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जयपुर के एसएमएस अस्पताल के अग्निकांड में जिले के तीन मरीजों की मौत हो गई। एक के शव का दोपहर में अंतिम संस्कार हुआ। दो अन्य के परिजन जयपुर में ही धरने पर बैठ गए थे। जिसके कारण उनके शव देर रात घर पहुंचे। मृतकों में भरतपुर शहर के गोपालगढ़ मोहल्ला निवासी

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अग्निकांड में गोपालगढ़ स्थित चर्च के पास रहने वाली रुक्मिणी(56) की मौत हो गई। उनके पति बच्चू सिंह ने बताया कि रुक्मिणी को ब्लड प्रेशर की बीमारी थी। उसकी 17 सितंबर को बाथरूम में फिसल गई। उनके सिर में चोट आई। आरबीएम में चिकित्सकों ने बताया कि दिमाग की नस फट गई है। उसे एसएमएस रेफर कर दिया गया। जहां पहुंचने पर उसे ट्रोमा के न्यूरो आईसीयू में भर्ती किया गया।

कल रात उनके पास बड़ा बेटा शेरू था। जिसके अनुसार वायरों में स्पार्किंग हुई थी। जिससे धुंआ निकलने लगा। तामीरदारों और मरीजों ने नर्सिंग स्टाफ को बताया लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। धीरे-धीरे धुआं बढ़ता ही गया। सभी को बाहर निकाल दिया गया। कहा गया की मरीजों को शिफ्ट किया जा रहा है। वह छोटे भाई जोगेंंद्र को लेने के लिए अस्पताल में नीचे गया।

रात को पहुंचा शव, ढाढ़स बंधाने के लिए एसडीएम भी घर आईं

घटना के चलते पीड़ित परिवार को ढाढ़स बंधाने के लिए दोपहर में एसडीएम सहित कुछ सरकारी कर्मचारी उनके घर पहुंचे। मृतका के पति के अनुसार घटना में उनका मोबाइल जल गया है। रात को शव के साथ बेटा घर पहुंचा। शव पहुंचने पर फिर से एसडीएम और अन्य अधिकारी भी वहां पहुंचे। दिन भर घर में मातम पसरा रहा। शव पहुंचने पर परिवार के बच्चे भी रोने लगे।

मां को बचाने जलते सेंटर में घुसा बेटा

भाई के साथ उसने सभी वार्डों में मां को तलाशा, लेकिन वह कहीं नहीं मिली। वह वापस लौटा तो गार्ड ने अंदर जाने से रोक दिया। उसे कहा गया कि सभी मरीजों को शिफ्ट कर दिया गया है, यहां से भागो। इस पर उसने कहा मां को छोड़ कर नहीं जा सकता वह अंदर ही है। जबरन गेट खुलवा अंदर घुसा। मां आईसीयू में अपने बैड पर ही थी। इस पर बेड को खींचते हुए बाहर दरवाजे तक लाया। इसके बाद एसएमएस स्टाफ मां को दूसरे वार्ड में ले गया। कोई कुछ भी बताने को तैयार नहीं था कि उनकी हालत कैसी है।

भाई बोला- धुआ भरने पर हमें बाहर निकाल दिया मरीज को देखने के लिए भटके, सुबह डेड बॉडी मिली

बयाना। मृतकों में बयाना उपखंड के गांव सालाबाद निवासी श्रीनाथ गुर्जर (50) पुत्र छत्तर सिंह भी शामिल था। दोपहर को श्रीनाथ का अंतिम संस्कार हुआ। श्री नाथ 26 सितंबर को सड़क दुर्घटना में घायल हुआ था। परिजनों के मुताबिक, श्रीनाथ चार भाइयों में दूसरे नंबर का था। चारों ही अविवाहित हैं। भाई इंदल सिंह ने बताया कि श्रीनाथ ट्रॉमा सेंटर की दूसरी मंजिल पर न्यूरो आईसीयू वार्ड में भर्ती था, उसका ऑपरेशन हुआ था। उस वार्ड में कुल 11 मरीज भर्ती थे।

इंदल सिंह ने बताया कि रात करीब 11.20 बजे वार्ड में धुआं उठने लगा। उसने और मरीजों के अन्य परिजनों ने वार्ड में तैनात कर्मचारियों को इस बारे में बताया, लेकिन जब तक वे कुछ करते तब तक वार्ड धुएं से पूरी तरह भर गया। हमें वार्ड से बाहर निकाल दिया गया, फिर अंदर नहीं घुसने दिया। इधर से उधर मरीज को देखने के लिए भटकते रहे। सुबह जाकर पता चला कि श्रीनाथ की डेड बॉडी मोर्चरी में रखी है।

देवर बोला- देर रात वार्ड से आवाज आई तो भाई अंदर गया, पैरों में कांच चुभ गए, भाभी को नहीं बचा सका

हलैना| कुषमा के देवर रूप सिंह ने बताया कि भाभी 3 अक्टूबर से एसएमएस के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती थीं। पति पूरन सिंह उनके साथ थे। रूप सिंह ने आरोप लगाया कि रात को कम्पाउंडर जैसे ही दरवाजा लगाकर निकला तो अंदर से मेरे भाई पूरन को कांच टूटने की आवाज सुनाई देने लगी। वे अंदर पहुंचे तो ट्रॉमा सेंटर में आग से कांच टूट रहे थे। वे आईसीयू का शीशा तोड़कर जैसे-तैसे अंदर गए। उनके पैरों में भी कांच चुभ गए। अंदर अंधेरा था। कुछ दिखाई नहीं पड़ रहा था। वे बाहर आ गए। भाभी को बचाया न जा सका।

हलैना थाना की ग्रापं हजीतर के गांव नगला चतरसाल की रहने वाली कुषमा देवी की इस अग्निकांड में जान चली गई। उनके देवर रूप सिंह ने बताया- 1 अक्टूबर को मेरी भाभी कुषमा बाइक से गिर गई थीं। उन्हें आरबीएम भरतपुर लेकर गए थे। हालत देख उसी दिन जयपुर के एसएमएस हॉस्पिटल रेफर किया गया। 2 अक्टूबर को सुबह 10 बजे उनके पैर का ऑपरेशन हुआ था।



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