थार संस्था के संयुक्त तत्वावधान में मानस से जनमानस तक विषयक एक विशेष वैचारिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
गोस्वामी तुलसीदास जयंती के अवसर पर फॉर्टिस हॉस्पिटल, जयपुर और थार संस्था के संयुक्त तत्वावधान में मानस से जनमानस तक विषयक एक विशेष वैचारिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह आयोजन न केवल साहित्यिक विचार-विमर्श का मंच बना, बल्कि तुलसी साहित्य की सामाजिक,
कार्यक्रम के संयोजक प्रो. डॉ. सुधीर सोनी ने बताया कि फॉर्टिस अस्पताल के सभागार में आयोजित इस संगोष्ठी में वरिष्ठ प्रशासक, शिक्षाविद, साहित्यकार और चिकित्सक शामिल हुए।

कार्यक्रम में वरिष्ठ आईएएस डॉ समित शर्मा भी रूबरू हुए।
सेवानिवृत्त वरिष्ठ आईएएस राजेश्वर सिंह, वरिष्ठ आईएएस डॉ. समित शर्मा, टीकम चंद बोहरा, के.के. पाठक और वरिष्ठ सर्जन डॉ. हेमेंद्र शर्मा सहित कई विद्वानों ने रामचरितमानस और गोस्वामी तुलसीदास के योगदान पर गहन विचार साझा किए।
संगोष्ठी का संचालन वरिष्ठ पत्रकार डॉ. प्रभात कुमार शर्मा ने किया। संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने कहा कि रामचरितमानस केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि भारतीय समाज की अंतरात्मा का प्रतिबिंब है। यह ग्रंथ आज भी हमारे सामाजिक जीवन, नीति और आचरण के लिए मार्गदर्शक है।

सेवानिवृत्त वरिष्ठ आईएएस राजेश्वर सिंह मानस से जन मानस तक का कॉन्सेप्ट तैयार किया है।
वक्ताओं ने तुलसीदास की भक्ति परंपरा, नारी सम्मान, नैतिक मूल्यों, और सामाजिक समरसता को वर्तमान समय के लिए अत्यंत प्रासंगिक बताया। वक्ताओं ने रामचरितमानस के प्रमुख प्रसंगों, पात्रों और उनके व्यवहार के माध्यम से आज की चुनौतियों का समाधान खोजने की प्रेरणा दी।

कार्यक्रम में हर उम्र के लोग मौजूद रहे।
संगोष्ठी में तुलसीदास के भाषा शिल्प, भाव-प्रवणता और दार्शनिक दृष्टिकोण पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने बताया कि मानस की चौपाइयां आज भी जनमानस के जीवन और व्यवहार में गहराई से जुड़ी हुई हैं, जो इसे एक जीवंत ग्रंथ बनाती हैं। इस विचार संगोष्ठी में बड़ी संख्या में विद्यार्थी, शोधार्थी और साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे। आयोजन के अंत में डॉ. कैलाश सैनी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।
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