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दीपावली त्योहार को लेकर इस साल भी दुविधा की स्थिति है। इस बार अमावस्या 20 अक्टूबर को दोपहर 3:45 बजे से शुरू होकर 21 अक्टूबर की शाम 5:55 तक रहेगी। ऐसे में महालक्ष्मी पूजन 20 या 21 अक्टूबर को करना श्रेष्ठ रहेगा, इसे लेकर पंडितों में मतैक्य नहीं है। दोन
पिछले वर्ष 2024 में भी 31 अक्टूबर और 1 नवंबर के बीच यही स्थिति बनी थी। ज्योतिर्विदों का मत है कि दीपावली निशितकालीन (रात्रि में मनाया जाने वाला) त्योहार है। स्थिर लग्न में प्रदोष व निशितकाल के दौरान मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की आराधना की जाती है। ऐसे में 20 अक्टूबर की रात दीपावली पूजन शास्त्रानुकूल होगा। वहीं, दूसरे पक्ष का मत है कि 21 अक्टूबर को भी शाम 5:55 बजे तक अमावस्या रहेगी और यह उदयव्यापिनी तिथि होगी। प्रदोषकाल में अमावस्या स्पर्श करने के कारण 21 अक्टूबर को भी दीपावली मनाना शास्त्रसम्मत रहेगा। 22 अक्टूबर को गोवर्धन पूजा और 23 अक्टूबर को भाई दूज मनाई जाएगी।
दोनों तिथियों को लेकर ज्योतिषियों के अलग–अलग तर्क
- ज्योतिषाचार्य ने बताया कि धर्म सिंधु पंचांग के अनुसार 2 प्रदोष व्यापिनी अमावस्या है, लेकिन निशितकाल 20 अक्टूबर को ही रहेगा। दीपोत्सव का पर्व रात्रि का माना गया है, तो 20 अक्टूबर को मनाना उचित है। वहीं 21 अक्टूबर को अमावस्या साढ़े तीन प्रहर से अधिक होगी और प्रतिपदा वृद्धि गामिनी होगी, उस हिसाब से 21 अक्टूबर को मनाना भी शास्त्र सम्मत है।
- 20 अक्टूबर को दीपावली मनाना उचित माना जा रहा है। इस दिन प्रदोषकाल में ही अमावस्या लगेगी और यही समय लक्ष्मी-गणेश पूजन का श्रेष्ठ समय है। स्थिर लग्न में पूजा करने से घर में स्थाई लक्ष्मी का वास होता है। वहीं 21 अक्टूबर को स्नान व दान की अमावस्या रहेगी। जो पितरों को समर्पित होती है।
- पंचांग के अनुसार चार रात्रियां बताई गई हैं। कालरात्रि, महारात्रि, मोहरात्रि और दारुणरात्रि इन रात्रियों में मध्य रात्रि में जब यह तिथियां पड़ती हैं, तो पर्व मनाया जाता है। (कालरात्रि अर्थात महा शिवरात्रि, महारात्रि अर्थात दीपावली, मोहरात्रि अर्थात कृष्ण जन्माष्टमी, दारुण रात्रि अर्थात होली का दहन की रात्रि) दूसरा इसका महत्व प्रदोष काल से भी बताया गया है, जिस दिन प्रदोष काल में हो उस दिन मानना चाहिए। ऐसे में 20 को दीपावली माननो श्रेष्ठ रहेगा।
- दीपावली पर उदियात तिथि नहीं मानी जाती है। दीपावली पर्व पर निशित काल की अमावस्या के दिन ही लक्ष्मी पूजन का विधान है, हालांकि जो उदियात तिथि के अनुसार चलते हैं, वो 21 को मनाएंगे।
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