णय लिया है। साफ संकेत, मुख्यमंत्री जवाबदेही और पारदर्शी प्रशासन चाहते है।

3. कानून व्यवस्था : जानकारों का कहना है कि राजस्थान में सत्ता बदलने के बाद भी दुष्कर्म की घटनाओं पर रोक नहीं लग पा रही है। थाना-तहसील से लेकर शासन तक जनता और जनप्रतिनिधियों की सुनवाई नहीं होने की शिकायत आम है। कांग्रेस द्वारा करप्शन के आरोप लगाए जा रहे है। इससे सरकार की छवि खराब हो रही है।

राजस्थान में कई बड़े पद खाली, इसलिए नई लिस्ट की संभावना

जानकारों का कहना है कि भले ही सरकार ने अपनी छवि के लिए अधिकारियों को इधर-उधर कर दिया हो। लेकिन टॉप 2 रैंक के अधिकारियों के पद अभी भी खाली हैं। डीजी और एडीजी रैंक के अधिकारियों की लिस्ट एसीबी और जयपुर पुलिस कमिश्नर के नाम को लेकर अटकी हुई है।

सूत्रों के मुताबिक खाली पड़े बड़े पद भरने के लिए जल्द आईपीएस अफसरों की तबादला सूची आ सकती है। तबादला सूची में सबसे अहम पद जो भरा जाना है वह डीजी एसीबी का है। रवि प्रकाश मेहरड़ा के सेवानिवृत्त होने के बाद 1 जुलाई से यह पद खाली है। एडीजी स्मिता श्रीवास्तव कार्यवाहक डीजी हैं।

जिस तरह वरिष्ठ आईपीएस राजीव शर्मा को दिल्ली से लाकर डीजीपी बनाया है, उस तरह एसीबी के लिए डीजी इंटेलिजेंस संजय अग्रवाल का नाम चल रहा है। उनकी पोस्टिंग यथावत रखने की स्थिति में यहां गोविंद गुप्ता या अन्य का नंबर आ सकता है। इनमें आनंद श्रीवास्तव, अशोक राठौड़ व मालिनी अग्रवाल के नाम भी शामिल हैं।

चार डीजी को मिलेगी पोस्टिंग

सीनियर मोस्ट ऑफिसर्स की लिस्ट में शामिल होने के बाद भी चार डीजी को पोस्टिंग का इंतजार है। वे उसी पद का जिम्मा निभा रहे हैं, जहां प्रमोशन से पहले से बैठे हैं। अनिल पालीवाल अप्रैल, आनंद श्रीवास्तव एक जून तथा अशोक राठौड़ व मालिनी अग्रवाल 1 जुलाई को डीजी बने थे। इनमें से किसी को भी नया पद नहीं मिला।

जयपुर पुलिस आयुक्त का नाम भी होगा तय

सूत्रों के मुताबिक तबादला लिस्ट में जयपुर पुलिस कमिश्नर का भी नाम होगा। एडीजी विशाल बंसल, वीके सिंह, दिनेश एमएन का नाम चर्चा में है। चर्चा भी है कि जिस तरह पहले यहां एडीजी स्तर के अधिकारी को लगाया तो अब डीजी स्तर के अधिकारी को भी यह जिम्मेदारी दी जा सकती है।

वहीं, प्रदेश में दो दर्जन से अधिक आईएएस अतिरिक्त प्रभार के बोझ तले तबे है। सामान्य प्रशासन के सचिव जोगाराम के पास 4 विभागों का प्रभार है। वहीं, कई आईएएए अफसर सेवानिवृत्त हो गए है। विभागीय जांच आयुक्त रामावतार मीणा अगस्त में रिटायर हो गए है। वहीं, आरएएस से आईएएस बने अफसरों को अपनी नई पोस्टिंग का इंतजार है। ऐसे में आगामी दिनों में और बदलाव हो सकते है।



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