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शहरी सरकार राजधानी में कचरा प्रबंधन पर हर साल 800 करोड़ रुपए खर्च कर रही। फिर भी सड़कें कचरे से अटी पड़ी हैं। तंग गलियों में कचरे के ढे लगे हैं। बदबू से लोगों के साथ रास्ते से निकलने वाले लोग भी परेशान हैं। हालात यह है निगम अधिकारियों के तमाम प्रयासों के बाद भी ओपन कचरा डिपो खत्म नहीं हो रहे। संख्या कम होने के बजाए बढ़ रही। सबसे अधिक 500 से ज्यादा ओपन कचरा डिपो परकोटा क्षेत्र में हैं। तंग गलियों में हर 100 मीटर पर कचरे के ढेर नजर आते हैं। यह स्थिति तो तब है, जब राजधानी के दोनों निगमों में कचरा संग्रहण के लिए 800 से अधिक हूपर चल रहे हैं। अधिकारी एक कचरा डिपो को खत्म करते हैं, तो दूसरे दिन नया बन जाता है।
9 साल पहले शहर से खत्म हो गए थे ओपन कचरा डिपो
ग्रेटर निगम: वार्ड 12 में बैनाड़ मार्ग के पवनपुरी रोड पर जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं। शिकायत के बाद भी सुनवाई नहीं हो रही। हूपर भी कई दिनों से नही आए।
बैनाड़ मार्ग पवनपुरी रोड
हेरिटेज: निगम में तंग गलियों में ओपन कचरा डिपो बने हुए हैं। यहां हूपर पहुंचते ही नहीं हैं। इससे लोग कचरा थैलियों में भरकर गलियों में फेंक देते हैं। हर चौराहे पर कचरा डिपो बना हुआ है। सबसे अधिक परकोटे में 580 कचरा डिपो हैं।
आमेर-हवामहल 180
किशनपोल 240
आदर्श नगर जोन 160
सिविल लाइंस जोन 110
ग्रेटर: यहां ओपन कचरा डिपो की संख्या 900 से अधिक पहुंच गई है। मानसरोवर जोन में 1 साल में ओपन कचरा डिपो की संख्या 120 हो गई है। इससे इन रास्तों से गुजरने वाले लोगों को भी परेशानी होती है।
मुरलीपुरा जोन 140
मालवीय नगर जोन 129 झोटवाड़ा 157
विद्याधर नगर 138
जगतपुरा-सांगानेर 258
यूजर चार्ज वसूल रहे, फिर भी नहीं उठा रहे कचरा
ग्रेटर निगम के 7 में से 3 जोन में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण कर यूजर चार्ज वसूला जा रहा। फिर भी इन जोनों में स्थिति खराब है। निगम मुलीपुरा, मानसरोवर और मालवीय नगर जोन के उपभोक्ताओं से हर माह यूर्जर चार्ज वसूल रहा। मानसरोवर जोन के 21 वार्डों में कचरा संग्रहण का ठेका रवि ट्रेवल्स को दे रखा है। कंपनी को 4 माह में घरों पर जियो टैगिंग कर आरएफआईडी कार्ड लगाने थे। अभी काम शुरू नहीं हुआ। कंपनी ने बिना टैगिंग किए ही कार्ड चिपका दिए।
नगर निगम ग्रेटर के क्षेत्राधिकार में 942 और हेरिटेज निगम के क्षेत्र में अभी 690 कचरा डिपो
बीजेपी सरकार में 9 साल पहले ओपन कचरा डिपो पूरी तरह खत्म हो गए थे। तब अप्रैल माह से डोर टू डोर कचरा कलेक्शन शुरू किया गया था। 3 माह में 91 वार्ड में व्यवस्था की गई। इसे लागू कराने में 8 माह लगे। सभी बाजारों में दुकानों के बाहर सूखा व गीला कचरा डालने के लिए अलग-अलग डस्टबिन रखवाए। ऐसा नहीं करने वाले दुकानदारों से जुर्माना वसूला गया।
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