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अजमेर सरस डेयरी अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी
राज्य सरकार की ओर से मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादन संबल योजना व मिड डे मील की बकाया राशि भुगतान करने सहित सहकारिता क्षेत्र की अन्य मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं किए जाने से किसानों, पशुपालकों में रोष है। इसके लिए श्वेत क्रांति सहकार महाकुंभ का आयोजन कच्छाव
अजमेर सरस डेयरी अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी ने बताया कि कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट, प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी सुखविंदर सिंह रंधावा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, राष्ट्रीय महिला कांग्रेस अध्यक्ष अलका लाम्बा, प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष सारिका सिंह भी शिरकत करेंगे। महाकुंभ में पूरे प्रदेश से लगभग पच्चीस हजार किसान, पशुपालक शामिल होकर सरकार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करेगें।
यह है सरकार से मांगे
- दुग्ध उत्पादकों की सात माह से बकाया मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादन संबल योजना की राशि 320 करोड रुपए एवं मिड डे मील योजना के अंतर्गत इतनी ही राशि बकाया होने पर इसको एक मुश्त जारी करने की मांग उठाएंगे।
- इस बार प्रदेश में वर्षा की अधिकता होने के कारण अतिवृष्टि से किसानों एवं पशुपालकों के सामने विपरीत परिस्थितियां हुई है। ऐसे संकट के समय राज्य सरकार द्वारा बकाया भुगतान नहीं करने से परेशानी और बढ़ी है। जबकि संकट के इस समय में भारत सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग से पशुपालकों को फसल बीमा की राशि एवं चारा अनुदान तत्काल जारी करवाना चाहिए।
- किसानों को समय पर उनके हक का पैसा नहीं मिलने से उत्पन्न हुई विषम परिस्थितियों के कारण सरस डेयरी में दूध की आवक भी धीरे धीरे कम होती जा रहीं हैं। अजमेर सरस डेयरी में लगभग एक लाख लीटर दूध आवक की कमी हुई। ऐसे ही हालात प्रदेश में अन्य डेयरियो में भी उत्पन्न हो रहे है। डेयरी को कृषि क्षेत्र में शामिल करने की मांग दोहराई जाएगी।
- डेयरी क्षेत्र में लगभग ढाई हजार पदों पर भर्ती करने की कार्रवाई भी अधरझूल में है। हर बार केवल आश्वासन ही मिलता है, जबकि भर्ती संबंधी खर्च जिला संघों द्वारा वहन करने की बात रखी गई थी। इतना ही नहीं नियुक्ति के पश्चात वेतनमान भी संबंधित जिला संघ व आरसीडीएफ के द्वारा वहन करने की बात कही गई थी। इसके बावजूद सरकार की ओर से इस पर अभी तक कोई विचार नहीं किया गया। भर्ती की मांग की जाएगी।
- प्रदेश एवं देश में लावारिस सांडों की समस्या से जो नस्ल पैदा हो रही है, वो अनुपयोगी हैं। सरकारों को सामूहिक प्रयास करके किसानों एवं पशुपालकों को सेक्स सॉर्टेड सीमन निशुल्क उपलब्ध करवाया जाना चाहिए, जिससे उपयोगी नस्ल से दूध की मात्रा बढ़ सके। वहीं लावारिस सांडों का बंध्याकरण कराया जाना चाहिए। इसको लेकर भी सरकार का ध्यान आकर्षित किया जाएगा।
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