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बूंदी के कापरेन स्थित बालापुरा राजकीय मिडिल स्कूल की छत से उखड़ा प्लास्टर।

बूंदी के कापरेन स्थित नगर पालिका के ग्रामीण वार्ड 21 बालापुरा में राजकीय मिडिल स्कूल का भवन पिछले चार साल से जर्जर हो रहा है। यह वार्ड नगर पालिका चेयरमैन का गृह क्षेत्र है। इस स्कूल में 100 से अधिक ग्रामीण बच्चे भय के साए में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।

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स्कूल भवन की स्थिति इतनी खराब है कि कई जगह दीवारों में दरारें आ गई हैं। सभी 14 कक्षा कक्षों की छत से प्लास्टर उखड़ गया है। छत से लोहे के सरिए स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं और उनमें जंग लग चुका है।

इस खतरनाक स्थिति के कारण पेरेंट्स अपने बच्चों को स्कूल भेजने से कतरा रहे हैं। संपन्न परिवारों ने अपने बच्चों की ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) लेकर उन्हें पालिका मुख्यालय पर स्थित निजी स्कूलों में दाखिला दिला दिया है। फिर भी, कक्षा एक से आठवीं तक के करीब एक सौ से अधिक बच्चों का नामांकन अभी भी इस स्कूल में है।

स्कूल में एक रसोई, एक प्रिंसिपल रूम सहित कुल 14 कमरे हैं। आश्चर्य की बात यह है कि यह नगर पालिका का वार्ड है और पालिका चेयरमैन इसी वार्ड बालापुरा में रहते हैं। फिर भी सभी कमरों की स्थिति लगभग समान रूप से खराब है।

वार्ड पार्षद चंद्र कैलाश मीणा, ग्रामीणों और संस्था प्रधान द्वारा सरकार और विभागीय अधिकारियों को पत्र लिखा गया है। ग्रामीणों ने विरोध स्वरूप स्कूल भवन पर ताला लगाकर प्रदर्शन भी किया है, लेकिन किसी ने भी इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया है। ऐसा लगता है कि विभाग और प्रशासन शायद किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं।

4 साल से टीन शेड के नीचे चल रहा है डोलर मिडिल स्कूल ग्राम पंचायत बालोद के डोलर गांव में संचालित मिडिल स्कूल भवन जर्जर हालत होने के कारण एक टीन शेड के नीचे आठों कक्षाएं चल रही हैं।हालांकि सरपंच प्रतिनिधि हरिप्रसाद मीणा ने बताया कि स्कूल भवन निर्माण के लिए एक करोड़ रुपए स्वीकृत हुए हैं।

ढ़िकोली में भी टीन शेड रोटेदा ग्राम पंचायत के सबसे बड़े गांव ढ़िकोली में भी टीन शेड के नीचे प्राइमरी स्कूल व आंगनबाड़ी के करीब 40 से अधिक बच्चों को पढ़ाई करना पड़ रहा हैं। यहां वर्षों से जर्जर हालत स्कूल भवन की छत पर पाल पल्ले डाल कर बारिश से बचना पड़ता था जोकि गुजरे गर्मी के दौरान भवन को जमीं दोज कर दिया गया था।

वित्तीय स्वीकृति इंतजार

तीनों स्कूलों की खबरें भास्कर ने कई बार प्रमुखता से प्रकाशित की हैं। परिणाम डोलर स्कूल के लिए एक करोड़ रुपए स्वीकृत हुए और ढ़िकोली स्कूल भवन को जमीं दोज किया गया, लेकिन अभी तक कोई वित्तीय स्वीकृति नहीं मिल सकी है।

कंटेंट: प्रमोद सिसोदिया।



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