सावन की रिमझिम बूंदों के बीच जयपुर में पारंपरिक उल्लास और सांस्कृतिक धरोहर के संग तीज उत्सव का रंगारंग आयोजन हुआ।
सावन की रिमझिम बूंदों के बीच जयपुर में पारंपरिक उल्लास और सांस्कृतिक धरोहर के संग तीज उत्सव का रंगारंग आयोजन हुआ। इस विशेष अवसर पर कला मंजर सोसाइटी और राजस्थान विश्वविद्यालय महिला संघ (RUWA) के संयुक्त तत्वावधान में शक्ति-स्तम्भ परिसर में हुए इस उत्स
लहरिया परिधानों में सजी महिलाओं और बच्चियों ने न केवल अपने परिधानों से, बल्कि लोकगीतों, नृत्य और पारंपरिक खेलों से भी वातावरण को जीवंत कर दिया।

लहरिया परिधानों में सजी महिलाओं और बच्चियों ने न केवल अपने परिधानों से, बल्कि लोकगीतों, नृत्य और पारंपरिक खेलों से भी वातावरण को जीवंत कर दिया।
सांस्कृतिक सौंदर्य और समावेशिता की अनूठी मिसाल
कार्यक्रम का शुभारंभ रूआ अध्यक्ष डॉ. शशिलता पूरी और कला मंजर संस्था की फाउंडर मीनाक्षी माथुर द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। अचरोल से आई दृष्टिबाधित गायिका मीना गुर्जर की ओर से प्रस्तुत सरस्वती वंदना ने पूरे माहौल को भावपूर्ण बना दिया, जबकि मंच संचालन भी अचरोल से आई कक्षा 10वीं की छात्रा नीतू गुर्जर ने किया, जिसने अपनी प्रस्तुति से सभी का मन मोह लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ रूआ अध्यक्ष डॉ. शशिलता पूरी और कला मंजर संस्था की फाउंडर मीनाक्षी माथुर द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।
नन्हे कदम सोसायटी की रेणु भाटिया की ओर से तीज पर आधारित पारंपरिक खेलों का आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित महिलाओं और युवतियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतियोगिताओं में विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। बेस्ट लहरिया अवार्ड रेणु भाटिया को दिया गया। बेस्ट परिधान अवार्ड शिल्पी माथुर को मिला। वहीं, बेस्ट डांस अवार्ड प्रतिमा पटनायक ने जीता।

प्रतियोगिताओं में विजेताओं को पुरस्कृत किया गया।
साथ ही शक्ति-सदन में रहने वाली महिलाओं और बच्चियों को उनकी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के लिए प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए गए। कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने पहुंचे सृष्टि क्लब की फाउंडर मधु सोनी सहित क्लब की अन्य सदस्याएं, वरिष्ठ समाजसेवी रवि हूजा, लेखिका डॉ. अंजू सक्सेना, कंचना सक्सेना, और रंगकर्मी शिल्पी माथुर ने आयोजन को समर्थन और सराहना दी।

शक्ति-सदन में रहने वाली महिलाओं और बच्चियों को उनकी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के लिए प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए गए।
कला मंजर संस्था की संस्थापक मीनाक्षी माथुर ने कहा कि हमारा प्रयास हमेशा से यही रहा है कि समाज के हर वर्ग की छिपी प्रतिभाओं को मंच मिले, उन्हें पहचान और प्रोत्साहन दिया जाए। तीज जैसे पारंपरिक पर्वों के आयोजन न केवल लोक-संस्कृति को जीवंत बनाए रखते हैं, बल्कि समाज को जोड़ने का माध्यम भी बनते हैं।
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