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काव्या (परिवर्तित नाम) रोजाना फोटोज, वीडियोज और रील्स बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करने लगी। शुरुआत में मिले लाइक्स और कमेंट्स ने उसे और प्रोत्साहित किया, मगर जैसे ही ये कम होने लगे तो मन में हीनता और असुरक्षा की भावनाएं घर कर गईं। वह गुमसुम रहने लगी।

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परिजनों ने विश्वास में लेकर उसकी काउंसलिंग करवाई तो पता चला कि वह कम लाइक्स से परेशान हो गई थी। अब वह रियल और वर्चुअल दुनिया के फर्क को समझने लगी है। पुनर्वास मनोवैज्ञानिक डॉ. कृति भारती बतातीं हैं कि यह समस्या अकेली काव्या की नहीं है।

बहुत से बच्चे, युवा और वयस्क चिंता, असुरक्षा, फ्रस्ट्रेशन व डिप्रेशन के चक्रव्यूह में फंस जाते हैं। उन पर सोशल मीडिया का मायाजाल, कॅरिअर का बोझ, कॉम्पिटिशन की दौड़ और पारिवारिक माहौल का कुप्रभाव पड़ता है। उन्होंने डिप्रेशन और आत्मघाती विचारों से जूझ रहे लोगों के लिए “मनोवैज्ञानिक सारथी मॉडल” विकसित किया है। इसके जरिए एक वर्ष में 1000 से ज्यादा लोगों की काउंसलिंग एवं थेरेपी की है।

बच्चे, टीनएज (किशोरावस्था), युवा, महिलाएं एवं बुज़ुर्ग सब आ रहे हैं। इनमें 60 प्रतिशत संख्या टीनएज बच्चे और युवाओं की है। इनमें से एक विनय (परिवर्तित नाम) डांस की दुनिया में नाम कमाना चाहता था। मगर वह सीए (चार्टर्ड अकाउंटेंट) के क्षेत्र में आ गया। परिजनों ने भी उसकी रुचि को नजरअंदाज कर दिया।

जी-तोड़ मेहनत की, लेकिन एग्जाम क्लियर नहीं कर पाया। इससे वह डिप्रेशन में चल गया। उसके मन में बार-बार जीवन खत्म करने के विचार आने लगे। परिवार ने काउंसलिंग करवाई, जिससे वह जीवन में सकारात्मक हो गया। इसी तरह रचना (परिवर्तित नाम) कॉलेज के दिनों से ही अत्यधिक कॉम्पिटिटिव थी। आरएएस परीक्षा के रिजल्ट से पहले खुद को सेलेक्टेड मान बैठी। मगर रिजल्ट अलग आया। इसी तरह श्रुति (परिवर्तित नाम) घर में झगड़े होते देख परेशान हो गई। वह काउंसिलिंग के बाद अब जीवन में खुश है।

पांच स्तरीय मॉडल, दो सप्ताह में बदलाव संभव

डॉ. कृति भारती ने बताया कि डिप्रेशन पीड़ितों को ट्रॉमा से निकालने के लिए यह पांच-स्तरीय मॉडल तैयार किया गया है, जो दो सप्ताह में अच्छे परिणाम देता है। पहले स्तर पर मरीजों का उठना, सोना, खाना, योगा, व्यायाम आदि के लिए समय निर्धारित है। दूसरे में एकल व ग्रुप काउंसलिंग व थैरेपी, तीसरे चरण में स्किल बेस्ड एक्टिविटीज, जिससे अवचेतन मस्तिष्क को पॉजिटिव की ओर मोड़ता है। चौथे स्तर पर स्कूल स्टाइल में टास्क और आखिरी में सेल्फ मोटिवेशनल ट्रांसफॉर्मेशन के जरिए आत्मविश्वास लौटाते हैं।



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