भांडियावास करणी माता मंदिर पर श्री आवड़-करणी कथा के छठे दिन कथा वाचक रामप्रसाद राव ने मां करणी के कई परचे गाकर सुनाए। वहीं मां करणी के विवाहोत्सव पर पहले भक्त भक्ति में झूमें, वहीं उनकी विदाई पर हर किसी की आंखें छलछला आई।
कथा रचयिता करणीसुत लखावत के सानिध्य में कथा वाचक रामप्रसाद राव ने कहा कि भगवती करणी जी के पिता मेहोजी की सर्पदंश से मृत्यु हो गई, इस पर करणीजी ने उन्हें फिर से जीवित किया। पूंगल गढ़ के राजा राव शेखा भाटी उनका परम भक्त था तो उसे अपना धर्मभाई बनाया। शेखा ने मां करणी से उसे अमरत्व देने की जिद की तो भगवती ने कहा कि ये विधि के विधान का उल्लंघन होगा। समझाने के बावजूद वह मां के चरण पकड़कर जिद करने लगा तो मां करणी ने चार शर्तें रखी और कहा कि इन चारों का पालन होता तब तक यम तुझे छू नहीं पाएगा। मां ने कहा कि काले मेढ़े का मांस, झींप की खाट, आक की लकड़ियों की छत और अमावस्या की रात, जब ये चारों संजोग साथ होंगे तो तेरी मौत मैं भी नहीं टाल पाऊंगी। शेखा खुशी से झूमने लगा और बोला मां मैं ऐसा कभी होने ही नहीं दूंगा।
राव ने कहा कि सुवाप गांव में ही सूआ बाबा नाम का एक बुजुर्ग ब्राह्मण रहता था, जो ज्योतिष का काम करता था और मां करणी जी की निंदा करता रहता था। उसके संतान नहीं होने के चलते उसने तीन विवाह किए थे, फिर भी कोई संतान नहीं हुई। इस पर उसकी पत्नियों ने उसे मनाया और वह मां करणीजी से मिलने पहुंचा। भगवती के सामने आते ही उसका अहंकार चला गया। मां करणी जी ने बूढ़े ब्राह्मण को आशीर्वाद दिया कि मां आवड़ तेरी मनोकामना पूरी करेगी और तेरे तीनों पत्नियों के पुत्र होंगे। भगवती की कृपा से 70 वर्षीय ब्राह्मण की तीनों पत्नियों को 9 माह बाद पुत्र हुए और वह हर वक्त मां के विरद गाने लगा। कथा वाचक ने कहा कि मां करणी जी ने अपने पिता को भी दो पुत्र होने का भरोसा दिलाया और भगवती के सांचल व सारंग नाम से दो भाई हुए।
इसके बाद कथा वाचक ने मां करणी जी की शादी का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि करणी जी की पांच बहिनों की शादी पहले हो चुकी थी, जबकि करणी जी व उनकी छोटी बहन गुलाब का विवाह करना था। मेहोजी के कई प्रयासों के बावजूद विवाह संयोग नहीं बैठ रहा था। पिता की चिंता देख करणी जी ने उनकी संतुष्टि के लिए मना नहीं किया। करणी जी जब 29 वर्ष के थे, तब उनका विवाह साठिका के देपोजी के साथ तय हुआ। कथा वाचक ने जब विवाहोत्सव का गान किया तो महिला शक्ति व भक्तों ने मां की तस्वीर पर वेश व ओढ़ावणियां चढ़ाई और पुष्प वर्षा के साथ खूब नाचे। विदाई वेला पर हर किसी की आंखें भरी नजर आई। इस दौरान बजरंगदास संत, जयदेव आशिया, कानसिंह चारण, भीमाराम पालीवाल, भंवरलाल पालीवाल, अमरसिंह बस्सी, मोहनराम पालीवाल, गोविंदसिंह चारण, चतुर्भुज पालीवाल, ईश्वरलाल सुथार, पपाराम भाट, इंद्रदास वैष्णव, वेणीराम पालीवाल सहित महिला शक्ति व सैकडों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
आज होम अष्टमी यज्ञ व प्रसादी| मंदिर व्यवस्थापक मेहाई शरण आशिया ने बताया कि सोमवार सप्तमी को दिलीपसिंह आशिया एण्ड पार्टी की ओर से माताजी का जागरण हुआ, जिसमें चिरजाएं सुनकर भक्त झूम उठे। वहीं मंगलवार को अष्टमी के दिन यज्ञ व प्रसादी का आयोजन होगा।
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