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श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान, जसोल में विजयादशमी (दशहरा) के पावन अवसर पर पारंपरिक विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच शस्त्र पूजन का भव्य आयोजन सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर मंदिर प्रांगण स्थित सभी देवालयों के शस्त्रों का पूजन विद्वान आचार्यों एवं

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जसोल धाम में शस्त्र पूजन किया गया।

जसोल धाम में शस्त्र पूजन किया गया।

श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कुंवर हरिश्चंद्र सिंह जसोल ने कहा कि “शस्त्र पूजा केवल शक्ति का प्रतीक नहीं, बल्कि धर्म, सत्य और न्याय की विजय का द्योतक है।”

धार्मिक परंपरा के अनुसार मां दुर्गा ने नौ रात और दस दिन तक चले युद्ध के उपरांत दशमी तिथि को महिषासुर का वध कर धर्म की विजय स्थापित की थी। तभी से यह पर्व असत्य पर सत्य, अधर्म पर धर्म और दुष्टता पर सद्गुण की विजय के रूप में विजयादशमी या दशहरा कहलाता है।

शास्त्रों में विजयादशमी को वर्ष की तीन अत्यंत शुभ तिथियों में गिना गया है। इस दिन शस्त्र पूजन एवं नए कार्यों का शुभारंभ सफलता और कल्याण का सूचक माना जाता है।

ये रहे मौजूद इस अवसर पर जितेन्द्र सिंह, जगदीश सिंह, पूरण सिंह डंडाली, महीपाल सिंह झंवर, राजेश बंसल, संस्थान प्रबंधक जेठू सिंह ढेलाना सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे और सभी ने श्री राणीसा भटियाणीसा के श्रीचरणों में समाज एवं राष्ट्र की उन्नति की मंगलकामना की।



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