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ऊंट के टकराने से वंदेभारत ट्रेन के इंजन का कैटल गार्ड (सामने का कवच) पूरी तरह से टूट गया।

अहमदाबाद से जोधपुर आ रही वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन पाली जिले में दो ऊंटों से टकरा गई। इससे ट्रेन के इंजन का आगे का हिस्सा (रेक) टूट गया। ट्रैक पर चारों ओर खून भी बिखर गया।

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इस कारण करीब 15 से 20 मिनट तक ट्रेन रुकी रही। अचानक लगे झटके से यात्रियों में भी अफरा-तफरी मच गई। रेलवे कर्मचारियों और अधिकारियों ने तुरंत स्थिति को संभाला।

घटना अजमेर मंडल के मोरी बेडा रेलवे स्टेशन के किमी संख्या 528/10 के पास शुक्रवार रात की है। इस संबंध में पूछे जाने पर अजमेर मंडल के सीनियर डीसीएम बीसीएस चौधरी ने कहा- उन्हें ऐसी किसी घटना की जानकारी नहीं है। यदि ऐसा कुछ हुआ है, तो वे पता करेंगे।

हालांकि इस घटना की पुष्टि इसी ट्रेन में सफर कर रहे यात्रियों से हो रही है लेकिन रेलवे के अधिकारी इस पर कुछ भी कहने से बच रहे हैं।

फालना से पहले मोरी बेडा स्टेशन किमी संख्या 528/10 के पास इस ट्रैक पर हादसा हुआ था।

फालना से पहले मोरी बेडा स्टेशन किमी संख्या 528/10 के पास इस ट्रैक पर हादसा हुआ था।

इंजन का कैटल गार्ड टूटा, मरम्मत के लिए जयपुर भेजा

ट्रेन में सवार यात्रियों से मिली जानकारी अनुसार- वंदे भारत ट्रेन अहमदाबाद से जोधपुर आ रही थी। फालना से पहले मोरी बेडा स्टेशन किमी संख्या 528/10 के पास ट्रैक पर दो ऊंट आ गए। ट्रेन इंजन का अगला हिस्सा ऊंटों से टकराया। टक्कर इतनी भीषण थी कि ट्रेन के इंजन का कैटल गार्ड पूरी तरह से टूट गया और उसमें गहरा गड्ढा हो गया।

अचानक झटका लगने से यात्री डर गए लेकिन ट्रेन के सभी कोच के गेट बंद होने से नीचे नहीं उतर पाए। वंदे भारत के क्रू मेम्बर्स और कुछ यात्री इंजन व कोच के बीच स्टाफ के लिए खुलने वाले गेट से नीचे उतरे। वापस आकर अन्य यात्रियों को जानकारी दी।

प्रारंभिक जांच के बाद ट्रेन को आगे बढ़ाया गया। टूटे रैक को मरम्मत के लिए जयपुर भेजा गया है। फिलहाल, इस रूट पर वंदे भारत एक्सप्रेस का संचालन दूसरे रेक के माध्यम से किया जा रहा है ताकि सेवा में कोई व्यवधान न आए।

अहमदाबाद से जोधपुर आ रही वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन। ऊंटों से टकराने के बाद इंजन के आगे का हिस्सा टूट गया।

अहमदाबाद से जोधपुर आ रही वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन। ऊंटों से टकराने के बाद इंजन के आगे का हिस्सा टूट गया।

पहले भी हो चुकी मवेशियों के टकराने की घटना

वंदे भारत ट्रेन पशुओं के टकराने की ये पहली घटना नहीं है। पहले भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं। इस तरह की घटनाएं सेमी-हाई स्पीड ट्रेनों के संचालन के लिए एक चुनौती बनी हुई हैं। रेलवे ट्रैक के किनारे बाड़ लगाने और पशुपालकों को जागरूक करने जैसे उपाय किए जा रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सकें।



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