भारत में फेफड़ों का कैंसर अब तेजी से फैलता जा रहा है। इसके पहला सबसे बड़ा कारण रेगुलर स्मोकिंग तो है, लेकिन अब इंडस्ट्रियों से निकलता पॉल्यूशन और पैसिव स्मोकिंग इसका दूसरा बड़ा कारण बनता जा रहा है।
हेल्थ डिपार्टमेंट की एक रिपोर्ट देखे तो भारत में हर साल इसकी संख्या में इजाफा होता जा रहा है। भारत में मिलने वाले सभी प्रकार के कैंसर केसों में करीब 6 फीसदी मरीज इसी कैंसर के मिलते है। बड़ी बात ये है कि इस कैंसर के 50 फीसदी मरीज ऐसे है, जो स्मोकिंग नहीं करते।
1 अगस्त को मनाए जाने वाले वर्ल्ड लंग्स कैंसर डे से पहले सीनियर पल्मोनोलॉजी डॉक्टर शिवानी स्वामी ने इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया- साल 2022 में ही देश में करीब 1.03 लाख नए कैंसर मामलों की पहचान हुई, जिनमें पुरूषों में सबसे ज्यादा फेफड़ों का कैंसर डिटेक्ट हुआ।
उन्होंने बताया- फेफड़ों के कैंसर के लिए स्मोकिंग (धुम्रपान) के अलावा आज दूसरा सबसे बड़ा कारण पर्यावरण पॉल्यूशन है। दिल्ली, एनसीआर में इसके सबसे ज्यादा केस सामने आ रहे है।

50 फीसदी मरीज ऐसे जो नहीं करते स्मोकिंग
डॉक्टर शिवानी स्वामी ने बताया- एक स्टडी में पता चला है कि भारत में पिछले कुछ समय से जो फेंफड़ों के कैंसर के मामले आ रहे है, उसमें 50 फीसदी मरीज तो ऐसे है, जो नॉन स्मोकर है यानी वह धुम्रपान ही नहीं करते। ये आंकड़ों काफी चौंकाने वाले है। विशेषज्ञों ने माना है कि इसके पीछे कारण एयर पॉल्यूशन और औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाला धुआं है। इसके अलावा विशेषज्ञ एक बड़ा कारण पैसिव स्मोकिंग (दूसरे के धुएं का संपर्क) भी मान रहे है।
फेंफड़े के कैंसर के ये लक्षण
फेफड़ों का कैंसर अक्सर शुरुआत में कोई में बड़ा लक्षण सामने नहीं आता है, लेकिन इसकी ज्यादातर पहलचान 2 या 3 स्टेज के बाद होती है। इसके लक्षणों में बिना कारण लंबे समय तक खांसी के बने रहना, खांसी के साथ लगातार बहुत कम मात्रा में खून का आना, सांस फूलना या सीने में जकड़न, बार-बार फेफड़ों में संक्रमण होना और आवाज में बदलाव या लगातार थकावट है।
Discover more from Kuchaman City Directory
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
Comments