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जैसलमेर। सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल।
जैसलमेर सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने निर्वाचन आयोग पर राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोपों का समर्थन किया। अपने जैसलमेर दौरे के दौरान उन्होंने कहा- राहुल गांधी ने देश के सामने तथ्यात्मक आंकड़े पेश कर आयोग की पोल खोल दी है। बेनीवाल ने कहा कि निर्वाचन आयोग
एक ही व्यक्ति का चेहरा बदलकर, फोटो छोटा करके और अन्य तरीकों से उसका नाम 5 से 7 जगह जोड़ा गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की हेराफेरी 5 से 7 अलग-अलग तरीकों से की गई है, जो लोकतंत्र के साथ सीधा धोखा है।
संविधान पर संकट आएगा
कांग्रेस सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने चुनाव आयोग पर लगे आरोपों को लेकर कहा- राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोप सही हैं और वे प्रूफ के साथ पेश किए गए हैं। चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर लोगों का अब तक भरोसा रहा है, लेकिन अगर इस तरह की घटनाएं होंगी तो यह भरोसा कायम नहीं रहेगा और संविधान संकट में आ जाएगा।
बेनीवाल ने कहा कि अगर कोई अपनी मनमर्जी से वोटर लिस्ट में हेराफेरी कर, वोटों की चोरी करके चुनाव जीत जाएगा तो लोकतंत्र का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा। उन्होंने राहुल गांधी का हवाला देते हुए कहा कि कर्नाटक की एक लोकसभा की एक विधानसभा में 6 लाख वोटर हैं, जिनमें से 1 लाख फर्जी वोट पाए गए हैं। एक ही मकान में 50 से 60 लोगों का नाम दिखाया गया है, जबकि एक बेडरूम में इतने लोग कैसे रह सकते हैं?
सरकार का सीधा हस्तक्षेप
बेनीवाल के मुताबिक एक ही व्यक्ति का चेहरा बदलकर और फोटो छोटा करके उसका नाम 5 से 7 जगह जोड़ा गया है. वोटर लिस्ट में इस तरह की हेराफेरी 5 से 7 अलग-अलग तरीकों से की गई है. उन्होंने आरोप लगाया कि SIR (सिस्टमेटिक वोटर लिस्ट रिविजन) के माध्यम से सत्तारूढ़ बीजेपी अपनी मर्जी से मनपसंद वोटों की संख्या बढ़ा सकती है और जो लोग बीजेपी विचारधारा से नहीं हैं, उनके नाम वोटर लिस्ट से कम कर सकती है.
चुनाव आयोग को राहुल गांधी की मांग माननी पड़ेगी
इसी वजह से SIR का विरोध किया जा रहा है और संसद में भी इस मुद्दे पर गतिरोध चल रहा है। बेनीवाल ने कहा कि राहुल गांधी ने जो मांग की है, वह बिल्कुल सत्य है और चुनाव आयोग को यह मांग माननी ही पड़ेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि राहुल गांधी विपक्ष के नेता हैं और इतनी बड़ी बात प्रूफ के साथ कह रहे हैं।
बेनीवाल ने बताया कि चुनाव आयोग ने जो रिकॉर्ड दिया, उसी के आधार पर राहुल गांधी ने यह बात कही है। पहले तो चुनाव आयोग ने डेटा ही नहीं दिया, और जब दिया तो सॉफ्ट कॉपी की जगह हार्ड कॉपी में दिया। सभी ने देखा कि सात-सात फीट ऊंचे बड़े-बड़े बंडल दिए गए, जो सिर्फ एक विधानसभा क्षेत्र के थे।
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