☜ Click Here to Star Rating


राजस्थान के नए निर्वाचन आयुक्त की रेस में 4 अफसरों के नाम चल रहे हैं। खास बात यह है कि एक महिला IAS शुभ्रा सिंह को इस रेस में प्रबल दावेदारों में से माना जा रहा है।

.

मौजूदा निर्वाचन आयुक्त मधुकर गुप्ता का 17 सितंबर को कार्यकाल पूरा हो रहा है। दिसंबर में पंचायत-निकाय चुनाव कराने की तैयारी है। इसलिए इस पद को सरकार खाली नहीं छोड़ सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सरकार जातीय समीकरणों को ध्यान में रखकर ही नियुक्ति करेगी। शासन और सत्ता के गलियारों में जयपुर से दिल्ली तक यही सवाल है कि राज्य निर्वाचन आयुक्त कौन होगा? कौन से 2 वर्किंग और 2 रिटायर्ड आईएएस रेस में शामिल हैं। पढ़िए इस रिपोर्ट में…

रेस में कौन-कौन अफसर? राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पंचायत और निकाय चुनाव को देखते हुए सीएम भजनलाल शर्मा सहमति से चुनाव करेंगे। अब देखना यह होगा कि सरकार वर्तमान में किसी आईएएस को वीआरएस दिलवाकर लगाती है या फिर रिटायर्ड आईएएस अफसरों पर दांव खेलती है। सियासी जानकारों का कहना है कि यदि सरकार रिटायर्ड आईएएस को लगाती है तो तीन प्रमुख दावेदार हैं- राजेश्वर सिंह, पीके गोयल और शुभ्रा सिंह। वहीं, वन एवं पर्यावरण विभाग के एसीएस आनंद कुमार भी इसी रेस में शामिल हैं।

राजेश्वर सिंह क्यों दावेदारों की रेस में? गहलोत सरकार में ग्रामीण एवं पंचायती राज विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव रह चुके रिटायर्ट आईएएस राजेश्वर सिंह की प्रशासनिक पकड़ बेहद मजबूत मानी जाती है। विभाग पंचायतों के पुनर्गठन में एसीएस रहते हुए उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी। राजपूतों को साधने के लिए सीएम भजनलाल शर्मा राजेश्वर सिंह पर दांव खेल सकते हैं।

हालांकि सियासी जानकारों के अनुसार एक समीकरण उनकी राह में रोड़ा भी बन सकता है। गहलोत सरकार में पंचायती राज विभाग का जिम्मा सचिन पायलट के पास था। सियासी जानकारों का कहना है कि सचिन पायलट से नजदीकी वजह से उनका तबादला कर दिया गया।

कई समीकरण पीके गोयल के पक्ष में 1988 बैच के रिटायर्ड आईएस पवन कुमार गोयल के पास प्रशासनिक दक्षता का लंबा अनुभव है। वे स्वायत्त शासन विभाग में भी लंबे समय तक कार्य कर चुके हैं। बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही सरकारों में उनकी अहम पदों पर पोस्टिंग रही है। गोयल की साफ-सुथरी छवि रही है। खास बात यह है कि सभी दावेदारों में पीके गोयल ही राजस्थान के निवासी है। वे वैश्य समुदाय से आते हैं। यह समुदाय बीजेपी का परंपरागत वोट बैंक माना जाता है।

आनंद कुमार पर इसलिए भरोसा सीएम भजनलाल शर्मा आनंद कुमार के माध्यम से दलित समाज को साध सकते हैं। आनंद कुमार दलित आईएएस अफसर हैं। यही वजह है कि सत्ता परिवर्तन के बाद भजनलाल सरकार ने संपूर्ण ब्यूरोक्रेसी का चेहरा बदल दिया था, लेकिन दो आईएएस अखिल अरोड़ा और आनंद कुमार को नहीं बदला। गहलोत सरकार ने आनंद कुमार को गृह विभाग का अतिरिक्त मुख्य सचिव बनाया था। करीब ढाई साल तक इस पद पर रहे। हाल ही में भजनलाल सरकार ने आनंद कुमार को गृह से हटाकर वन एवं पर्यावरण विभाग का एसीएस लगाया है। आनंद कुमार सीएम के पसंद के अफसर माने जाते हैं।

शुभ्रा सिंह इसलिए हैं रेस में शामिल राजस्थान में पूर्व मुख्य सचिव ऊषा शर्मा के बाद बड़े पद कोई महिला आईएएस नहीं है। ऐसे में सरकार रोडवेज विभाग की चेयरमैन शुभ्रा सिंह को भी निर्वाचन आयुक्त बना सकती है। शुभ्रा सिंह की लंबे समय तक दिल्ली में पोस्टिंग रही है। वे मुख्य सचिव की रेस में शामिल थीं, लेकिन सुधांश पंत को मुख्य सचिव बनाया गया। पंत के मुख्य सचिव बनते ही शुभ्रा सिंह को सचिवालय से बाहर पोस्टिंग दे दी गई। वे मिलनसार अफसर मानी जाती हैं। महिला होने के नाते आधी आबादी को साधा जा सकता है।

जातीय लाॅबिंग शुरू सियासी जानकारों का कहना है कि राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव कराने का पूरा दारोमदार निर्वाचन आयुक्त पर होता है। ऐसे में कलेक्टर से लेकर बीएलओ तक के अधिकारी आयुक्त के आदेश मानते हैं। पंचायत चुनाव में सरकार की साख जुड़ी होती है। ऐसे में सरकार जातीय समीकरण को ध्यान में रखकर ही नियुक्ति करेगी।

ब्यूरोक्रेसी के जानकारों का कहना है कि मुख्य सचिव सुधांश पंत और डीजीपी राजीव शर्मा की नियुक्ति के बाद सरकार एससी-एसटी के किसी आईएएस पर दांव खेल सकती है। इसके लिए परदे के पीछे लाॅबिंग भी शुरू हो गई है।

वसुंधरा राजे सरकार ने बदले नियम 1985 बैच के रिटायर्ड आईएएस मधुकर गुप्ता को गहलोत सरकार ने प्रेम सिंह मेहरा के स्थान पर अगस्त 2022 में नियुक्त किया था। जानकारों का कहना है कि राज्य सरकार किसी रिटायर्ड आईएएस को लगा सकती है या फिर वीआरएस दिलवाकर किसी आईएएस को लगा सकती है। वसुंधरा राजे के समय यह प्रयोग हो चुका है। बीजेपी सरकार ने आईएएस प्रेम सिंह मेहरा को वीआरएस दिलवाकर निर्वाचन आयुक्त की जिम्मेदारी सौंपी थी। राज्य निर्वाचन आयुक्त के पद पर पूर्व में मुख्य सचिव स्तर के आईएएस अधिकारियों को लगाया जाता था। परंतु प्रेम सिंह मेहरा के लिए नियमों में बदलाव किया गया। निर्वाचन आयुक्त के पद पर प्रमुख शासन सचिव स्तर के व्यक्ति को भी लगाने के लिए नियमों में बदलाव किया गया था।

कब होंगे पंचायत चुनाव? राजस्थान में पंचायत व निकाय चुनाव कब होंगे? इसको लेकर लंबे समय से हर किसी के मन में यही सवाल है। हाईकोर्ट भी सरकार से पूछ चुकी है कि 6 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों में चुनाव कब कराए जाएंगे। अब चर्चा है कि प्रदेश में दिसंबर 2025 तक पंचायती राज और शहरी निकायों के चुनाव एक साथ कराए जा सकते हैं। पंचायती राज संस्थाओं के पुनर्गठन को लेकर बनी कैबिनेट सब कमेटी जल्द सरकार को रिपोर्ट सौंपेगी। इसके बाद अंतिम फैसला मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को लेना है। मंत्री अविनाश गहलोत ने दिसंबर के अंत तक चुनाव कराने के संकेत दिए हैं। हालांकि, उनका कहना है कि अभी तय नहीं है।



Discover more from Kuchaman City Directory

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Comments

Leave a Reply

error: Content is protected !!

Sign In

Register

Reset Password

Please enter your username or email address, you will receive a link to create a new password via email.

Discover more from Kuchaman City Directory

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading