बाबा भर्तृहरि के मेले में मंदिर परिसर में ही हजारों श्रद्धालु।
अलवर में भर्तृहरि बाबा के लक्खी मेले के पहले दिन शुक्रवार को करीब 1 लाख श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे, जिनमें महिलाओं की संख्या पुरुषों से लगभग दोगुनी थी। नाचते-गाते और भर्तृहरि के जयकारे लगाते हुए श्रद्धालु भक्ति के रंग में डूबे नजर आए। हजारों भक्त
अलवर के अकबरपुर से लेकर भर्तृहरि तक अनेक स्थानों पर भंडारे और प्याऊ लगाए गए हैं, जहां श्रद्धालुओं के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था की गई है। कुशालगढ़ से आगे जगह-जगह भंडारे लगे हुए हैं।
कुशालगढ़ और भर्तृहरि गेट के बीच वाहनों के लिए पार्किंग की व्यवस्था की गई है, जिसके चलते भक्तों को करीब 6 से 7 किलोमीटर पैदल चलना पड़ रहा है। इसी तरह जयपुर की तरफ से आने वाले श्रद्धालुओं के वाहनों के लिए सरिस्का के पास पार्किंग बनाई गई है। दोनों तरफ से भर्तृहरि बाबा के दर्शन के लिए आने वाले भक्तों की भारी भीड़ है।

मंदिर परिसर में दुकानें लगी हैं। हर दुकान पर खरीददारी करने वाले भक्तों की भीड़ है।
अलवर में लक्खी मेला: 3 खास बातें…
1. पार्किंग से भर्तृहरि तक पैदल यात्रा, 6 किलोमीटर लंबी लाइन अलवर से भर्तृहरि मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए कुशालगढ़ और भर्तृहरि गेट के बीच पार्किंग की व्यवस्था की गई है। कार और बस के बाद दुपहिया वाहनों की पार्किंग है। यहां से भर्तृहरि तक पैदल जाना पड़ता है।
पार्किंग से भर्तृहरि गेट लगभग 3 किलोमीटर है और इतनी ही दूरी गेट से भर्तृहरि स्थल की है। इस 6 किलोमीटर की दूरी में भक्तों की लंबी लाइन लगी हुई है।
मेले में अलवर, कोटपूतली, शाहपुरा, बहरोड़, खैरथल, जयपुर सहित अनेक जगहों से भक्त पहुंचे हैं। बसों की पार्किंग भी काफी दूर होने से यात्रियों को परेशानी हो रही है।
2. मेले में हर जरूरत का सामान उपलब्ध भर्तृहरि मेले में गांवों में घरों की हर जरूरत की चीजें मिलती हैं। यहां सुई से लेकर रई, चाकू, चूल्हे, बेलन, तवा, चिमटा, खिलौने, कॉस्मेटिक और अन्य जरूरी सामान उपलब्ध हैं। गांव के लोग यहां से लाठियां खरीदते हैं और जमकर खरीदारी करते हैं।
3. मंदिर में प्रसाद चढ़ाने के लिए भक्तों की भीड़ मंदिर परिसर में भक्तों द्वारा प्रसाद चढ़ाने के लिए 10 से अधिक लोग लगे हुए है। भीड़ इतनी अधिक थी कि एक बार में 100 लोग प्रसादी चढ़ाने पहुंच रहे थे, जिन्हें संभालने के लिए कई युवकों को लगाना पड़ा। भक्त दूध, दही और घी का भोग लगाने आए। कई पशुपालक तो सवा किलो घी चढ़ाने आए। गांव से आने वाले लोग घी, दूध और दही का भोग लगाते हैं, जो सालों से चली आ रही परंपरा है।
मेले से जुड़ी PHOTOS….

कई पशुपालक तो सवा किलो घी चढ़ाने आए। गांव से आने वाले लोग घी, दूध और दही का भोग लगाते हैं, जो सालों से चली आ रही परंपरा है।

मेले में करीब 3 बजे तेज बारिश आई तो भर्तृहरि बाबा के स्थान के पीछे तेजी से पहाड़ों का पानी आ गया। वैसे इस जगह हमेशा पानी आता रहता है।

शुक्रवार को करीब 1 लाख श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे, जिनमें महिलाओं की संख्या पुरुषों से लगभग दोगुनी थी।

अलवर में भर्तृहरि बाबा के लक्खी मेले के पहले दिन है। करीब 1 लाख श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे।

नाचते-गाते और भर्तृहरि के जयकारे लगाते हुए श्रद्धालु भक्ति के रंग में डूबे नजर आए।

पार्किंग से भर्तृहरि गेट लगभग 3 किलोमीटर है और इतनी ही दूरी गेट से भर्तृहरि स्थल की है। इस 6 किलोमीटर की दूरी में भक्तों की लंबी लाइन लगी हुई है।
मेले में घरेलू वस्तुओं की खरीददारी

मेले में गांव के घरों में काम आने वाली वस्तुओं की सबसे अधिक खरीददारी होती है।

ये भर्तृहरि धाम पहुंचने का एंट्री गेट हैं। यहां से करीब 3 किलोमीटर अंदर भर्तृहरि धाम है।

कुशालगढ़ व भर्तृहरि गेट के बीच में मोटरसाइकिल पार्किंग है। इससे पहले कार पार्किंग है।

भर्तृहरि मेले में महिला श्रद्धालुओं की भीड़ अधिक है। मुख्य गेट पर ही ढोक देकर आगे निकलते हैं भक्त।

कुशालगढ़ से भर्तृहरि धाम तक सैकड़ों भंडारे लग रहे। सैनी समाज की ओर से मुख्य रोड पर लगाया गया भंडारा। जिसमें हजारों ने प्रसादी ली।
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