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शहर के पथमेड़ा गोचिकित्सालय के वार्ड में भर्ती लंपी से ग्रसित गोवंश ।
जिले के गोवंश में लंपी स्किन बीमारी बेकाबू हो गई है। अब तक जिले में 500 गोवंश की लंपी बीमारी से मौत हो चुकी है। वहीं दो हजार गोवंश इसकी चपेट में हैं।पशुपालन विभाग की ओर से अब तक लंपी स्किन बीमारी से एक भी गोवंश की मौत नहीं होने का दावा किया जा रहा है
शहर की ही 4 गोशालाओं में 130 गोवंश लंपी ग्रसित पाया गया। इनमें से 20 की मौत हो चुकी है। वहीं शहर में 200 गोवंश ग्रसित हैं, इनमें अब तक 35 की मौत हो चुकी है।जिले में तीन साल पहले 2022-23 में आए लंपी रोग से सरकारी आंकड़ों में 2887 गोवंश की मौत बताई गई थी। जिले में 9 लाख से अधिक गोवंश हैं। विभाग ने एक जून से अब तक संस्थाओं की मदद से 6.10 लाख पशुधन को गोट पॉक्स वैक्सीन की डोज लगाई है। लंपी स्किन में मृत्युदर 5 प्रतिशत है। लंपी की चपेट में आने वाले गोवंश रिकवर हो रहे हैं।
शहर में 200 व चार गोशालाओं में 130 लंपी ग्रसित गोवंश, 55 की मौत
बाड़मेर शहर की हर गली में लंपी स्किन से गोवंश ग्रसित है। शहर में ही लंपी स्किन से ग्रसित 200 गोवंश में अब तक 35 से अधिक पशुपालकों की गाय मर चुकी है। पथमेड़ा गोशाला व्यवस्थापक कंवराज सिंह मूलाणा का कहना है कि गोशाला में 94 गोवंश लंपी ग्रसित है। अब तक इलाज के दौरान 15 गोवंश की मौत हो चुकी है। 20 गंभीर गोवंश के लिए अलग बाड़े की व्यवस्था की गई है।
शहर की सुमेर गोशाला के सचिव एडवोकेट मुकेश जैन ने बताया कि गोशाला में 18 गोवंश लंपी से ग्रसित है। एक गाय व 3 बछड़ों की मौत हो चुकी है। नंदी गोशाला के पुरुषोत्तमदास खत्री ने बताया कि गोशाला में 15 लंपी केस में 4 बछड़ों की मौत हो गई। शेष 11 स्वस्थ हो चुके हैं। वहीं गोपाल गोशाला में 3 गोवंश में एक बछड़े की मौत हो गई।
चौंकाने वाले आंकड़े: 29 गांवों में लंपी से 90 गायों की मौत, 200 मौत से जूझ रही
मालाणी गोरक्षक दल के अध्यक्ष गणेश जाणी का कहना है कि हमारे सामने 104 गोवंश दम तोड़ चुका है। जानसिंह की बेरी में 30 गोवंश लंपी ग्रसित मिला, इनमें से 8 की मौत हो गई। दूधोड़ा 20 में 5, बालेवा 50 में 20, मोसेरी 30 में 10, खारची 20 में 5, फोगेरा 35 में 7, भाड़खा में 15 गोवंश लंपी की चपेट में हैं, इनमें 3 की मौत हो चुकी है।निंबला में 5, शिव में 10 में 1 की मौत, गूंगा 3, देवीकोट 10 में 2 की मृत्यु, कुंडा 10 में 4, झणकली 20 में 7, थुंबली 3, अकली 10 में 2, नांद 20 में 3, दूदाबेरी 10 में 1, चौहटन 20 में 5, धनाऊ 15 में 3, सेड़वा 20 में 2, धोरीमन्ना 20, रामजी का गोल 50 में 10, गुड़ामालानी 30 में 4, पोशाल 15, मौखाब 7, उण्डू 10, भियाड़ 10 व रामदेरिया में 3 गोवंश बीमारी ग्रसित मिले।
ग्रामीण बोले: गोवंश दम तोड़ रहा, डॉक्टर न इलाज — गोरक्षक गांव-गांव घूमकर लगा रहे हैं इंजेक्शन
बालेरा के महिपालदान चारण ने बताया कि करीब 20 गोवंश की मौत हो चुकी है। 50 गोवंश लंपी से ग्रसित हैं। पिछले 10-12 दिन से रोग अधिक तेजी से फैल रहा है। पशुपालन विभाग की गाड़ी जरूर दो बार आई, लेकिन इंजेक्शन नहीं लगाते हुए टैबलेट देकर चली गई।
अब गांव में गोवंश का बुरा हाल है।बाबूदान चारण का कहना है कि बालेवा चारणों की ढाणी में 10-12 गोवंश ग्रसित हैं। गोरक्षक दल के सदस्यों ने गोवंश को इंजेक्शन लगाते हुए इलाज किया है। जानसिंह की बेरी के छगनसिंह ने बताया कि आसपास में करीब 100-150 गोवंश ग्रसित हैं। सरकार की ओर से कोई मदद नहीं हो रही है।
गोवंश के 145 सस्पेक्टेड केस, लेकिन मौत एक भी नहीं
“लंपी स्किन वायरल डिजीज है। बीमारी में पहले बुखार के लक्षण सामने आएंगे। इसके बाद पांव व गले के नीचे सूजन, चमड़ी पर गांठें, मुंह में लार, नाक व आंखों में पानी आना, दुग्ध उत्पादन में कमी होगी। लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टरों से संपर्क करें।मक्खी, मच्छर के संक्रमण से यह अधिक तेजी से फैलता है। ग्रसित गोवंश को अलग बाड़ों में रखें। गोशालाओं व बाड़ों में साइपरमेथ्रिन का स्प्रे करवाएं।”
– डॉ. विनय मोहन खत्री, वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी
“पुराने काजी हाउस में पथमेड़ा गोशाला के सहयोग से लंपी ग्रसित गोवंश की व्यवस्था की गई है। लंपी स्किन के 145 सस्पेक्टेड केस सामने आए हैं। अब तक एक भी गोवंश की मौत नहीं हुई है। 5 किमी दूरी पर गोवंश का वैक्सीनेशन किया जा रहा है। करीब 10 हजार गोवंश को वैक्सीन लगाई गई है। शिव गडरारोड क्षेत्र में अधिक इंफेक्टेड केस सामने आ रहे हैं। पशुपालकों से अपील है कि मौत होने पर स्थानीय निकाय की सहायता से पशु को दफनाएं।”
– डॉ. नारायणसिंह सोलंकी, संयुक्त निदेशक पशुपालन
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