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बच्चे की मौत के बाद हॉस्पिटल के बाहर लोग प्रदर्शन करने लगे।

जोधपुर के प्राइवेट हॉस्पिटल में इलाज के दौरान चार साल के बच्चे की मौत हो गई। इसके बाद परिजनों ने हॉस्पिटल में हंगामा कर दिया। उन्होंने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। परिजन ने कहा कि बच्चे को आंख में चोट लगने पर हॉस्पिटल लेकर आए थे।

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उधर, डॉक्टर का कहना है कि बच्चे के हेड इंजरी थी, जिसकी माइक्रो सर्जरी कर दी गई। लेकिन अचानक उसे कार्डियक अरेस्ट आ गया। मामला महामंदिर थाना इलाके में नागौरी गेट रोड स्थित कामदार आई हॉस्पिटल का गुरुवार दोपहर 2 बजे का है।

शाम को परिजन और समाज के लोग प्रदर्शन करने लगे। परिजन का कहना है कि बच्चे की मौत के बाद हॉस्पिटल प्रशासन ने हमें सूचना नहीं दी। उससे पहले पुलिस और RAC के जवान हॉस्पिटल में तैनात कर दिए गए। इसके बाद हमें बताया गया। हॉस्पिटल प्रशासन हम पर बॉडी लेकर जाने का दबाव बना रहा है।

एसीपी ईस्ट हेमंत कलाल और महामंदिर थाना अधिकारी देवेंद्र सिंह देवड़ा मौके पर पहुंचे। FSL टीम को भी मौके पर बुलाया गया। थाना अधिकारी देवेंद्र सिंह ने बताया- मौके पर जाब्ता तैनात किया गया है।

बच्चे की मौत के बाद हॉस्पिटल में बिलखते परिजन को सांत्वना देते समाज के विरेंद्र सिंह राजपुरोहित।

बच्चे की मौत के बाद हॉस्पिटल में बिलखते परिजन को सांत्वना देते समाज के विरेंद्र सिंह राजपुरोहित।

बच्चे के आंख में लगी थी चोट राजपुरोहित समाज के रामचंद्र सिंह ने बताया कि चांदेसरा निवासी कार्तिक सिंह (4) पुत्र दिनेश सिंह के आंख में चोट लग गई थी। परिजन कार्तिक को लेकर बुधवार रात 8 बजे हॉस्पिटल आए थे। यहां पर डॉक्टरों ने कहा कि आंख की चोट गंभीर है। इलाज के लिए अहमदाबाद से डॉक्टर बुलाने पड़ेंगे।

हॉस्पिटल प्रशासन ने इलाज के लिए पहले 50 हजार रुपए लिए। उसके बाद ढाई लाख का और खर्च बताया। परिजनों ने इसके लिए हां कर दिया। लेकिन, गुरुवार दोपहर करीब 2 बजे बताया कि बच्चे की डेथ हो गई। जबकि बच्चे के कोई गंभीर चोट नहीं थी।

आरोप- डॉक्टर नहीं बता रहे मौत का सही कारण समाज के विरेंद्र सिंह राजपुरोहित ने कहा कि मामले में डॉक्टर संतोषजनक जवाब नहीं दे रहे हैं। उनसे पूछा कि बच्चे का इलाज किसने किया तो बताया कि अहमदाबाद के डॉक्टर ने किया। बाद में यहां के डॉक्टर से इलाज करना बता रहे हैं। हॉस्पिटल प्रशासन बता ही नहीं रहा है कि असली डॉक्टर कौन है, जिसने इलाज किया है। हॉस्पिटल के डॉक्टर कभी बोल रहे हैं कि हार्ट अटैक से मौत हुई है। कभी बोल रहे हैं एनेस्थीसिया की डोज ज्यादा देने से मौत हो गई।

बच्चे की मौत की सूचना परिजनों को देने से पहले हॉस्पिटल प्रशासन ने पुलिस बुला ली। 100 पुलिसकर्मी खड़े कर दिए गए, वहीं हमें ही दबाया जा रहा है। परिजनों को हॉस्पिटल में जाने नहीं दिया जा रहा है। जबकि हॉस्पिटल प्रशासन की लापरवाही से बच्चे की मौत हुई है।

बच्चे की मौत के बाद हॉस्पिटल के बाहर समाज के लोग जुट गए और प्रदर्शन करने लगे।

बच्चे की मौत के बाद हॉस्पिटल के बाहर समाज के लोग जुट गए और प्रदर्शन करने लगे।

डॉक्टर बोले- बचाने की पूरी कोशिश की हॉस्पिटल संचालक डॉक्टर गुलाम अली कामदार ने बताया कि परिजन बच्चे को कल रात हॉस्पिटल लेकर आए थे। उस समय बच्चा हंसता-खेलता आया था। उसके हेड इंजरी थी, जिसकी माइक्रो सर्जरी कर दी गई। लेकिन अचानक उसे कार्डियक अरेस्ट आ गया। हमने बच्चे को बचाने की काफी कोशिश की, लेकिन दुर्भाग्य से बचा नहीं पाए।

उन्होंने बताया- बच्चे के हेड इंजरी थी। इसके लिए पूरा बेहोश करके ही इलाज किया जाता है। बच्चे को एनेस्थीसिया की डोज ज्यादा देने के सवाल पर कहा कि डोज ज्यादा क्यों देंगे।



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